मोहम्मद अनस
मोहम्मद अनस

हरियाणा के तावडू इलाके के गांव डींगरहेड़ी में दो लड़कियों के साथ सामूहिक बालात्कार और दंपत्ती की हत्या में जिन चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है उन्हें बचाने की भरसक कोशिश भाजपा, प्रशासन, पुलिस और स्थानीय भाजपा सांसद कर रहे हैं।

तावडू में आज हुई सभी बिरादरियों की महापंचायत में आरोपी चारों युवकों की अपनी जाति, यादव जाति के लोगों ने भी हिस्सा लिया और तत्काल कार्यवाई की मांग की। स्थानीय यादवों ने पीड़ित मुसलमानों को पांच लाख, तीन लाख एवं कुछ दूसरी जाति के हिंदुओं ने आर्थिक मदद का एलान तथा आरोपियों को तुरंत और सख्त सज़ा देने की मांग की।

पंचायत में यह बात सामने आई है कि आरोपी लड़के शराब पी कर वारदात वाले दिन की सुबह छेड़छाड़ कर चुके थे। रात में शराब पी कर दुबारा से उन्होंने हमला किया है बच्चियों के मामा-मामी को बुरी तरह से घायल करके बांध दिया। बालात्कार से पहले बुरी तरह से पिटाई करने वाले वहशियों का रिश्ता गौ रक्षा समिति से है।

पंचायत से लौटे एक पत्रकार साथी ने बताया कि जिस महिला की हत्या की गई वह मौके से भागने में कामयाब हो जाती परंतु उसके बच्चे को आरोपियों ने पकड़ रखा था और बच्चे को वापस करने की शर्त पर महिला उनके सामने आ जाती है। बच्चे को उल्टा टांग कर महिला को वापस बुलाने पर मजबूर किया जाता है। वारदात को जिस तरह अंजाम दिया गया, वह लूटपाट हरगिज़ नहीं कहा जाएगा, यह साफतौर पर उस गंदी जहनियत और दुश्मनी की तस्वीर है जिसे गौरक्षा या फिर धर्म रक्षा के नाम पर आम तौर पर हमने दादरी से लेकर मुजफ्फरनगर तक में देखा है।

महापंचायत में हिंदुओं और मुसलमानों ने अमन चैन की अपील की, प्रशासन शुरूआत से मामले को लूटपाट में बदलना चाह रहा था परंतु भारी जनदबाव के आगे वह कामयाब नहीं हो सका। जन दबाव स्थानीय लोगों का रहा।

सोशल मीडिया पर जो साथी इस मसले पर लिख रहे हैं वे इस बात का खास ख्याल रखे कि पीड़ितों की मदद करने वाले लोगों में हिंदू भी शामिल हैं। आप किसी भी अपराध का ठीकरा किसी धर्म अथवा जाति के संपूर्ण लोगों पर नहीं फोड़ सकते। कुछ बुरे हैं, बहुत से अच्छे हैं। यही देश है। हां, भाजपा की राज्य सरकार और आरएसएस के स्वयंसेवकों ने पूरी कोशिश की है माहौल को खराब करने की, मामले को दबाने की।

यह मामला बुलंदशहर रेप केस से कम नहीं बल्कि ज्यादा भयावह है। पता नहीं टीवी और अख़बार के मेरे साथियों की संवेदना क्यों नहीं जागी। मालिक का आदेश अभी यूपी कवर करने का है। हरियाणा में चुनाव हो चुका है। यूपी में चुनावी मौसम है। मीडिया की विश्वसनीयता खत्म हो चुकी है। चाहे कैसा पैकेज बना लीजिए, मैं नहीं देखता। बंद कर चुका हूं टीवी देखना। टीवी मेरा ओपिनियन नहीं बना सकती, उसका काम सिर्फ सरकार पर दबाव डालने का है। सरकार आरएसएस की है। इस समय आरएसएस का दबाव सब पर है।

अपराध किसी धर्म अथवा जाति का सामुहिक व्यवहार नहीं होता, व्यक्तिगत होता है। इंसाफ मांगने का तरीका ठीक वैसा होना चाहिए जैसा कि आज महापंचायत में दिखा। और हां जनाब, महापंचायत में जुटान फेसबुक पर लिखने की वजह से नहीं हुआ, यह तो हमारे समाज की सामुहिक चेतना है जो गलत पर उबल पड़ती है। खैर.. आप भड़काते रहिए। आपको क्या पड़ी है। फेसबुक पर लोगों को बलात्कार के तमाम एंगल थमाते रहिए। बलात्कार जैसी विभत्स वारदात पर भी कुछ लोगों ने फेसबुक को सियासी अखाड़ा बना डाला है। बीते कुछ दिनों में मेवात का इतिहास/भूगोल यहां तक की अंकगणित भी पढ़ा दिया गया। कुछ भोले मन मुसलमानों ने उसे ही सच मान लिया।

देश, फेसबुक से नहीं चला करता। संस्थाओं की मॉनिटरिंग और ओवरहालिंग भले यहां से की जा सकती है। बहुत अलग है हमारा समाज। इसे नहीं समझ सकते तो दूसरों से समझने का मौका मत छीनो। दूसरों को शर्मिंदा अथवा गरिया कर आप किसी मसले पर उन्हें साथ नहीं ले सकते। वे साथ आना भी चाहेंगे तो नहीं आएंगे। सोचिए, पंचायत में शामिल मुसलमान एलान कर देता कि सेक्यूलर, वामपंथी, कांग्रेसी, हिंदू, यादव यहां दिखना भी नहीं चाहिए तो कैसा मंज़र होता ? नहीं पता न। हैशटैग वालों, अपनी अपनी दीवारों पर नज़र दौड़ाओ और सोचो क्या और कैसा एलान हुआ है आप द्वारा।

रेपिस्ट गिरफ्तार हो गए हैं। कानून के अनुसार सज़ा ज़रूर मिलेगी। कुछ स्थानीय वकीलों की टीम इस पूरे केस की मॉनिटरिंग भी कर रही है। स्थानीय हिंदू मुसलमान सब इस वारदात के बाद गुस्से और ग़म से भरे हुए हैं।

असल दरिंदे फेसबुक पर हैं । उनसे बचें। ज़मीन पर लोगों की ज़िंदगी हम फेसबुकियों से कहीं अधिक सुकून भरी है। तमाम मीडिया कवरेज, हैशटैग, ट्वीटर ट्रेंड के बावजूद बुलंदशहर रेप पर अब कोई बात नहीं करता। मेवात में जो हुआ उसके लिए समाज ज़मीन पर अपना ज़मीर लेकर उतर आया। क्या यह कम है? आरएसएस के सारे समर्थकों के पास मोबाइल है। वे फेसबुक पर पसरे हुए हैं। हम उनके ट्रेंड में क्यों फंसे? वे नफरत बोएं, वही काट पाएंगे। नफरत की खेती करके भी मुसलमान कुछ नहीं उखाड़ सकता। ये भी एक सच्चाई है। हमारे लिए इस्लाम ने शांति का पैगाम रखा है। हम उसे ही लेकर आगे चल सकते हैं।

सोशल मीडिया पर कुछ लोग इस पूरे मसले को अलग रूख देना चाह रहे हैं जबकि ज़मीनी हक़ीकत यह है कि हिंदू मुसलमान सब इस विभत्स घटना पर एक साथ खड़ा है
आरोपियों की जहनियत सांप्रदायिक थी इससे इंकार नहीं जिन्होंने रेप किया वह इसलिए किया क्योंकि औरतें और बच्चियां मुसलमान थीं हत्या का तरीका क्रूर इसलिए रहा क्यों मरने वाले मुसलमान थे पर इसके बावजूद, मदद करने को जो हाथ आगे आएं हैं उनमें हिंदू शामिल हैं सोशल मीडिया पर मदद करने वालों की भी शिनाख्त होनी चाहिए।

लेखक स्वतंत्र पत्रकार है 

नोट – यह लेखक के निजी विचार है कोहराम न्यूज़ किसी बात की ज़िम्मेदारी नही लेता 


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