जो देश के विरुद्ध शस्त्र उठाता है, उसे खंडित करने का इरादा रखता है, अराजकता का माहौल बनाकर लोगों को भड़काता है, देश के दुश्मन की ओर से जासूसी करता है या गलत काम में उसकी मदद करता है, मेरी नजर में वह देशद्रोही है। मेरा स्पष्ट मत है कि उस शख्स का नाम-गांव, पता-ठिकाना, धर्म-मजहब बाद में पूछो, पहले मृत्युदंड दो।

कोई भी देश यह बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर सकता कि आप उसके शत्रु का साथ दें। आपको तय करना होगा कि या तो देश के साथ हैं या फिर दुश्मन के साथ। इसके बाद आपकी मर्जी है कि जहां मन चाहे, चले जाएं।

मगर देशद्रोह के दायरे में सिर्फ इतनी-सी बातें नहीं आतीं। अगर मैं बेगुनाह नागरिकों को मारता हूं, दहशत का माहौल बनाता हूं, मेहनत करना नहीं चाहता लेकिन सब सुविधाएं घर बैठे हासिल करना चाहता हूं, राष्ट्र की संपत्ति को जानबूझकर नुकसान पहुंचाता हूं, ट्रेन की पटरियां उखाड़ता हूं, बसों में आग लगाता हूं, एंबुलेंस का रास्ता रोकता हूं, तो ये काम किसी भी दृष्टि से देशभक्ति के नहीं हैं। चाहे ये खोटे कर्म करते हुए मैं वंदे मातरम के कितने भी नारे लगाऊं, यह देशद्रोह है। भले ही आप इससे सहमत हों या न हों।

देश में आरक्षण की आग लगी हुई है। हरियाणा जल रहा है, अब इसकी आंच राजस्थान में भी पहुंच चुकी है। जाट आरक्षण की ज्वाला से देश फूंक रहे हैं, अब राजपूत कमर कसने की तैयारी में हैं। कोई आश्चर्य नहीं कि फिर गुर्जर, ब्राह्मण या किसी और जाति के शुभचिंतक अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने आ जाएं।

लोग नादान हैं। यह चूल्हा देश की बर्बादी से लगी आग में जल रहा है और लोगों के हिस्से कुछ नहीं आएगा। हां, नेताओं के वारे-न्यारे हो सकते हैं। मेरा आप सबसे एक सवाल है। मैं यह नहीं पूछूंगा कि आरक्षण सही है या गलत लेकिन यह पूछना चाहूंगा कि आरक्षण मांगने का यह तरीका कितना सही है?

आपको क्या हक है कि सार्वजनिक संपत्ति को आग के हवाले करें? इनमें से ऐसे काफी लोग होंगे जो बात-बात पर हर किसी से देशभक्ति का प्रमाण पत्र मांगने लगते हैं लेकिन जब इनकी आजमाइश होती है तो विनाश का तांडव मचा देते हैं। मुझे तो किसी भी नजरिए से यह काम देशभक्ति का नहीं लगता।

आरक्षण की मांग कई बार हो चुकी है। विभिन्न धर्मों के लोग अलग-अलग आधार पर आरक्षण की मांग कर चुके हैं लेकिन जैसा बवंडर हमने मचाया है, वैसा कोई नहीं मचाता। इस मामले में मैं भारत के मुसलमानों की दिल से तारीफ करता हूं। कम से कम वे आरक्षण के नाम पर
देश को फूंकने की ऐसी हरकत तो नहीं करते। मैं इनके सब्र की प्रशंसा करता हूं।

कल्पना कीजिए, अगर हरियाणा और राजस्थान में जो काम हमारे हिंदू भाई कर रहे हैं, अगर वैसा ही मुसलमान भी करते तो लोगों की प्रतिक्रिया क्या होती?

बेशक, कोई कहता कि ये तो दूसरा पाकिस्तान बनाने चले हैं, एक पाकिस्तान से इनका पेट नहीं भरा, अब देश के और टुकड़े करने चले हैं, यह भारत को तोडऩे की साजिश है और मुसलमान इसमें भागीदार बन रहे हैं…।

यकीनन, लोग ऐसा ही कहते। कदम-कदम पर इन लोगों से देशभक्ति का सर्टिफिकेट मांगा जाता लेकिन भारत का मुस्लिम समाज आरक्षण के नाम पर ऐसे हुड़दंग नहीं मचाता। वह मेहनत करना जानता है। छोटी-मोटी दुकान चलाकर रोटी कमा लेगा, अरब के तपते रेगिस्तान में घर और वतन से बहुत दूर रह लेगा लेकिन यूं बात-बात पर आरक्षण की आग नहीं लगाएगा।

यह इस मुल्क से मुहब्बत का निशानी है। हां, मुसलमानों में कोई आदमी बुरा हो सकता है, गुनाह कर सकता है, लेकिन मैं बात आरक्षण की कर रहा हूं। मुसलमानों ने आरक्षण के नाम पर ऐसा शर्मनाक हुल्लड़ कभी नहीं मचाया जैसा आज हमने मचा रखा है।

चलते-चलते एक और बात…

जो लोग हर मुद्दे पर दूसरों से देशभक्ति का सबूत मांगते हैं, क्या वे आरक्षण की आग में ट्रेन, बस और घर जलाने वालों से राष्ट्रभक्ति का सबूत मांगेंगे? वे अब तक खामोश क्यों हैं? राष्ट्र को नुकसान पहुंचा चुके इन लोगों को वे गद्दार कब घोषित करेंगे? आप हर गद्दार को पाकिस्तान भेजने का ऐलान करते हैं, फिर इन गुनहगारों के लिए पाकिस्तान का टिकट क्यों नहीं मांगते?

एक बार भेजकर देखिए, अपना घर जलाने वालों को तो पाकिस्तान भी घर नहीं देगा।

राजीव शर्मा –

गांव का गुरुकुल से


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