ट्रेन के इंतज़ार में हज़रत निज़ामुद्दीन दिल्ली स्टेशन पर बैठा हुआ हूँ पास में एक फैमिली भी बैठी आकर हालाकिं मैं पहले से ही बैठा हुआ था उस बैंच पर लेकिन उनको मैंने जगह दी और एडजस्ट करके बैठा लिया तीन सीट वाली बैंच पर हम बैठे हुए थे तकरीबन एक घण्टे लेट है ट्रेन अनाउंसमेंट हो चुका है.

अब पास बैठे हैं अगर तो थोड़ी बात चीत हो ही जाती है आप लोग कहाँ जा रहे हैं कहाँ से आ रहे हैं कहाँ के रहने वाले हैं ये सब पूछ ही लिया जाता है अक्सर उस फैमिली के साथ दो छोटे बच्चे तकरीबन 5-6 साल उनकी उम्र है साथ में माँ बाप और एक बुज़ुर्ग महिला दादी होगी बच्चो की बोंडिंग्स दोनों बच्चो के साथ काफी अच्छी बन गई पिछले कुछ वक़्त से वो मेरे लेपटॉप और फोन में गेम खेल रहे थे पूरी फैमिली वैल एज्युकेटिड दिखने में लग रही थी.

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अब बात आई खाने पीने की बच्चों ने माँ को बोला भूख लग रही है कुछ दो ना तभी उनकी दादी ने बैग खोला और बिस्किट्स और जूस निकाल कर दे दिया.

मैं गर्मी से तप रहा था स्टेशन का अनाउंसमेंट मेरे सर में लग रहा था सर दर्द बहुत था प्यास से गला सूख रहा था धूप बहुत तेज़ होने के कारण स्टेशन दहक रहा था तभी बच्चों की मम्मी ने कहा बच्चों से बेटा भैया से पूछो शेयर करो मैं कुछ बोल पाता उनकी दादी ने सवाल कर दिया क्या करते हो बेटा नाम क्या है तुम्हारा बातों में पूछना याद ही नहीं रहा मैंनें पहले बच्चों को बोला बेटा मैं नहीं खा सकता मेरा रोज़ा (व्रत) है.

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दादी तीसरी सीट पर बैठी थी मैं अपना नाम बताने ही वाला था दादी ने छूटते ही बोला, “मुसलमान हो, मुल्ला हो..? बहुत ही अजीब सा मूड हो गया उनका जैसे पता नहीं उनके साथ कोई इंसान नहीं बल्कि एलियन बैठा हो उन दोनों बच्चों को तभी बोला गया दूर हटो इसके पास से मैं देखता रह गया आखिर ऐसा क्या किया मैंने या हुआ क्या है घंटे भर पहले जो फैमिली मेरे साथ बैठी हुई थी हंस बोल रही थी वो अचानक नफरत भरी नज़रों से मुझसे नफरत करके उठ खड़ी हुई उनकी मानसिकता पर गुस्सा इतना नहीं आया लेकिन अफसोस बहुत हुआ कि क्या हो गया मेरे देश के लोगों को क्या मुसलमान होना हिन्दुस्तान में गुनाह है.

हम कौन हैं और एक मुसलमान क्या है मुझे इसका ढूंढोरा नहीं पीटना अपनी इस पोस्ट में ना मुझे सालों पहले राज कर के गए मुगलों (मुसलमानों) से मतलब और ना इसका घमंड की मैं एक ऐसे स्टेशन पर बैठा हुआ हूँ जिसका नाम हज़रत निज़ामुद्दीन है.

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क्या हो गया मेरे देश के लोगों को क्यों और कैसे ये नफरते बढ़ रही है क्यों मानसिकताएं अपाहिज हो चुकी हैं लोगो की अल्लाह अक्ल दे सब लोगो को और मेरे देश में सुकून पैदा कर और मैं एक मे नहीं पूरी दुनिया के सामने बड़े गर्व से कहूँगा की हाँ मैं सच्चा मुसलमान हूँ और इस्लाम को मानता हूँ और अगर ज़रूरत पड़े कभी तो हस्ते हस्ते देश के लिए शहीद भी हो जाऊंगा भारत माता की जय मेरा भारत देश महान ..।

Suhail Hashmi की फेसबुक वाल से


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