अपनी भारत-यात्रा के दौरान इमामे-काबा ने एक बयान दिया जिससे उन लोगों को भी इमामे-काबा के अक़ायद के बारे में जानकारी हो गयी जो अब तक इससे नावाकिफ थे .मैंने कुछ मुद्दत से इस्लाम के सबसे बड़े नासूर–वहाबियत – पर एक मसलेहत के तहत ख़ामोशी अख्तियार कर रखी थी , मगर इमामे-काबा ने अपनी भारत-यात्रा के दौरान एक ऐसा हास्यास्पद बयान दे दिया कि प्रतिक्रिया से खुद को रोक नहीं पा रहा हूँ .उनका बयान देवबंदी ओलेमा के सन्दर्भ में है . वे देवबंदी ओलेमा , जो अपनी गुस्ताखियों के सबब ” कुफ्र ” के मुकाम तक पहुँच चुके हैं , उनको इमामे-काबा कह रहे हैं कि -” अल्लाह ने उन्हें ” खास” मुकाम” दिया है /// और तो और , इस बयान को सुन कर ” शौके मुशर्रफ ” जैसे मुस्लिम बुद्धिजीवियों का जौको -शौक इस क़दर बढ़ गया कि उन्होंने बरेलवी ओलेमा को चुनौती दे डाली कि अरे बरेलवियों ! तुमकुछ भी कर लो , तुम देवबंदी ओलेमा के मुकाम तक नहीं पहुँच सकते.

imam-e-qaba

मैं इमामे-काबा सहित इस जमात को चुनौती देता हूँ कि अल्लाह ने अहले सुन्नत -वल जमात को जो मक़ाम दिया है , उस तक तुम्हारा कोई एक …मात्र एक…सिर्फ एक ओलेमा ही पहुँच सका हो तो उसका नाम बता दीजिये ? दुनिया में कोई एक ” वहाबी वली ” हो तो उसका नाम बता दीजिये ??? गौस, क़ुतुब , अवलिया , अब्दाल…….कभी इनका नाम सुना है आपने ? आपने इन नुफुसे-कुदसिया के तो नाम भी नहीं सुने होंगे , क्योकि आपके मसलक में ऐसी हस्तियाँ कभी पैदा हो ही नहीं सकतीं जिन्हें अल्लाह ने अपना ” महबूब बन्दा ” बनाया है . मैं आपकी और आपके अकीदे की हकीक़त बयान नहीं करना चाहता था , मगर आप और आप के ” अंधभक्त ” मुझे मजबूर कर देते हैं कि आप लोगों की वो भयानक सच्चाईयां बयान करूँ , जिस पर आप ” दीन ” और ” तबलीग” का पर्दा लगा कर भोले-भाले मुसलमानों को धोखा देने के काम में मुलव्विस हैं.

लोग इमामे-काबा को बहुत मोहतरम हस्ती समझते हैं, मगर एक छुपी हुई सच्चाई से मैं आगाह करना चाहता हूँ और वह सच्चाई यह है कि सऊदी अरब में ” इमामत” का मनसब सिर्फ उन्ही लोगों को सौंपा जाता है , जो सऊदी-सरकार द्वारा तैयार किये गए एक ” हलफनामे ” पर दस्तखत करते हैं. इस हलफनामे में 4 बातों की तस्दीक करनी लाजिमी होती है ,
पहली– हयातुन्नबी का इनकार,–याने यह की रसूलल्लाह( सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) मर कर मिटटी में मिल गए . ( मआज़ अल्लाह ).
दूसरी– रसूल ( सल्लल्लाहोअलैहे वसल्लम ) को इल्मे-गैब नहीं है .
तीसरी– रसूलल्लाह( सल्लल्लाहो अलैहे व वसल्लम हांज़िर-नाज़िर नहीं हैं .
चौथी— रसूल ( सल्लल्लाहोअलैहे वसल्लम) अपनी तरफ से किसी को नफा नहीं पहुंचा सकते ///
सऊदी अरब के ” नज़दी दारुल उलूम ” ( जो रियाद याने नज़द के पास” कसिम” नमक जगह पर स्थित है) से फरागत हासिल करने वाले हर मोलवी को इमाम की नौकरी करने के लिए इन चरों बद अकीदगियों की हलफिया तस्दीक करनी पड़ती है .
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इससे आप यह बात आसानी से समझ सकते हैं कि इमामे-काबा का अकीदा वही है , जो देवबंदियों का है .यह बात उन लोगों के लिए गौर करने की है जो हिजाज़े-मुक़द्दस जा कर बेझिझक इमामे-काबा के पीछे नमाज़ पढ़ लेते हैं .जब कोई अहले-सुन्नत उन्हें इस काम से मना करता है तो वे नज्दियों का सिखाया हुआ जवाब दोहरा देते हैं कि अगर इमामे-काबा का अकीदा गलत होता हो अल्लाह उनसे यहाँ इमामत क्यों करवाता और मक्का शरीफ या मस्जिदे-नबवी में बा जमात नमाज़ अदा करने से ज्यादा सवाब और कहाँ मिलेगा ///
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इन्ही इमामे-काबा ने जिन ओलेमा-ए- देवबंद के लिए कहा है कि अल्लाह ने इनको ख़ास मकाम अता किया है , आइये उन्ही उसी देवबंद के कुछ ओलेमा के चंद अकीदों की पड़ताल करें .
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(1) ओलमा नम्बर 1-मोलवी इस्माइल देहलवी—इनका कहना है कि रसूल मर कर मिटटी में मिल गए . (तकवियतुल ईमान )
(2 ) ओलमा नम्बर 2– रशीद अहमद गंगोही –इनका कहना है कि अल्लाह तआला झूठ बोल सकता है .( फतवा ए रशीदिया )
(3) ओलमा नम्बर 3 -अशरफ अली थानवी–इनका कहना है कि नबी करीम ( सल्लल्लाहो अलैहे व सल्लम ) का इल्म ऐसा है जैसे बच्चों , पागलों और जानवरों को होता है .( किताब -हिफजुल ईमान )
(4) ओलमा नम्बर 4 –कासिम नानोत्वी –इनका कहना है कि अगर नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहे व सल्लम के बाद भी कोई नया नबी आ जाये तो भी उनकी खात्मे-नबुव्वत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा –याने आप सल्लल्लाहो अलैहे व सल्लम ) के बाद भी कोई नबी आ सकता है .( किताब -तहज़िरुन्नास )
(5) ओलमा नम्बर 5 -खलील अहमद अम्बेठवी –इनका कहना है कि शैतान का इल्म नबी के इल्म से ज्यादा है .( किताब का नाम –बराहिने-कातियाह )
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कुफ्र और बेदीनी के लिए ज़रूरी नहीं कि कुरान की हर=हर आयत का इनकार किया जाये , या तमाम अहादीस का इंकार किया जाये . बल्कि किसी एक भी आयत का खिलाफ भी कुफ्र के लिए काफी है , रसूल सल्लल्लाहो अलैहे व सल्लम की शाने-पाक में अदना सी गुस्ताखी भी कुफ्र तक पहुंचा देती है ..लिहाज़ा ये ओलेमा–ए–देवबंद और उनकी तबलीगी जमात चाहे दूर-दूर जा कर नमाज़ पढ़ती हो , अल्लाह और रसूल ( सल्लल्लाहो अलैहे व सल्लम ) का नाम लेती हो , सुन्नत की बातें करती हो ,मगर उनके बअज़ गंदे अक़वाल और अक़ाइद कुरान की आयत और अहादीस के खिलाफ हैं , सलफे सालिहीन के अकीदों के खिलाफ हैं , इसलिए वो बद दीन और गुमराह हो चुके हैं और कुफ्र की दहलीज़ तक पहुच चुके हैं .
. उपरोक्त बयानात से स्पष्ट है कि इमामे-काबा जिन ओलेमा-ए- देवबंद की तारीफ़ के कसीदे पढ़ रहे हैं , उन्होंने अपनी किताबों में ऐसी ऐसी गुस्ताखियाँ कर डाली हैं कि जिनके सबब ये ओलेमा-ए- देवबंद कुफ्र तक पहुँच चुके हैं . और जो शख्स इनके कुफ्र पर शक करे वह भी काफिर है . साथ ही ऊपर दिए गए हलफिया बयान के मसौदे से भी यह स्पष्ट हो जाता है कि इमामे-काबा का भी वही अकीदा है जो इन ओलमा-ए- देवबंद का है और ऐसा अकीदा रखने वाले इमामे-काबा के पीछे आपकी नमाज़ होगी या नहीं होगी , यह बात हर सच्चे मुसलमान कोई खुद ही समझ लेनी चाहिए ///
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मस्लकी पोस्ट लिखने की ज़रूरत इसलिए आ रही है कि आज मुस्लिम नौजवानों का बहुत बड़ा शिक्षित तबका बदअकीदगी के मकडजाल में फंस चुका है . कोई इस्लाम की आधुनिक व्याख्या के नाम पर जाकिर नायक के जाल में फंसा है तो कोई ” शिरको-बिदत ” से बचने के नाम पर तबलीगी जमात का शिकार बन रहा है . कोई गैर-मुकल्लिद बनने और सिर्फ कुरान और हदीस का पालन करने के नाम पर ” अहले हदीस ” बनने चला है तो कोई AMU की आधुनिक शिक्षा और सर सय्यद के आकर्षण में नेचरी बन चूका है . ये सभी फिरका ए बातिला हैं जो मुस्लिम नवजवानों के दिल से ईमान निकाल कर उन्हें कुफ्र के अंधेरों में धकेल रहे हैं . जिस तरह हम दर्ज़नों राजनैतिक दलों के गुण-दोषों की विवेचना कर के सही दल को अपना वोट देते हैं , उसी तरह हमें चाहिए कि सभी 73 फिरकों की विवेचना कर के देखें कि कौन सा फिरका है जो सच्चे इस्लाम का प्रतिनिधित्व करता है और जिसकी पैरवी करने से हमें आखिरत में जन्नत हासिल होगी . बिला शुबहा वह एक ही फिरका है और उसका नाम है —अहले सुन्नत वल जमात ,क्योकि इसी पर तमाम सहाबा , ताबयीन , तबे-ताबयींन , आइम्मा ए दीन , ओलमा ए मुज्तहिदीन , औलिया ए कामिलिन , सलफे सलिहीन सभी कायम रहे और इनके अकीदों में किसी भी दौर के किसी भी गुमराह फिरके की ताईद हरगिज़ नहीं मिल सकती ///
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मोहम्मद आरिफ दगिया

नोट – ये लेखक के निजी विचार है, कोहराम न्यूज़ कॉलम ‘ओपिनियन’ में प्रकाशित लेखों की किसी तरह की ज़िम्मेदारी नही लेता है, आप भी अपना लेख इस कॉलम में प्रकाशित करवा सकते है , मेल भेज दीजिये [email protected] पर


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