राजीव रंजन तिवारी

खुद को बेहद संस्कारी, सुसांस्कृतिक व लोकतांत्रिक कहने वाली भारतीय जनता पार्टी आजकल स्वयं अनेक सवालों के घेरे में है। सवाल सांसद कीर्ति आजाद के निलम्बन के लेकर है। बार-बार पूछा जा रहा है कि आखिर कीर्ति आजाद को क्यों सस्पेंड किया गया। कीर्ति आजाद खुद भी इस सवाल का जवाब जानना चाहते हैं कि आखिरकार डीडीसीए प्रकरण से पार्टी का क्या लेना-देना है, जो अरुण जेटली पर आरोप लगने के बाद उनके ऊपर कार्रवाई की गई। कीर्ति आजाद पर कार्रवाई भाजपा के भीतर की अलोकतांत्रिक, गुलामी व तानाशाही को दर्शाती है। अब भाजपा में मचा आंतरिक घमासान खुलकर सामने आएगा, क्योंकि कीर्ति आजाद के पक्ष में कारवां बढ़ता जा रहा है। इतना ही नहीं, हमेशा गुमनाम सा रहने वाला भाजपा मार्गदर्शक मंडल भी अब मुखर होने लगा है। मार्गदर्शक मंडल के लोग भी चाहते हैं कि जेटली पर जो आरोप लगे हैं, उसकी निष्पक्ष जांच हो।

स्वाभाविक है कि तमाम तरह के सवाल दो शीर्ष नेतृत्व से बनेंगे, एक खुद नरेंद्र मोदी और दूसरा अमित शाह। बीजेपी की सरकार बनने के बाद से यही धारणा रही है कि सरकार के तीन सबसे ताकतवर व्यक्ति नरेंद्र मोदी, अरुण जेटली और अमित शाह हैं। अरुण जेटली की गिनती उनके सबसे बड़े क्राइसिस मैनेजरों में की जाती रही है लेकिन अब जेटली खुद क्राइसिस में हैं, इसलिए सारा मैनेजमेंट अब अमित शाह एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सर आता है। इसीलिए यह सवाल उठ रहा है कि कीर्ति आजाद को सस्पेंड करने वाली बीजेपी क्या शत्रुघ्न सिन्हा पर कार्रवाई से डरती है? भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाला एक सांसद सस्पेंड कर दिया जाता है, जबकि शत्रुध्न सिन्हा ने पार्टी की साख का सवाल बने बिहार चुनावों के दौरान कथित रूप से हरवाने का काम किया।  हार के बाद वे कई मौके पर विरोधी नेताओं से मिलते रहे एवं उनके पक्ष में बयान देकर पार्टी को शर्मसार करते रहे। दरअसल, बीजेपी के बाग़ीसांसद आज़ाद ने पार्टी नेता जेटली पर डीडीसीए में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए। इसी को पार्टी ने अनुशासनहीनता बताकर कीर्ति को निलंबित कर दिया।

यह अलग बात है कि कीर्ति आजाद जैसे मजबूत नेता पर हुई कार्रवाई से भाजपा में डरे-सहमे लोग दबी जुबान से तो इस कार्रवाई को गलत बता रहे हैं, लेकिन खुलकर यह कहने से भी नहीं कतरा रहे हैं कि कीर्ति आज़ाद बीजेपी के लिए गले की हड्डी बन गए थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का कृपापात्र बने रहने के लिए भाजपा के कुछ नेता मीडिया के सामने यहां तक कह रहे हैं कि किसी भी पार्टी या संगठन में एक न्यूनतम अनुशासन की ज़रूरत तो होती है, जिसे कीर्ति आज़ाद बहुत तोड़ चुके थे। अनुशासन तोड़ने वाले ऐसे और भी लोग है। आरोप लगाने वाले पर भी आरोप साबित करने की ज़िम्मेवारी होती है। अगर किसी के पास प्रमाण है तो उसके लिए अदालत है, लेकिन जो लोग सड़कों पर इसका फ़ायदा उठाना चाहते हैं, उनकी बात पर संदेह होता है। सड़क पर तो राजनीतिक लड़ाई ही लड़ी जाती है। पार्टी में रहते हुए पार्टी के ख़िलाफ़ काम करना, ये दोनों चीज़ें एक साथ नहीं चल सकतीं। बहुत पहले एक संपादक ने लिखा था कि व्यवस्था की बुराइयों से समझौता करके ही आप सत्ता की कुर्सी पर बैठ सकते हैं। इसलिए चुनाव के पहले और चुनाव के बाद पार्टियों के लिए स्थिति अलग-अलग होती है। बीजेपी ने सत्ता के लोभ में आकर वह नहीं किया, जिसे उसे पहले ही कर लेना था। आम आदमी पार्टी ने जब बीजेपी पर हमला किया तो शत्रुघ्न सिन्हा, अरविंद केजरीवाल से मिले फिर बिहार में नीतीश कुमार से मिले। सारी सीमाएं तो वे लांघ रहे हैं, लेकिन पता नहीं क्यों बीजेपी बर्दाश्त कर रही है। कूटनीति ज़रूरी होती है लेकिन कूटनीति के लिए अनुशासन को गिरवी नहीं रखा जा सकता। आरोप है कि कीर्ति आज़ाद ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ मिलकर नेता अरुण जेटली के ख़िलाफ़ दिल्ली और ज़िला क्रिकेट संघ में कथित घोटालों का इल्ज़ाम लगाया था। खैर, भाजपा के भीतर की स्थितियां लगातार बिगड़ती जा रही हैं। कोटला स्टेडियम घोटाले में कथित रूप से आवाज उठाने पर निलंबित किए गये सांसद कीर्ति आजाद को लेकर बीजेपी में विवाद बढ़ गया है। पार्टी के बड़े नेता और मार्गदर्शक मंडल के सदस्यों की 24 दिसम्बर को हुई बैठक के बाद सूत्रों के हवाले से खबर मिली कि मार्गदर्शक मंडल के कुछ सदस्य डीडीसीए घोटाले की जांच के पक्ष में है। केंद्र सरकार से मार्गदर्शक मंडल ने घोटाले की जांच के आदेश देने की मांग की है। आडवाणी भी मुरली मनोहर जोशी के घर पहुंचे हैं।

बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल में कुल पांच सदस्य हैं जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी, पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री मुरली मनोहर जोशी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह राज्य मंत्री राजनाथ सिंह के नाम शामिल हैं। उधर, अहमदाबाद में बीजेपी से निलंबित सांसद कीर्ति आजाद ने पत्रकारों से बात करते हुए यह सवाल किया कि डीडीसीए का मुद्दा पार्टी का मामला कैसे है? मैं तो पार्टी से बाहर भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई लड़ रहा था। मैंने कोई भी पार्टी विरोधी गतिविधि नहीं की है। मैं पीएम से इस मामले में दखल को कहूंगा, वही बताएं कि मेरी गलती क्या है। आम आदमी पार्टी से मिले होने के सवालों पर आजाद बोले कि मैं तो वर्षों से यह लड़ाई लड़ रहा हूं। उस समय तो आम आदमी पार्टी अस्तित्व में भी नहीं थी, सो मैं उनसे कैसे मिला हो सकता हूं। वहीं शत्रुघ्न सिन्हा के समर्थन देने के सवाल पर कीर्ति ने कहा कि समर्थन देने वालों का शुक्रिया। कीर्ति ने यह भी बताया कि वह निलंबन पर नोटिस का जवाब देंगे और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे। इससे पहले भी पार्टी से अपने निलंबन के बारे में कीर्ति आजाद ने कहा था कि मैं उम्मीद करता हूं कि पीएम मोदी मुझे बुलाएंगे और मेरे साथ न्याय होगा। उल्लेखनीय है कि कीर्ति आजाद ने पिछले दिनों एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जेटली का नाम लिए बगैर आरोप लगाया था कि डीडीसीए में फर्जी कंपनियों को करोड़ों का भुगतान किया गया। आजाद पिछले काफी समय से क्रिकेट इकाइयों, खासकर डीडीसीए में कथित रूप से फैले भ्रष्टाचार को लेकर काफी मुखर रहे। डीडीसीए में भ्रष्टाकचार के खुलासे का दावा करते हुए आजाद ने कहा था कि डीडीसीए ने कई फर्जी कंपनियों से करार कर करोड़ों रुपये दिए। डीडीसीए में किराये पर लिए गए सामान पर फिजूलखर्ची हुई। वहीं दूसरी तरफ, डीडीसीए के  मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी के संसदीय दल से कहा कि अरुण जेटली उसी तरह बेदाग निकलकर आएंगे, जैसे लालकृष्ण आडवाणी हवाला मामले में आए थे।

अब बीजेपी के ही नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि भाजपा को कीर्ति जैसे ईमानदार नेता को नहीं खोना चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि वो कीर्ति की मदद करेंगे। वहीं भाजपा के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कीर्ति आजा को हीरो करार दिया है। इस तरह उनके पक्ष में पार्टी का कारवां बढ़ता जा रहा है। यह भी संभव है कि भाजपा के भीतर लगी कथित रूप से यह आग प्रधानमंत्री की कुर्सी तक न पहुंच जाए। क्योंकि कीर्ति आजाद ने चेतावनी दी है कि देखिए आगे-आगे होता है क्या? निलंबन के बाद कीर्ति ने कहा कि वो डीडीसीए में अनियमितताओं के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में पीआईएल दाखिल करेंगे। कीर्ति ने मैंने कोई पार्टी विरोधी गतिविधि नहीं की। मैं 9 साल से इस मुद्दे को उठा रहा हूं। अगर कोई जिम्मेदार है तो वो पार्टी स्वयं है। जो सच बोलता है वो बाहर होता है। मैंने व्यक्तिगत किसी के खिलाफ नहीं बोला। ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुझे हटाया गया। कीर्ति ने पीएम से अपने निलंबन की वजह पूछी है। उन्होंने कहा कि मैं पीएम से कहना चाहता हूं कि उन्हें सामने आकर बताना चाहिए कि मेरा कसूर क्या है। मैं जानना चाहता हूं कि क्या मुझे इसलिए निलंबित किया गया है कि मैंने डीडीसीए में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई। क्या मुझे इसलिए निलंबित किया गया है कि मैंने बीसीसीआई में भी भ्रष्टाचार के अन्य मामलों में आवाज उठाई थी। मैं उचित जवाब चाहता हूं. पार्टी को साफ करना चाहिए कि मैंने किनके साथ सांठ-गांठ की है। बहरहाल, स्थितियां अनुकूल नहीं है। अब देखना है कि आगे-आगे होता है क्या?

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राजीव रंजन तिवारी


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