शिवपाल सिंह यादव ने की रामदेव से मुलाकात। भारत माता की जय न बोलने वालों का सर काटने की धमकी देने वाले उद्योगपति रामदेव पर समाजवादी पार्टी का स्टैंड अगर यही है तो विधानसभा चुनाव में उसे भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी है जो समाजवादी पार्टी रामदेव जैसे धूर्त और ढोंगी के चौखट पर पहुंच रही है। यदि वे रामदेव का विरोध नहीं कर सकते तो समर्थन भी न करें। लेकिन यहां तो शिवपाल सिंह यादव उन्हें हर तरह की सरकारी मदद का भरोसा देने खुद उनके पास पहुंच गए।

मुसलमानों की ज़रूरत यदि समाजवादी पार्टी को नहीं है तो , मुसलमान भी उससे दूरी बना ही लेगा। अच्छा है। ये सब होता रहे ताकि पार्टी के शीर्ष पर मौजूद लोगों की असलियत प्रदेश के मुसलमानों के सामने आ जाए। शिवपाल सिंह यादव को माफी मांगनी चाहिए यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो रामदेव से ही वोट मांगें।

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सरकार में नंबर दो की हैसियत रखने वाले मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने उद्योगपति और भारत माता की जय न कहने वालों की गर्दन काटने की बात कहने वाले रामदेव से उनके घर जाकर मुलाकात की।

शिवपाल सिंह यादव क्या गला काटने की ज़मीन तैयार करने गए थे रामदेव के पास? मुसलमानों का वोट लेकर उनसे गद्दारी ज्यादा दिन तक नहीं छुपेगी। शिवपाल सिंह यादव को माफी मांगनी चाहिए।

शिवपाल यादव और रामदेव की मुलाकात के पीछे कोई कुछ भी अंदाज़ लगा सकता है। पर मेरा मानना है कि शिवपाल यादव को पता चल गया है कि मुसलमान इस बार समाजवादी पार्टी को वोट नहीं देंगे।

समाजवादी पार्टी अपना बेस वोट खोने के कगार पर है। शिवपाल की रामदेव से मीटिंग उस आधार वोट के बदले में नया वोट बैंक खोजने की चर्चा भर है। मतलब शिवपाल यादव और रामदेव के सहयोग से समाजवादी पार्टी फिर से सत्ता में आ रही है। मुबारक हो सपाईयों।

शिवपाल यादव की देन है जो कि उत्तर प्रदेश में चार पहिया गाड़ियों पर कमल झंडा दिखने लगे हैं। सामाजवादी मूल्यों की रक्षा ऐसे लोग नहीं कर सकते जो रामदेव से मुलाकात करें। एक तरफ रामदेव से मुलाकात होगी तो दूसरी तरफ मुसलमानों का वोट भी चाहेंगे। दोनों काम एक साथ कैसे होगा शिवपाल जी?

बेस वोट बैंक ही नहीं रहेगा तो ‘अबकी बार अखिलेश सरकार’ सिर्फ नारा ही रह जाएगा। नारा बहुत जल्दी नाड़ा बनता है। बांधिएगा उससे रामदेव ओर खुद को। रामदेव मंज़ूर नहीं। रामदेव को पसंद करने वाले भी मंज़ूर नहीं।

रामदेव से शिवपाल यादव की मुलाकात कहीं भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच किसी समझौते के तहत तो नहीं हुई है।
देश जानता है कि रामदेव नरेंद्र मोदी के बेहद खास और करीबी हैं। उनके बयान धार्मिक अल्पसंख्यकों एवं धर्मनिरपेक्षिता के साथ खड़े लोगों के विरोध में आते रहे हैं।

काला धन पर उन्हीं का बनाया माहौल था जिसके बाद देश ने सत्ता परिवर्तन की सोच ली और आज पछता रहा है। मैं भी जानता हूं कि सपा और भाजपा एक साथ चुनाव नहीं लड़ेंगे लेकिन एक दूसरे का साथ छोड़ देंगे , ऐसा भी नहीं लगता। कम्यूनल पॉलिटिक्स की बड़ी मछली बीजेपी के साथ सेक्यूलरिज्म का टैटू बनवा कर घूमोगी तो छेड़खानी हो जाएगी। बस यही बताना था। रामदेव से दूरी नहीं बनेगी तो प्रदेश का मुसलमान साईकिल पर भला कैसे सवार होगा? वैसे ही हजारों मुद्दे हैं , कहां से शुरू करें कहां को खत्म। एक और,रामदेव को उठा लाए।

रामदेव के माध्यम से शिवपाल यादव नरेंद्र मोदी को साध रहे हैं। इतने सारे केस हैं। सीबीआई है। बहुत डरपोक हैं शार्ष के सपाई। कार्यकर्ता तो जान लड़ा देता है। लेकिन जनता का पैसा लूट कर तिजोरी भरने वाले चाचाओं ने भतीजों का सब कुछ लूट लिया। शिवपाल यादव शर्म करो।

रामगोपाल यादव यदि जेल नहीं गए तो समाजवादी पार्टी बुरी तरह हारेगी। क्योंकि शीर्ष नेतृत्व मुकदमों के बोझ से डरा हुआ है। और उनको बचाने के लिए बीजेपी को फिर से वॉकओवर दिया जा सकता है, ऐसी संभावना है। रामगोपाल, उनके करप्ट बेटे को जेल जाना ही चाहिए समाज हित में।

  • मोहम्मद अनस


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