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कैराना से कुल 1254 परिवार बीस साल मे पलायन कर गए जिनमे से सांसद हुकम सिंह के अनुसार 341 हिन्दू परिवार है इसीलिए 913 परिवार मुसलमान है । इनमे सबसे बड़ा नाम सुप्रीम कोर्ट के मशहूर अधिवक्ता सय्यद नादिर अली खान का है जिनकी कैराना मे करोड़ो की संपत्ति आज भी आदमी के लिए तरस रही है । नादिर अली खान तरक़्क़ी पसंद रहे दिल्ली को दिल दे दिया मगर उनके बच्चे जिनमे सबसे बड़े बेटे सय्यद रज़ा अली खान हर साल मुहर्रम मे तज़ियत के लिए आते है ।

कैराना के पत्रकार रियासत अली ताबिश मेहरबान आलम और मेहराब चौधरी आपको ऐसे सेकड़ो दरवाज़े दिखा देंगे जहां से मुस्लिम परिवार पलायन कर गए । दरअसल छोटे कस्बे की यही कहानी है वहां से अच्छी जिंदगी की तलाश मे अक्सर लोग विकल्प तलाश लेते है । नए आंकड़ो के मुताबिक़ मुसलमानो की आबादी कस्बो मे रहना पसंद करती है । मुज़फ्फरनगर के 14 मे से 12 कस्बो मे शामली के सभी कस्बो मे सहारनपुर के 12 मे से 10 कस्बो मे मेरठ के 8 कस्बो मे और बिजनोर के सभी कस्बो मे मुसलमानो की आबादी सबसे ज्यादा है । बिजनोर मे तो 18 मे से 17 नगर पंचायत अध्यक्ष मुसलमान है ।

इसके उलट सभी शहरों मे मुसलमानो की आबादी हिन्दुओ से कम है और एक भी महापौर मुसलमान नही है । शहरों मे गरीब तबके का मुसलमान है जो रोजगार की तलाश मे शहरी हो गया । गांव से भी मुसलमानो ने बड़ी संख्या मे पलायन किया । जमीन इनके पास थी नही । शहर मे जाने की हिम्मत नही थी ।कस्बे को चुन लिया गया । सांसद हुकुम सिंह ज़रा एक आंकड़ा ऐसा भी दे कि कितने बाहर गांव के लोग कैराना आकर बस गए है ।यक़ीनन यह संख्या उनकी 341 से ज्यादा होगी । एक यह तथ्य भी रोचक होगा की यह हिन्दू भाई लोग जो कैराना से चले ये किस जाति के है या फिर इनमे से कितने गुर्जर है अगर यह संख्या कम है तो इसका यह मतलब हुआ की सांसद हुकम सिंह ने सिर्फ अपनी ही बिरादरी के लोगो को संरक्षण दिया । अगर यह संख्या अनुपातिक रूप से ज्यादा है तो सांसद हुकुम सिंह बताये कि इतने बड़े नेता होने के बावजूद वो अपनी बिरादरी की भी रक्षा क्यों नही कर सके ! तो यह समझा जाये कि सांसद साहब नाकामयाब नेता है जो जनता की उम्मीदों पर खरे नही उतरे ।

इस दौरान वो कई बार विधयक रहे । कैबिनेट मंत्री रहे । उपमुख्यमंत्री रहे ।सरकार के शिरमोर रहे । उन्होंने लाल काला हरा और नीले पैन का चलन चलाया ।सिर्फ अफसर जानते थे की किस नोटिंग पर काम करना है ।वो न्यायिक सेवा के लिए चुन लिए गए थे मगर चीन से युद्ध होने के लड़ने चले गए । इलाहाबाद से पढ़े । क़ाबिल और संस्कारित हुकुम सिंह के मन मष्तिस्क पर भी जब वायरस असर करता है तो दंगा निकलता है । मुज़फ्फरनगर दंगे मे वो आरोपी थे । बुच्चखेडी से लेकर कलंदरशाह तक उन्होंने बहुत मेहनत की । इधर उधर की बात की । सरेआम डंडे से पिटे । पुलिस ने उन्हें बैठने के लिये कुर्सी नही दी ।

75 साल के अकेले बुजुर्ग जो खुद कैराना से पलायन कर आये ने क्या क्या नही झेला । मगर केंद्र मे मंत्री बन गए नए नेवेले संजीव बालियान । टीस दिल मे लगी अब सीएम बनने की ख्वाहिश है भले ही यह जीत खूनी क्यों ना हो ..योजना तो पहले भी गुर्जर बनाम मुस्लिम की ही थी वरना धर्मसंसद देवबंद मे क्यों आयोजित की जाती मगर जाट बनाम मुस्लिम हो गया तो अपनी ही शादी मे अब्दुल्ला बेगाना हो गया । वैसे हुकुम सिंह ऐसे भाजपा नेता है जिन्हें कम से कम 5000 मुसलमान जरूर वोट करते है उनकी वफादारी की शर्म भी उन्ही नही आई ।बाबूजी कुछ तो लिहाज़ करो ।

Aasmohammad Kaif


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