पंचायत चुनाव में भी ध्रुवीकरण की राजनती का सहारा लिया जा रहा है तो समझ लीजिये अच्छे दिन कभी नहीं आयेंगे। गाजियाबाद के तलहटा गांव में जिस महिला का शव कब्र से बाहर निकाल कर फेंका गया है वह बहुत कुछ सोचने पर मजबूर करता है। सीओ मोदी नगर राजेश सिंह लाश के साथ बलात्कार किये जाने को नकारते हुए कहते हैं कि यह माहौल खराब करने की शरारती तत्वों की साजिश है। दरअस्ल इस क्षेत्र में 29 अक्टूबर को जिला पंचायत और ब्लाक प्रमुख का चुनाव होना है।

कुछ सप्ताह पहले इसी क्षेत्र में एक कुत्ते को जलाकर अफवाह उड़ाई गई थी कि गो वंश को जलाया गया है। जिससे क्षेत्र में तनाव हो गया था। उससे पहले ‘खरखौदा का लव जिहाद प्रकरण वाला गांव सरावा भी तलहटा भी इस गांव से कुछ किलो मीटर की दूरी पर है। इस क्षेत्र को सुलगाने की कोशिशें कई बार की जा चुकी हैं। अबकि बार पंचायत चुनाव में अपना ध्रुवीकरण कराने के लिये पहले कुत्ते को जलाकर गोवंश बताया गया और अब महिला की लाश कब्र से बाहर निकालकर फेंक दी गई। यकीनन यह सांप्रदायिक गटर में डूबी सियासत की साजिश है।

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सवाल यह नहीं है कि लाश के साथ बलात्कार हुआ या नहीं सवाल यह है कि जो नेता अपना हित साधने के लिये लाशों से को कब्र से निकालकर उसे बे गौरो कफन फेंक सकता है वे अगर अपना लक्ष्य हासिल भी कर लें पर क्या वे देश के देश की अवाम के यहां तक कि खुद के भी शुभचिंतक हो सकते हैं ? वे लोग कितने जाहिल और निचले दर्जे के होंगे जो एसे लोगों में अपना ‘नेता’ जनप्रतिनिधी तलाश करेंगे ? क्या अब भी यह जरूरी नहीं हो गया है कि इस दमघोटू माहौल में सांप्रदायिकता की सियासत करने वालों को सबक सिखाया जाये ? कितना गुस्सा और कितना स्वार्थ भरा होगा उन लोगों के अंदर जिन्होंने एक महिला की लाश को कब्र से निकाला और फिर क्षेत्र में आग लगाने के लिये लाश को नग्न अवस्था में छोड़ गये ? क्या एसे लोग किसी के सगे हो सकते हैं ?

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आपके आस पास अगर कोई भी इस प्रवृती का शख्स है उसे तुरंत पहचानिये। ये जानवरों से भी बदतर हैं हां बस मुंह पर इंसानों जैसा मास्क लगा हुआ है। कुछ लोग जिंदा लोगों को मारकर भी नेता बन जाते हैं। मगर ये तो उनसे भी गिरे हुए हैं जो कब्र से महिला की लाश को निकालकर नेता बनना चाहते हैं। सबक जरूर सिखाईयेगा इनको।

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Wasim Akram Tyagi


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