– उदय छे

अभी 2 दिन पहले रोहतक में एक लड़की के साथ जो जघन्य सामूहिक बलात्कार और उसके बाद उसकी निर्ममता से जो हत्या हुई। उसकी जैसे-जैसे परते खुल रही है वो बहुत ही भयानक है। क्योंकि बलात्कारी और हत्यारे कोई और नही उस लड़की का पुराना प्रेमी और प्रेमी के दोस्त ही है जिन्होंने उसको सोनीपत से जबर्दस्ती गाड़ी में अपरहण किया। उसके बाद लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार फिर उसकी निर्ममता से हत्या की। उसके प्रत्येक अंग को बुरी तरह से कुचल दिया। उसके बाद उसकी देह को झाड़ियों में फेंक दिया। जहाँ उसको कुते खाते रहे। अख़बार के अनुसार लड़की को ईंट से बुरी तरह मारा गया, उसको गाड़ी से भी कुचला गया, उसके गुप्तांग में लोहे की छड़ घुसेड़ दी गयी। ये अमानवीयता की हद है।

अब वो लड़का कहता है कि मै उस लड़की से बहुत प्यार करता था। मैं उससे शादी करना चाहता था। लेकिन लड़की ने शादी से जब मना कर दिया तो मैने ये सब किया।

क्या प्यार की आखिरी मंजिल शादी है ?

अगर किसी कारण से शादी न हो तो आप उसको मार दोगे? आप उससे सामूहिक बलात्कार करोगे? आप उस पर तेजाब डाल दोगे? अगर प्यार की आखिरी मंजिल तुम्हारी नजर में शादी है तो तुम उससे प्यार नही कर रहे हो तुम उस पर कब्जा करना चाहते हो, उसको गुलाम बनाना चाहते हो।

ये तुम्हारी एकाधिकार की सोच है। वो किससे बात करे, कहाँ बैठे, कहाँ जाये, क्या खाएं, क्या पहनेये सब आप तय करना चाहते हो। अगर वो आपकी गुलामी का विरोध करे, आपके एकाधिकार का विरोध करे तो आप उसको सजा दोगे। जैसे लड़की अपने बाप के एकाधिकार का विरोध जब करती है, अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेना चाहती है तो उसका रूढ़िवादी बाप उस पर हमला करता है। उसकी जान भी ले लेता है। वैसे ही तुम भी उस पर हमला करते हो। तुम उसकी योनि पर, उसकी छाती पर, उसके चेहरे पर हमला करते हो क्योकि तुमको लगता है कि ये सिर्फ तुम्हारे लिए है।

लड़की ने प्यार करने की गलती क्या की अब उसका अपनेशरीर पर और अपने दिमाक पर कोई अधिकार नही है? अगर वो अपनी जिंदगी के फैंसले खुद लेगी तो उसको इसकी सजा कभी बाप की तरफ से तो कभी प्रेमी की तरफ से मिलेगी?

तुम्हारी नजर मेंप्यार का मतलब हैकी वो सिर्फ तुम्हारे लिए बनी है, उस पर सिर्फ तुम्हारा हक है। तुमको वो अच्छी लगती है। तुमको उसका चेहरा देखे बिना नींद नही आती है। तुम्हारी नजर में वो चेहरा दुनिया में तुम्हारे लिए सबसे बेहतरीन चेहरा है। लेकिन उस बेहतरीन जिस्म को, चेहरे को जब तुम हासिल नही कर पाते हो या वो तुमसे दूर जाता है तो तुम उस जिस्म को चाकू से खोद देते हो, चेहरे को तुम तेजाब से जला देते हो। उसके गुप्तांग में लोहे की छड़ डाल देते हो। ऐसा कैसे कर लेते हो तुम, कोई भी अपनी सबसे प्यारी वस्तु को ऐसे कैसे नष्टकर सकता है। इसका मतलब तुम प्यार नही करते थे। ये तुम्हारी सनक थी। जब आपप्यार में होते हो तो एक दूसरे के किये चाँद तारे तोड़ने की बात करते हो। लेकिन लड़की ने एक इंकार क्या किया आपने चाँद तारो की जगह लड़की के शरीर को ही ईंटो से तोड़ दिया। गाड़ी से कुचल दिया।

जिसने आपको अपनी योनि से चर्म सुख की अनुभूति करवाई। तुमने उसकी योनि को लोहे की छड़ से खोद दिया। क्या किसी लड़की का इंकार इतना भयंकर हैउस लड़की के लिए।

लेकिन फिर ये प्यार नही था तो क्या था। ये सिर्फ वासना थी, ये सनकीपन था एकाधिकार करने के लिए। ये कोई पहली घटना तो है नही, देश में भी और खासकर उतर भारत में ये घटनाएं होती रहती है। हरियाणा, दिल्ली, उतर प्रदेश तो इन घटनाओं के लिए चर्चित है। प्यार में धोखा खाये आशिक ने मारा चाकू, चेहरे पर डाला तेजाब, गल घोट कर की हत्या आदि ये खबर आती रहती है।

अब सवाल ये है कि अगर मामूली सा भी लड़के को उस लड़की से कभी प्यार होता तो वो बलात्कार तो दूर की बात है उसकी मर्जी के बिना उसको छूता भी नही। हत्या करना तो दूर उसको खरोंच भी नही आने देता। क्या कोई सच्चा प्रेमी अपनी प्रेमिका के साथ ऐसा करेगा। चाहे एक तरफा ही प्यार क्यों न हो।वो ऐसा कभी भी नही करेगा। अगर कोई भी सिरफिरा प्रेमी ऐसा करने की सोचता है तो वो मानसिक बीमार है। उसको अपना इलाज किसी अच्छे दिमाकी डॉ से करवाना चाहिए। लेकिन ऐसी घटनाएं दिनों दिन बढ़ रही है। इसके पीछे कारण क्या है।

सबसे बड़ा बुनियादी कारण है पुरुषवादी सोच जो महिला को दोयम दर्जे का मानती है। जो मानती है कि महिला पुरुषसे कमजोरहै, महिला का रक्षक पुरुष होता है, महिला को पतिव्रता होना चाहिए, महिला को पुरूष की सत्ता के अधीन रहना चाहिए। महिला को घर में चुल्ले-चोके तक सीमित रहना चाहिये। बाहर निकलेगी तो ये घटनाएं तो होगी ही। पिछले दिनों राष्ट्रीय पार्टी के एक नेता ने ब्यान दिया था कि गाड़ी बाजार में आएगी तो एक्सीडेंट तो होगा ही। इसलिए महिला को अंदर रहना चाहिए।

हरियाणा में एक जोक चलता है कि महिलाएं शादी के बाद सिंदूर क्यों लगाती है ? वो सिंदूर इसलिए लगाती है ताकि नये लड़को को पता चल जाये की इस प्लाट की रजिस्ट्री हो चुकी है। वो किसी दूसरे प्लाट की खोज करे।

ये है हमारे समाज की सोच जो महिला को प्रॉपर्टी समझते है। भारतीय सिनेमा भी ऐसी फिल्मों से भरा पड़ा है कभी सनी देओल की “जीत” फिल्म देखना जब हीरोइन करिश्मा कपूर कहती है कि अगर हमारी शादी न हो सकी तो, हीरो सनी कहता है पुरे गुस्से में काजल तुम सिर्फ मेरी हो, सिर्फ मेरी, तुम अगर किसी और की हुई तो लाशें बिछा दूंगा लाशें। क्यों भई तुमने इसे खरीद लिया है? ये तेरी गुलाम है?

जिस माँ ने इसको 9 महीने पेट में रखा। बड़ी मुसीबतों से पैदा किया, माँ-बाप ने इसको 20 साल पाला इस पर अधिकार जब उसका भी नही है तो तेरा कैसे हो सकता है। 2 दिन के प्यार के चक्कर में तुम इसको गुलाम बनाना चाहते हो? गुलाम न बनी तो तेजाब डालोगे, उससे रेप करोगे, उसके गुप्तांग फाड़ोगे, उसकी जान लोगे? हद है सनक की भी…..

जो प्रेम घृणा बन सकता है, वह प्रेम नहीं है!”ओशो

प्यार का मतलब तो हम जिससे प्यार करते है हमारे कारण उसके आँख में पानी का एक कतरा भी कैसे आ जाये, उसकी खुशी में हमारी ख़ुशी है, उसकी आजादी में हमारी आजादी है। प्यारकिसी भी बंधन का नाम नही है। बलिदान और त्याग का दूसरा नाम ही प्यार है।एक दूसरे के विचार, भावनाओ, आजादी की कद्र करना प्यार है। जब तक साथ है तब तक साथ है किसी भी कारण से अलगहुए तो भी पूरी उम्र उससे प्यार रहता है। जरूरी नही है कि शादी हो वो अच्छे दोस्त पूरी उम्र रह सकते है। वो क्या खायेगी, क्या पीयेगी, कहाँ घूमेगी, किसके साथ सोएगी वो उसका निजी मामला है। उसकी आजादी है। आपको पसन्द नही है तो आप उसको छोड़ सकते है। लेकिन बेवफाई का रोना रो कर के उस पर हमला करना कदापि उचित नही है ये सीधा-सीधा आधी आबादी पर हमला है।

प्रेम खेतौं नीपजै, प्रेम हाटि बिकाइकबीर

प्रेम न किसी खेत में पैदा होता है और न ही किसी बाजार में बिकता है।

इस समस्या का समाधान क्या हो ? इस पर समाज में 2 रॉय है। पहली रॉय के लोगो में कुछ जो महिलाओं को ही बलात्कार के लिए जिम्मेदार ज्यादा मानते है। वो सवाल उठाते हैं कि महिला किसी से प्यार करे ही क्यों, महिला ऐसे वैसे कपड़े पहने ही क्यों, महिला घर से बाहर निकले ही क्यों। कुछ का मानना होता है किबलात्कारियों को फांसी होनी चाहिए, उनका लिंग काट लेना चाहिए, उनके हाथ-पांव काट देने चाहिए, जनता के सामने उनको मारा जाये। कुछ ऐसे भी है कि जो मानते है कि लड़कियां प्यार में धोखा देगी तो ऐसा होता ही है। लेकिन ये सभी रॉय बेकार है क्योंकि बलात्कार की घटनाएं 1 साल की बच्ची से 80 साल की बुजर्ग महिला से हो रही है। घर, खेत, ऑफिसों में हो रही है। फांसी या दूसरी तीसरी सजाओ से भी रोकना नामुमकिन है क्योंकि ये घटना जब घट रही थी उसीसमय सुप्रीम कोर्ट निर्भया के बलात्कारियों को फांसी की सजा सुना रहा था। फिर भी ये घटना होती है। गुड़गांवमें चलती गाड़ी में एक लड़की से सामूहिक बलात्कार भी उसी समय होता है। पुरे देश को तो छोड़ ही दीजिये कितनी घटनाएं हुई होंगी।

लेकिन जो प्रगतिशील, बुद्विजीवी, कम्युनिस्ट है उनका मानना है कि बलात्कार को कड़ी सजा देने से या कड़े कानून बनाने से नही रोका जा सकता है। अगर बलात्कार को रोकना है तो सबसेपहले गैर बराबरी पर आधारति समाज को खत्म करना पड़ेगा। महिला को उपभोग की वस्तु न मानकरइंसान मानना पड़ेगा, महिला को सेक्स डोल मानना बन्द करना पड़ेगा, सेक्स एजुकेशन सबको देनी पड़ेगी। महिलाओं को चुल्ले-चोके से निकाल कर आर्थिक आजादी देनी पड़ेगी, काम का बंटवारा मेल-फीमेल में जो है उसको खत्म करना पड़ेगा। लड़के-लड़की की परवरिस भी मेल-फीमेल के अनुसार न करके बराबरी पर करनी पड़ेगी। लड़कियों को भी इस काल्पनिक प्यार के चक्कर से बचनाहोगा व् उनको बचना होगा पूँजीवाद द्वारा बनाई जा रही उपभोग की वस्तु बनने से उनको बराबरी के लिए चल रही इस लड़ाई की अगुहाई करनी पड़ेगी।

सच्चा प्यार तब स्थापित होगा जब औरत और पुरुष के बीच वास्तविक बराबरी आएगी। जब औरतों को मात्र एक सेक्स ऑब्जेक्ट न मानक़र इंसान के रूप में स्वीकारा जाएगाऔर जब सच्चा प्यार स्थापित होगा तो नफरत व् हिंसा के लिए कोई जगह नहीं रह जायेगी। तब कोई निर्भया बलात्कार का शिकार नहीं होगी। हमें महिला पुरुष बराबरी के लिए काम करना होगा। इस दुनिया को बेहतर और खूबसूरत बनाने के लिए काम करना होगा। हमको समतामूलक समाज बनाने के लिए लड़ना होगा।

(ये लेखक के निजी विचार है, आवश्यक नहीं की कोहराम न्यूज़ इसे सहमत हो)

 


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