टीपू सुलतान की तलवार की जगह मीर जाफर की तलवार अब महत्वपूर्ण हो गयी है

रणधीर सिंह सुमन

रूस में प्रधानमंत्री मोदी ने गार्ड ऑफ़ ऑनर से पहले राष्ट्रगान के समय चल कर अपने उतावलेपन का परिचय दिया। रूसी अधिकारियों ने आगे बढ़कर उनको रोका और राष्ट्रगान के समय खड़ा रहने के लिए प्रेरित किया। हमारे प्रधानमंत्री दो दिन की रूस यात्रा के बाद अफगानिस्तान की यात्रा पर फिर तुरंत पाकिस्तान की यात्रा पर हैं। रूस में उन्हें तोहफे के तौर पर महात्मा गाँधी की डायरी का पृष्ठ दिया और तलवार भी भेंट की। तलवार के बारे में यह कहा जाता है कि यह तलवार मीर जाफर के वंशजों की है। यह कौन सा सन्देश मोदी साहब को देने का प्रयास किया गया है। क्या नागपुर मुख्यालय की अंग्रेज भक्ति के ऊपर कटाक्ष तो नहीं किया गया है। टीपू सुलतान की तलवार की जगह मीर जाफर की तलवार अब महत्वपूर्ण हो गयी है। कलकत्ता से प्रकाशित अंग्रेजी दैनिक ‘द टेलीग्राफ‘ लिखता है- Putin’s gift last night was an 18th- century sword from Bengal’s Najafi dynasty of nawabs, started by Mir Jafar who was placed on the throne by the British after the Battle of Plassey in 1757.

कलकत्ता के राजनेता व साहित्यकार अरुण महेश्वरी लिखते हैं –

रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बंगाल के मीर जाफ़र के नज़ाफी नवाब वंश की तलवार भेंट की है। यह भेंट बहुत सांकेतिक प्रतीत होती है। भारत के इतिहास में जयचंदों और मीरजाफरों की एक समानांतर परंपरा रही है। मोहम्मद गोरी की सेना के हाथों पृथ्वीराज चौहान को हराने में कन्नौज के राजा जयचंद और 1757 की प्लासी की लड़ाई में क्लाइव के हाथों सिराज-उद-दौल्ला को पराजित करने में मीर जाफ़र की भूमिका की परंपरा। इसे आधुनिक काल में अंग्रेज़-भक्तों की परंपरा भी कहते हैं। पुतिन ने मोदी जी को मीर जाफ़र के वंशधरों की तलवार से नवाज़ कर क्या कोई ख़ास संदेश दिया है।

बाक़र गंज के सैयद में असग़र वजाहत ने लिखा है –

मीर मुहम्मद जाफ़र ख़ाँ थे जो बाद में शुजाउल मुल्क, हाशिमुद्दौला नवाब जाफर अली ख़ाँ बहादुर, महाबत जंग नवाब नाजि़म बंगाल, बिहार और उड़ीसा हुए। इन्हें उर्फे आम में मीर जाफर भी कहा जाता है। वही मीर जाफर हैं जिन्होंने प्लासी की लड़ाई में नवाब सिराजुद्दौला को धोखा दिया था। वही मीर जाफर जिन्होंने लॉर्ड क्लाइव, सेठ अमीचंद और जगतसेठ के साथ मिल कर सिराजुद्दौला का तख्ता पलट दिया था। वही मीर जाफ़र जिनके लड़के मीरन ने सिराजुद्दौला की हत्या करायी थी। वही मीर जाफ़र जिनका नाम इतिहास में जयचंद के साथ लिया जाता है। वही मीर जाफ़र जो विश्वासघात का प्रतीक बन चुके हैं, जिनकी हवेली को आज भी नमक हराम की डियोढ़ी कहा जाता है, जिन्हें लोगों ने ग़द्दार-ए-अबरार यानी भले आदमी से विश्वासघात करने वाले की उपाधि दी थी।

क्या इन दोनों बातों से देश का सम्मान बढ़ता है ? रोज-रोज मल्टी नेशनल कंपनियों सीइओ को लेकर उनके व्यापार बढ़ाने के लिए जब प्रधानमंत्री स्तर पर इस तरह प्रयास किये जायेंगे तो निश्चित रूप से यह सब तो होगा ही। पहले जब कोई प्रधानमंत्री किसी देश की यात्रा पर जाता था तो सालों उसकी तैयारियां होती थीं, लेकिन हमारे मोदी साहब बगैर तैयारियों के हर देश में जनसभा करने पहुँच रहे हैं। वहीँ, एक आश्चर्यजनक घटनाक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दोपहर बाद काबुल से दिल्ली लौटने के क्रम में लाहौर पहुंच गए और अपने पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ से मुलाकात की। मोदी की यह पहली पाकिस्तान यात्रा है। इसके बारे में मोदी ने खुद ट्वीट करके जानकारी दी।

साभार – हस्तक्षेप डॉट कॉम 


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