dantewada

चिंतालनार में अप्रैल 2010 में एक नक्सली हमला हुआ था- सीआरपी के 76 जवान मारे गए थे. एक दिन के शोक की घोषणा नहीं की गयी. फिर मई 2013 में एक हुआ- अबकी हमला कांग्रेस काफिले पर था- 28 लोग मारे गए, राज्य अध्यक्ष नंदकुमार पटेल और राष्ट्रीय नेता वी सी शुक्ल सहित 12 कांग्रेसी, 8 जवान/पुलिस और चार ग्रामीण. राज्य की भाजपा और केंद्र की कांग्रेस सरकार ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया, राज्य सरकार ने तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की. उसके बाद कई हमले हुए- जैसे कल वाला. फिर कभी जवानों पर हमला लोकतंत्र पर हमला नहीं बना, राजकीय शोक नहीं घोषित हुआ.


क्या है कि कि जवानों की लाश पर राष्ट्रभक्त होना आसान है, जवान मरते क्यों हैं, यह समझने की कोशिश में कई भ्रम टूट जायेंगे. खैर, ऊपर के किसी तथ्य में कोई गलती हो तो बताइयेगा- तब तक एक अच्छी दोस्त और बीएसएफ अधिकारी की पत्नी Rachana के दो सवाल देखिये- हिम्मत हो तो खुद से पूछ लीजियेगा, देशभक्ति की दुकान लगाने वालों से तो नहीं ही होगी!

1. नेतागण JNU प्रकरण में हनुमंता की बात करते हैं। Pampor में शहीद हुए सैनिकों की बात करते हैं। CRPF घटना के समय मोदी जी बेलजिययम में खून का रिश्ता तलाश कर रहे हैं. भावनाओं से खेलना नेता होने का प्रथम गुण है।

2. सैनिकों की हत्या किसी news channel पर बहस का मुद्दा नहीं है न किसी channel की screen blank कर दे ऐसा विषय है। न धरना होता है न कोई उनके हत्यारों के अाजाद होने पर शरमिंदा है। न मोमबत्तियां जलाई जाती हैं न पुरस्कार वापस लौटाए जाते हैं

किस तरह का साथ दे रहे हैं naxalite native tribes का उनके scools,hospital police station जलाकर roads तोड़ कर निहत्थे सिपाहियों की हत्या करके

Samar Anarya

Asian Human Rights Commission
Programme Coordinator · April 2012 to present · Hong Kong
Right to Food Programme

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