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आदरणीय ठाकुर राजनाथ सिंह
गृह मंत्री, भारत सरकार

कल टेलीविजन पर आपको बोलते हुऐ देखा तो मुझे यकीन हुआ कि आप बोलते भी हैं, यह यकीन शब्द इसलिये प्रयोग कर रहा हूं क्योंकि बीते ढ़ाई साल में आप बमुश्किल ढ़ाई दर्जन बार ही बोल पाये होंगे। खैर आप को टीवी के माध्यम से एक ‘क्षत्रिय’ की तरह कैराना में बोलते हुऐ सुना तो रहा नहीं गया सोचा आपको चिट्ठी लिखूं, मालूम नहीं यह चिट्ठी आप तक पहुंचेगी भी या नहीं, फिर भी इससे बेपरवाह मैं यह चिट्ठी लिख रहा हूं। आप कैराना में कह रहे थे कि “यूपी में चुनाव जीतने दो, फिर हम देखेंगे कि गुंडागर्दी करने वालो ने कितना मां का दूध पिया है” आपके तेवर देखे तो लगा कि आप सचमुच गुंडागर्दी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रावाई करना चाहते हैं, मगर जब बीते ढ़ाई साल का आपका सफर नामा देखा तो अंदाजा हो गया कि मां का दूध भी महज एक ‘जुमला’ है। गुंडागर्दी का यह खेल तो आपके गृहमंत्री पद की शपथ लेते ही पुणे से शुरु हो गया था जब ‘हिन्दू सेना’ के गुंडों ने मोहसिन शेख को पीट पीट कर मारा डाला था, तबसे शुरु हुआ यह सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। गाय के नाम पर जैसा आतंक फैलाया गया है आप उससे भी वाकिफ होंगे, झारखंड में जब से आपकी पार्टी की सरकार आई है तब से तीन हत्याऐं सिर्फ गाय के नाम पर हो चुकी हैं। हद तो तब हो गई जब इन गोआतंकियों के साथ पुलिस भी मिल गई और पुलिस के ही जेरेहिरासत मिनहाज अंसारी का कत्ल कर दिया गया। ऐसा नहीं है कि आप इससे परिचित नहीं होगें, यकीनन आपकी जानकारी में यह सब घटनाऐं होंगीं। गाय के नाम पर आतंक फैलाने वाले गोआंतकी आपकी पार्टी के न सिर्फ वोटर हैं बल्कि हर तरह से आपको समर्थन करते हैं, हिन्दू राष्ट्र के जुमलों से लेकर देशद्रोही के सर्टिफिकेट बांटने तक में आपकी पार्टी का सहयोग करते हैं, इतना ही नहीं अगर कहीं दंगा करके सौ पचास मकानों को भी आग लगानी या पड़े या हत्या, बलात्कार करना पड़ जाये तो वे इससे भी पीछे नहीं हटते। मैं नहीं कहना चाहता कि आपके राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पर IPC की धारा के तहत 201, 302, 120B, 364, 365, 366, 384 कुल इतने मामले दर्ज हैं। क्योंकि हो सकता है गुंडागर्दी की परिभाषा आपके यहां कुछ ओर होगी।

बहरहाल मैं फिर से कैराना की तरफ आता हूं जहां आपने नारा दिया कि ‘मां बहनों की शान में, बीजेपी मैदान में’ मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि आप किन मां बहनों की बात कर रहे हैं ? जिस दिल्ली में आपका गृह मंत्रालय है, आपका कार्यालय है, आपका आवास भी है उसी दिल्ली में एक मां अपने बेटे के लिये बीते 25 दिन से दर दर भटक रही है, मगर आपके अंतर्गत आने वाली दिल्ली पुलिस ने उसका बेटा तो तलाश नहीं किया हां उस बूढ़ी मां को सड़क पर जरूर घसीटा। क्या नजीब की मां आपकी पार्टी के दिये नारे के सांचे में नहीं आतीं ? हो सकता न भी आती हैं क्योंकि वह ‘नजीब’ की मां है रमेश की होती तो शायद आपकी पार्टी कुछ हकत में आती। मगर आप तो पूरे देश के गृहमंत्री हैं क्या आपको भी वह मां नजर नहीं आई ? आप यूपी में गुंडों की मां का दूध पीने तक की चेतावनी दे आये मगर क्या अपनी पार्टी के संगठन ABVP पर नजर नहीं डाली कि सरकार के संरक्षण में गुंडे पाले जा रहे हैं जिन्हें ‘राषट्रवादी गुंडा’ कह दिया जाये तो कोई अतिश्योक्ती नहीं होनी चाहिये। क्योंकि हैदराबाद की सेंट्रल विवी से लेकर दिल्ली स्थित जेएनयू में इनकी गुंडागर्दी आपके ही कार्यकाल में देखी गई है। हैदराबाद में इन्होंने रोहित वेमुला की अप्रत्यक्ष हत्या की तो जेएनयू में नजीब अहमद की बेरहमी से पिटाई की, उसी दिन से नजीब गायब है। विडंबना तो देखिये साहेब नजीब पर हमला करने वाले एक भी आरोपी के खिलाफ कोई कार्रावाई नहीं हो पाई। नजीब उसी समुदाय से आता है जिसके बारे में कहा था कि “वह समुदाय देशभक्त है”। मैंने सोचा था कि हरियाणा के मेवात के गांव डिंगरहेड़ी के सामूहिक बलात्कार व दोहरे हत्याकांड पर आपको पत्र लिखूं मगर उन दिनों आप बोल ही नहीं पा रहे थे, बोलना तो आपने ‘कैराना’ से शुरु किया है। गुंडो को चेतावनी दी है कि भाजपा आने दो तब देखेंगे कितना दूध पिया है ? मगर क्या वजह है साहेब जहां भाजपा है वहां गुंडागर्दी का सेंसेक्स नीचे आने का नाम ही नहीं लेता ? ठाकुर साब दिल्ली पुलिस से लेकर आईबी तक सब आपके पास है इन्हें सख्त हिदायत दीजिये कि वह उस होनहार छात्र को ढ़ूंढ निकाले जिसकी मां दिल्ली की सड़कों पर भटक रही है। क्या आप ऐसा कर पायेंगे ? क्या नजीब को सही सलामत उसके परिवार को लौटा पायेंगे ? क्या एक बूढ़ी मां की बैसाखी उसे दे पायेंगे ?

वसीम अकरम त्यागी- लेखक मुस्लिम टुडे में सह संपादक है
वसीम अकरम त्यागी- लेखक मुस्लिम टुडे में सह संपादक है

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