मैं पुनः और बार बार अमरनाथ यात्रियों पर हुए जानलेवा हमले की कड़े शब्दों में निंदा करता हूँ और अल्लाह से दुआ करता हूं कि इस घटना के ज़िम्मेदार लोगों को देश की जनता के सामने लेकर आए और उनके किए की कड़ी सज़ा दे। इस घटना के विषय में मेरा केंद्र सरकार से कोई आग्रह नहीं और इससे पूर्व हुई घटनाओं की तरह ही इस घटना में भी न्याय मिलने की कोई उम्मीद नहीं क्योंकि इस वक़्त देश में जो हो रहा है वो घटिया राजनीति के अलावा और जनता के साथ छलावा के अतिरिक्त कुछ भी नहीं।

मौजूदा विध्वंसकारी केंद्र सरकार पिछली केंद्र सरकार से भी ख़तरनाक़ साबित हो रही है और इसके अब तक के कार्यकाल में ऐसी कई घटनाएं घट चुकी है जिसमें निर्दोष लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी है ऐसे में ये घटना ज़्यादा हैरान करने वाली नहीं है। मौजूदा केंद्र सरकार देश की सरहदों से लेकर देश की जनता की सुरक्षा के प्रति बहुत ही लापरवाह है और उनकी रक्षा करने में असफ़ल है लेकिन इस सब के बावजूद कहीं न कहीं अपनी सत्ता लोभी घटिया राजनीति को साम्प्रदायिकता की आड़ लेकर चमकाती ज़रूर नज़र आती है।

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● जैसा कि इस घटना को वर्ष 2000 में गुजरात में घटित गोधराकांड से उत्पन्न वोट बैंक की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है जो मौजूदा केंद्र सरकार के असली चेहरे को बेनक़ाब करती है क्योंकि दोनों ही घटनाओं के समय गुजरात में चुनाव होने वाले थे और दोनों ही घटनाओं में चुनाव से पूर्व मौजूदा केंद्र सरकार यानि भाजपा का उसकी ख़राब नीति के कारण जनता द्वारा घोर विरोध किया जा रहा था जैसा विरोध आज हमको गुजरात में देखना को मिल रहा है। ऐसे में बड़े से बड़े विरोध को समर्थन में बदलने के लिए माहिर इस साम्प्रदायिक पार्टी ने इसका प्रयोग गुजरात में जमकर किया और सत्ता को हासिल कर लिया अब ये फ़िर से वही करना चाहती है लेकिन दुर्भाग्य से अधिकतर लोग इस बात को नहीं समझते।

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चलिए अभी दिनांक 11.07.17 को अमरनाथ यात्रिओं पर हुए जानलेवा हमले और इन घटनाओं के पीछे परोक्ष रूप में केंद्र से हो रही घटिया और साम्प्रदायिक वोट बैंक की राजनीति को समझने की कोशिश करते हैं।

1. 45000 सुरक्षा कर्मियों को केवल 5 आतंकवादी चकमा देकर अमरनाथ श्रद्धलुओं को मार जाते हैं ,कैसे ?

2.श्रद्धलुओं की बस बिना रजिस्ट्रेशन के क्यों जा रही थी ?

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3. बस में सवार यात्री अनरजिस्टर्ड क्यों थे ?

4. इतने लंबे रुट में किसी सुरक्षा कर्मी ने उनकी आईडी चेक क्यों नही की ?

5. गुजरात से इन श्रद्धालुओं को लाने वाला शख़्स कौन था जो बिना रजिस्ट्रेशन के बिना जॉंच करवाये लोगों को ले जा रहा था ?

6. जब 7 बजे के बाद हाइवे पर बस के जाने सी इजाज़त नहीं थी तो ये बस 8:20 मिनिट पर वहां कैसे जा रही थी ?

असीम मिर्जा बैग

इस सब के बावजूद अंत में एक यही उम्मीद बाक़ी रह जाती है कि एक दिन ज़रूर हमारा देश इस विध्वंशकारी साम्प्रदायिक राजनैतिक ताक़तों से आज़ाद होगा और पूर्ण लोकतंत्र को प्राप्त करेगा जहां धर्म तथा जाति से बहुत दूर जनता तथा राष्ट्र का विकास तथा राष्ट्र की सुरक्षा ही हमारा अस्ल मक़सद होगा।


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