गुजरात के ऊना में जानवरों की खाल उतार रहे चार दलित लड़कों की पिटाई की घटना पर विरोध जताते हुए कुछ दलित युवकों ने आत्महत्या करने की कोशिश की. ये सभी युवक राजकोट अस्पताल में भर्ती हैं.

दिनेशभाई राजाभाई वेगड़ा:

दिनेश अस्पताल में भर्ती हैं. वे बात करने की स्थिति में नहीं हैं. उनके रिश्तेदार मयूर ने हमें बताया कि दिनेशभाई की उम्र 23 साल है. इनका ताल्लुक जूनागढ़ के बाटवा गांव से है. ये मज़दूरी करते हैं. इनकी हालत पिछले दो दिनों से बिगड़ती जा रही है. ऊना में दलितों के साथ जो कुछ हुआ उससे दिनेशभाई बेहद नाराज़ थे. उनका कहना है कि दलितों पर अत्याचार होते हैं लेकिन इस बारे में कोई कार्रवाई नहीं होती.

पूरी घटना ने मानसिक तौर पर दिनेश पर बुरा प्रभाव डाला है. कभी कभी ये इतनी ताक़त लगाते हैं कि उन्हें काबू में रखना मुश्किल हो जाता है. डॉक्टर कहते हैं कि इनकी तबियत सही है लेकिन हमें ऐसा नहीं लगता. इन्हें संभालना हमारे लिए मुश्किल होता जा रहा है. उन्हें पता भी नहीं कि वो क्या बोल रहे हैं. वो बातों को दोहरा रहे हैं. कभी हंसना शुरू कर देते हैं तो कभी रोना. इनकी हालत किसी मानसिक रोगी की तरह हो गई है.

जगदीश:

मैं मज़दूरी करता हूं. दिन का 300-400 रुपए कमा लेता हूं. मैंने एसिड पीकर आत्महत्या की कोशिश की थी. मैंने समाज की खातिर ऐसा किया. हमें न्याय चाहिए. हमें न्याय नहीं मिलता है. ऐसा करने से चीज़ें बदलेंगी.

मेरी शादी हो गई है. मेरे बच्चे भी हैं. जब से मैंने ऊना की घटना का वीडियो देखा है, तभी से मेरे मन में ये ख्याल चल रहा था कि मेरे भाइयों को मारा गया. इसलिए मैंने एसिड पिया.

दिमाग में यही आया कि हम कुछ करके दिखा देंगे. हम समाज के साथ रहना चाहते हैं. हमें कैसे न्याय मिलेगा ये पता नहीं, लेकिन न्याय ज़रूर मिलेगा. जय भीम. जय भारत.

किशोरभाई:

दलितों को न्याय नहीं मिलता. ऊना वाली घटना का वीडियो मैंने इंटरनेट पर देखा था. मैंने घास मारने वाली दवा खा ली. मुझे लगा कि ऐसा करने से एक मैसेज जाएगा. उससे कोई रास्ता निकलेगा. वीडियो देखकर मुझे बहुत गुस्सा आया. लगा कि समाज के लिए कुछ कर दूं.

मेरे परिवार में तीन भाई हैं. मेरी दो बेटियां और एक बेटा है. मैंने टीवी पर देखा कि मायावती आ रही हैं. लगता है कि दलित समाज के लिए कुछ होगा.

महेश:

मैंने मोबाइल पर ऊना वाली घटना का वीडियो देखा. मुझे बहुत तक़लीफ़ हुई. गुजरात में दलितों को लोग बहुत परेशान करते हैं. आप अख़बार में देखते होंगे. जब मैंने वीडियो देखा तो लगा कि ऐसी ज़िंदगी से क्या फ़ायदा.

साभार : बीबीसी हिंदी


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