नई दिल्ली।

आरटीआई के जरिए अब आप अपने जीवनसाथी की आय, संपत्ति, इन्वेस्टमेंट आदि की जानकारी हासिल कर सकते हैं । सेंट्रल इन्फर्मेशन कमिशन (सीआईसी) ने शुक्रवार को इस बारे में आदेश जारी किए हैं।

सीआईसी के पास घरेलू हिंसा की शिकार हुई और बिना तलाक या समझौते के छोड़ दी गई पत्नी का एक केस आया था। इसी मामले में किसी की आय की जानकारी को उसकी व्यक्तिगत जानकारी मानने से इंकार करते हुए सीआईसी ने नई रूलिंग दी है।

पीड़ित महिला का पति दिल्ली ट्रांस्को में काम करता है। सीआईसी ने दिल्ली ट्रांस्को को निर्देश दिया कि वह अपने कर्मचारी की पत्नी को सभी जरूरी जानकारियां दे। सीआईसी का कहना था कि यह मामला महिला के जीने के अधिकार से संबंधित है।

अभी तक इस तरह की सूचनाएं आरटीआई के अधीन नहीं मानी जाती थीं और इसे प्राइवेट या थर्ड पार्टी इन्फर्मेशन माना जाता था। इस केस में पत्नी ने अपने पति की संपत्ति की जानकारी मांगी थी। इसमें पति के दूसरी शादी करने और पहली पत्नी को बिना वित्तीय मदद दिए छोडऩे पर उसके खिलाफ लिए गए ऐक्शन और दहेज की जानकारी भी मांगी गई थी।

इन्फर्मेशन कमिश्नर एम श्रीधर ने कहा कि व्यापक जनहित, किसी की व्यक्तिगत जानकारी से बड़ा मामला है। उन्होंने कहा कि दिल्ली ट्रांस्को के जनसूचना अधिकारी इस तरह की सूचना की मांग को ठुकरा नहीं सकते हैं। कंपनी को 48 घंटे में सारी जानकारी देने को कहा गया है।

सीआईसी ने इस मामले में दिल्ली हाई कोटज़् के एक हालिया फैसले का उल्लेख भी किया। सीआईसी के मुताबिक कुसुम शर्मा बनाम महेंद्र कुमार शर्मा मामले में अदालत ने दोनों से अपनी आय की जानकारी देने को कहा था, जिसे अभी तक पर्सनल या थर्ड पार्टी इन्फर्मेशन माना जाता था।
कोर्ट के फैसले में कहा गया था कि यह जानकारी देना वित्तीय स्थिति या पति द्वारा पत्नी का खर्च नहीं उठाने और परिजनों की मदद नहीं मिलने पर निर्भर करता है। आदेश के मुताबिक यह पत्नी के जीने के अधिकार को प्रभावित करता है और मेनटिनेंस से संबंधित जानकारी जीवन से संबंधित जानकारी बन जाती है।
खबर एनबीटी


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