पूर्व बादशाह औरंगज़ेब ,

मैं यह ख़त मान कर लिख रहा हूँ कि दोज़ख़ में भी ख़तों के पहुँचने की व्यवस्था होगी । तुम्हारे गुनाहों का हिसाब वहाँ तो हो ही रहा है, यहाँ भी हो रहा है । हम चाहते हैं कि वहाँ से पहले यहाँ हिसाब हो जाए । इसलिए हमने कुछ लोगों को इस काम पर लगाया है । मुल्क में खाने पीने के तमाम मसले हैं औरंगज़ेबू, लेकिन तुम जानते ही हो आदमी पेट के लिए नहीं नाम के लिए जीता है । नाम कमाया भी जाता है और मिटाया भी जाता है । कुछ नामों को भुलाया भी जाता है । प्यारे औरंगज़ेबू ( मैं तुम्हें प्यार से ऐसे ही बुलाऊँगा ) एक तरीका और है । दूसरों का नाम मिटा वहाँ अपना लिखकर भी नाम बनाया जाता है ।

तुम चालू थे । दिल्ली में बाप दादाओं के बनाए क़िले में रह कर चले गए वर्ना आज उसे तोड़ने के नाम पर कुछ लोगों को काम भी मिल जाता । तुम अगर ताजमहल बनाते तो आज उसका नाम आवाम महल होता । ख़ैर । जो सच्चे दिल से काम ढूँढते हैं उन्हें काम मिल जाता है । दिल्ली में एक सड़क मिली है तुम्हारे नाम की । हाईवे या टोल फ्री एक्सप्रेस नहीं है । बमुश्किल एक किलोमीटर लंबी सड़क होगी । इतने बड़े मुल्क के बादशाह रह कर गए और तुम्हारे नाम पर क़तरा भर सड़क । लाहौलबिलावलकूवत !

औरंगज़ेब रोड में घुसे नहीं कि ख़त्म हो गया । सामने कोई और रोड आ गया । इसलिए लोगों ने सोचा कि तुम्हारा नाम मिटा दिया जाए । कुछ लोगों ने तुम्हारे गुनाहों को इतना रट लिया है कि उनके ज़हन से न तो तुम्हारा नाम जाता है न ही तुम्हारे नाम पर बनी ये सड़क ख़त्म होती है । औरंगज़ेब रोड उनकी सोच की भी सड़क है । उन लोगों ने खुद को उस सड़क से आज़ाद कर लिया है । सड़क का नाम बदल दिया है । आशा करता हूँ औरंगज़ेबू कि तुम उनकी इस खुशी में शरीक होगे ।

अब तुम्हारे नाम की जगह उस शख़्स का नाम लिखा गया है जो हिन्दुस्तान के आख़िरी छोर के करीब से चल कर दिल्ली तक आया था । हज़ारों किमी की दूरी तय कर मुसलमानों में से वो एक अच्छा मुसलमान कहलाया है । हिन्दुस्तान ने भी दरियादिली दिखाई और तुम्हारा नाम मिटा कर उसका नाम रख दिया है। ताकि पीढ़ियाँ याद कर सकें कि इस सड़क का नाम कलाम रोड से पहले औरंगज़ेब रोड था । कलाम साहब अब तुम्हारे बग़ैर याद नहीं किये जा सकेंगे और तुम उनके बिना ।

कुछ लोग ख़ुश हैं । कुछ लोग परेशान हैं । कुछ के पास तुम्हारे सितम की फ़ेहरिस्त है । कुछ के पास तुम्हारी ख़ूबियों का हिसाब । एक सूची में तुमने मंदिर तोड़े हैं तो दूसरी सूची में मंदिरों को दान किया है । एक सूची में तुम हत्यारे हो, एक सूची में तुम दयालु हो। यार ज़रूर कोई ज़बरदस्त पी आर एजेंसी होगी तुम्हारे पास जिसके दम पर तुमने हुकूमत की होगी । तुमने भाइयों को मारा, तुमने कुछ भाइयों को छोड़ दिया । ऐसा कंफ्यूज़ मैंने नहीं देखा । बहरहाल एक जंग सी छिड़ी है । तुम औरंगज़ेब हो तो इसका मतलब यह नहीं कि दूसरे औरंगज़ेब नहीं हो सकते । अगर तुमने मिटाने की पोलटिक्स की है तो बाकी भी मिटाने की पोलिटिक्स कर सकते हैं ।

एक किमी की सड़क अपने नाम रख कर क्या करते । तुम्हारा नाम इतिहास से मिटाया जाएगा । यह दुनिया में इतिहास से नाम मिटाने का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट होगा । इस मुल्क में जितने भी काग़ज़ के टुकड़े बचे हैं और उन पर तुम्हारा नाम लिखा है, सब मिटा दिया जाएगा । तुम गुजरात के जिस दाहोद में पैदा हुए उसका नाम भी मिटाया जाएगा ताकि आने वाली पीढ़ी को पता भी न चले कि तुम कहीं पैदा भी हुए थे ।  एक औरंगज़ेब एक्ट बनेगा जिसके तहत तुम्हारा नाम लेना, चर्चा करना मना होगा । जहाँ जहाँ औरंगज़ेब लिखा होगा वहाँ वहाँ रंगरेज़ या पाज़ेब लिख दिया जाएगा । बहुत नफरत करते थे न तुम संगीत और रंगों से । लो भुगतो ।

यही नहीं इसकी भी जाँच होने वाली है कि तुम मुग़ल हिन्दुस्तान को लूट कर हीरा पन्ना कहाँ ले गए । कहीं तो जमा किया ही होगा । उन सब ख़ज़ानों को लाकर आवाम में बाँटा जाएगा । हर आदमी को लाखों दिलवाये जायेंगे । एक बार यह हासिल हो जाए तो इस प्रोजेक्ट की समीक्षा होगी । फिर मुग़ल से लेकर गोरों तक के बनाए महलों दीवारों को ढहा दिया जाएगा । देशभक्त भारतीय ठेकेदारों को काम मिलेगा । कौन था ये लटियनवा रे । पूरी दिल्ली तोड़ कर फिर से बसायेंगे । जिस जिस ने सताया है उसका नाम मिटायेंगे ।

इतिहास का बोझ हल्का हो जाएगा । प्राचीन भारत के बाद आठ नौ सौ साल के इतिहास के पन्ने जला दिये जाएँगे । किताबें हल्की हो जाएँगी । प्राचीन भारत के बाद अगला चैप्टर 2015 का भारत आ जाएगा । ये बहुत बड़ा काम हो रहा है रे औरंगज़ेबू । तू नहीं समझेगा । इतिहास बदला ही नहीं जाएगा । हल्का भी किया जाएगा । पास करना आसान हो जाएगा । हमारे भी राजा महाराजा हुए हैं । उन्होंने भी लूटा है, लोगों को मारा है । तरह तरह के ज़ुल्मों सितम से ख़ज़ाने भर महल बनाए हैं । मगर वो हमारे हैं । उन्होंने कहीं बाहर जाकर मार काट नहीं किया । हमारे राजा तो जब आपस में युद्ध करते थे तब सेना लेकर नहीं जाते थे । अकेले जाते थे । दोनों सेनाओं के सैनिक तो भारतीय ही हुआ करते थे । हमारे राजाओं ने कभी ज़ुल्म ही नहीं किया । कभी किसी ने अपने भाई को नहीं मारा । बाप को नहीं मारा ।

जाओ औरंगज़ेबू तुम्हारी सज़ा पूरी होती है । अब कोई  पता पूछते हुए औरंगज़ेब रोड पर नहीं भटकेगा । तुम्हारी बुराई तुम्हारी अच्छाई से कम नहीं हो सकती । तुम्हारे टाइम में लोकतंत्र होता तो जनादेश ले आते । कुछ विकास कर लेते । हमारे लोकतंत्र में जिन पर औरंगज़ेब होने का इल्ज़ाम लगता है वो भी चुनकर आ जाते हैं । हत्या, बलात्कार, घोटाला ये सब औरंगज़ेब होना नहीं है अगर कोई सड़क बनवा दे, फैक्ट्री लगवा दे । राजा जैसा होता है वैसा रह जाता है ।

जो इसका इंसाफ़ करने बैठे हैं कि औरंगज़ेब की दूसरी हकीकत भी है उनसे तुम्हारी तरफ से गुज़ारिश करता हूँ कि लोगों की निगाह में जैसा राजा होता है वैसा ही वो अंत तक रह जाता है । कोई इन लेखों को पढ़ औरंगज़ेब रोड पर फ़ातिहा नहीं पढ़ेगा । किसी ने तुम्हारे नाम की कोई सड़क बना दी है । पहले से बनी थी बस बोर्ड लगाया है। इसे लतीफ़ा समझ कर हँसना । उस नादान को माफ करते हुए कहना कि हो सके तो औरंगज़ेब की अच्छाई और बुराई को जानो । हो सके तो किसी औरंगज़ेब को मत चुनो । किसी को औरंगज़ेब मत बनने दो । हो सके तो औरंगज़ेब को मरा रहने दो । ज़िंदा मत करो । हो सके तो नाम मिटाने के बहाने नाम मत लो ।

औरंगज़ेबू, तुम मिट चुके हो । दुनिया से औरंगज़ेब का अत्याचार मिट गया है । आकर देख लो कहीं कोई ख़ून ख़राबा नहीं है । कोई किसी को मार नहीं रहा है । दंगों में औरंगज़ेब नहीं मारे जाते । कोई औरंगज़ेब मारने नहीं आता। दंगों में गेंदे के फूल चलते हैं । नज़ाकत नज़ाकत को मारती है । बस एक ही हिंसा बची है और वो है तुम्हारा नाम जिसे मिटा दिया गया है ।

बादशाहों की नाइंसाफियों का हिसाब नगरपालिकायें कर लेती हैं । नगरपालिकाओं के कारनामों का हिसाब कोई नहीं कर पाता । तुम बहुत बेहिसाब थे तुम्हारा हिसाब हो चुका है औरंगज़ेबू ।

बाय बाय औरंगज़ेबू । हैव फन । दिल्ली में एक क़िला तो बनवा नहीं सके और चले हैं एक किमी लंबी सड़क को अपना नाम देने । तू बादशाह था कि पार्षद रे !

तुम्हारा घोर विरोधी एंटी औरंगज़ेब प्रो कलाम

  • रवीश कुमार

नोट- दोज़ख़ से टेलिग्राम आया है कि मेरा ख़त पढ़ते ही औरंगज़ेब बेहोश हो गया । दाँत चियार दिया । मतलब मुँह बा दिया है ।

ये लेख रविश कुमार के ऑफिसियल ब्लॉग naisadak.org से लिया गया है 


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