लखनऊ, रिहाई मंच ने गाजियाबाद के मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के जिला अध्यक्ष अमन यादव द्वारा मुस्लिम युवक की पिटाई की घटना को सपा की साम्प्रदायिक जेहनियत का नया उदाहरण बताते हुए उसकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।

Rihai Manch

रिहाई मंच नेता राजीव यादव ने बताया कि गाजियाबाद के विजय नगर थाने में मिर्जापुर के बाशिंदे शमशाद के 12 वर्षिय पुत्र जिशान को 12 दिसम्बर को मुलायम सिंह यादव यूथ ब्रिगेड के जिला अध्यक्ष अमन यादव के गुंडों ने अपनी मोटरसाइकिल से जिशान की साइकिल टकरा जाने पर बुरी तरह पीट दिया। जिसकी शिकायत करने घर पहुंचे शमशाद और उसके साथियों को अमन यादव ने दूसरे दिन भी बुरी तरह पीटा और उन पर फायरिंग भी की तथा पुलिस से अपने रसूख के प्रभाव में पीड़ितों पर ही मारपीट और फायरिंग का झूठा मुकदमा भी दर्ज करा दिया और पीड़ित शमशाद को ही पुलिस ने जेल भेज दिया। सपा नेता की साम्प्रदायिक गुंडागर्दी यहीं तक नहीं रुकी उसने 14 दिसम्बर को शमशाद के दूसरे बेटे 14 वर्षीय दिलशाद को भी बाजार में पकड़ कर बुरी तरह पिटवा दिया। जिस पर स्थानीय लोगों के विरोध के बाद पुलिस ने अमन यादव पर मुकदमा तो दर्ज कर लिया, लेकिन जानबूझ कर उसे गायब बता रही है, जिससे आस-पास के इलाके में काफी तनाव फैल गया है।

रिहाई मंच नेता ने आरोप लगाया है कि मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के जिला अध्यक्ष द्वारा मुस्लिम बच्चों को पीटने की घटना ने साबित कर दिया है कि मुखिया मुलायम सिंह ही नहीं नीचे तक सपा नेता भाजपा और संघ परिवार का मुस्लिम विरोधी साम्प्रदायिक एजेंडा आगे बढ़ाने में लग गए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्वों की हौसला अफजाई आजम खान जैसे नेताओं की सपा में मौजूदगी भी करती है जो ऐसी तमाम घटनाओं पर चुप्पी साध लेते हैं।

रिहाई मंच प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य अनिल यादव ने कहा कि मुलायम सिंह की पूरी राजनीति ने यादवों को एक साम्प्रदायिक जाति में तब्दील कर दिया है, जो उसके मूल चरित्र के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि पूरे सूबे में जहां-जहां भी मुस्लिम विरोधी साम्प्रदायिक हिंसा की घटनाएं हुई हैं उनमें यादवों और दलितों की अग्रणी भूमिका रही है, जो पूरे सामाजिक न्याय की राजनीति पर ही सवाल खड़ा कर देता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में इस समय मुसलमानों के लिए आपातकाल से भी बुरा माहौल बना हुआ है, क्योंकि उस समय सिर्फ कांग्रेस के गुंडे और पुलिस ही आम लोगों पर हमलावर थे, लेकिन आज मुस्लिमों के खिलाफ पुलिस और संघ गिरोह तो हमलावर है ही सपा और बसपा की जनाधार जातियों के लोग भी उनके खिलाफ खुलेआम जुल्म करते देखे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि साम्प्रदायिक हिंसा में इन जातियों की बढ़ती भूमिका ने साफ कर दिया है कि अब प्रदेश को अस्मितावादी राजनीति के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। प्रदेश को एक नए राजनीतिक विकल्प की जरूरत है, जो राजनीति के साम्प्रदायिकीकरण के खिलाफ निर्णायक संघर्ष कर सके।

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