राजीव रंजन तिवारी

Rajiw

भारतीय राजनीति खासकर भाजपा और हिन्दुवादी संगठनों की राजनीतिक मृत संजीविनीमाने जाने वाले अयोध्या विवाद को एकबार फिर से गर्माने की तैयारी चल रही है। अयोध्या में राम मंदिर बनाने का दावा करने वाले लोग कह रहे हैं कि केन्द्र में नरेन्द्र मोदी की सरकार बन गई है, इसलिए अब वहां मंदिर बनकर रहेगा। इसी क्रम में अयोध्या में पहुंचे दो ट्रक पत्थर ने कौमी सियासत को हिलाकर रख दिया है। हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदायक के कट्टरपंथियों के कान खड़े हो गए हैं। यूं कहें कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की तैयारी नहीं बल्कि देश के सामाजिक व साम्प्रादायिक सौहार्द के विध्वंस की तैयारी चल रही है। मुझे तो लगता है कि इस सौहार्द को बिगाड़ने की कोशिश में लगे लोगों को केन्द्र सरकार का शह प्राप्त है। वरना रामजन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास अयोध्या में राम मंदिर को लेकर बड़ा एलान नहीं करते। उन्होंने कहा है कि राम मंदिर निर्माण के लिए तराशे गए पत्थरों का शिला पूजन हो चुका है। शिला पूजन के बाद इन पत्थरों को एक नए स्थान रामसेवकपुरम में रखा जा रहा है और यंही से इन्हें निर्माण स्थल पर भेजा जाएगा। तराशे गए पत्थरों का पूजन इसलिए अहम है क्योंकि प्रस्तावित भव्य राम मंदिर को पत्थरों से ही बनाया जाना है। नृत्य गोपाल दास ने तो यहां तक कहा है कि भगवान की कृपा से केन्द्र में नरेन्द्र मोदी की सरकार बन गई है और अब बहुत जल्दी मंदिर निर्माण का काम शुरू होगा। मंदिर आंदोलन के अगुवा रहे विश्व हिन्दू परिषद (वीएचपी) के नेता अशोक सिंघल ने अपने निधन से कहा था कि करीब दो लाख घन मीटर पत्थरों की जरूरत होगी। अयोध्या में सवा लाख घन मीटर पत्थर तैयार हैं। वीएचपी की ओर से अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की खातिर देशभर से पत्थर इकट्ठा करने का राष्ट्रव्यापी अभियान घोषित करने के करीब छह महीने बाद पत्थरों से लदे दो ट्रकों के शहर में प्रवेश करने पर जिला पुलिस सतर्क हो गई और हालात पर नजर रख रही है।

सनद रहे कि वर्ष 2004 के आम चुनाव से पहले संघ और विश्व हिन्दू परिषद के नेता राम मंदिर को लेकर बेसब्र होने लगे थे। दिल्ली के रामलीला मैदान में एक सभा भी हुई थी जिसमें तबके प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पर खूब निशाना साधा गया था। संघ परिवार से संबद्ध लोगों का कहना था कि वाजपेयी मंदिर निर्माण को लेकर गंभीर नहीं हैं और बीजेपी ने सत्ता हासिल करते ही मंदिर मुद्दे को भुला दिया। अगस्त 2003 में राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत रामचंद्र दास परमहंस का निधन हो गया। उनके अंतिम संस्कार के लिए सरयू नदी के किनारे बीजेपी और संघ परिवार के सभी बड़े नेता मौजूद थे। वहीं तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी ने कहा था कि हमें भरोसा है कि सारी बाधाएं दूर कर मंदिर बना ली जाएगी। उसी दरम्यान लाल कृष्ण आडवाणी ने कहा था कि सबसे अच्छा विकल्प तो यह होगा कि सारे समुदाय के लोग राष्ट्रीय भावना का सम्मान करें कि वहां सिर्फ राम मंदिर ही बन सकता है और कुछ भी नहीं। तत्कालीन संघ प्रमुख केसी सुदर्शन ने कहा था कि सबको 2004 के चुनाव की तैयारी में जुट जाना चाहिए। लोकतंत्र में जनता का मत सर्वोच्च होता है। सभी हिन्दुओं के लिए महत्वपूर्ण है कि वो चुनाव से पहले ऐसा माहौल तैयार करें कि मंदिर का विरोध करने का साहस किसी में न रहे। 2004 में वाजपेयी हार गए और 2014 में प्रधानमंत्री मोदी सत्ता में आए तो बहुमत तो मिला लेकिन वो मंदिर निर्माण के लिए नहीं था। फिर भी अगस्त 2003 के संकल्प को अब 12 साल हो गए। उस संकल्प का तो कुछ नहीं हुआ लेकिन संघ ने एक बार फिर संकल्प लिया। पिछले दिनों दिल्ली में वीएचपी नेता अशोक सिंघल की याद में हुई शोक सभा संघ प्रमुख ने कहा कि मंदिर बनाने का काम सिर्फ़ अशोक जी का नहीं था। उसे आगे बढ़ाने के लिए जो हमें करना होगा, वो हम करेंगे।

इसी साल मई में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था कि बीजेपी मंदिर निर्माण के मुद्दे पर पीछे नहीं हटी है लेकिन मंदिर निर्माण के लिए हमारे पास बहुमत नहीं है। मंदिर निर्माण के लिए अकेले बीजेपी को कम-से-कम 370 सीटें चाहिए। 2014 में प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता चरम पर थी तब बीजेपी को 282 सीटें आईं थी, अमित शाह ने राम मंदिर के लिए 370 सीटों का लक्ष्य टालने के लिए रखा है या बहलाने के लिए। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के लेटेस्ट फैसले को ध्यान में रखें। 30 मार्च 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला देकर 30 सितंबर 2010 के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2.77 एकड़ ज़मीन को हिन्दू-मुसलमान और निर्मोही अखाड़े के बीच बांट दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बंटवारे की मांग किसी पार्टी ने की ही नहीं। हाई कोर्ट के फैसले को विचित्र बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दिया। वहीं मोदी सरकार के वजूद में आने के बाद वीएचपी ने भी कोई ठोस प्रयास नहीं किया। 25 और 26 जून को मोदी सरकार के एक साल पूरे होने के मौके पर विहिप की हरिद्वार में हुई बैठक में एक प्रतिनिधिमंडल बनाने का ऐलान हुआ था जो मंदिर निर्माण के मसले को लेकर मोदी सरकार से बात करेगा। जून से लेकर नवंबर के बीच प्रतिनिधिमंडल ने किससे बात की या बात ही नहीं की, यह पता नहीं चला। 30 सितंबर को अशोक सिंघल और सुब्रह्मण्य स्वामी ने राम मंदिर को बहुसंख्यक भारतीयों का राष्ट्रीय लक्ष्य बताया था। बीते 1 अक्टूबर को अशोक सिंघल के 90वें जन्मदिन पर संघ प्रमुख ने मंदिर निर्माण को लेकर कुछ नहीं कहा। वहां मौजूद लोगों ने ‘मंदिर वहीं बनाएंगे’ का नारा लगाया तो अशोक सिंघल माइक लेकर अपनी बात कहने लगे और नारों को दरकिनार कर दिया।

इससे पहले विहिप ने जून में ऐलान किया था कि अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए देश भर से पत्थर इकट्ठा किए जाएंगे। उसी समय विहिप ने मुस्लिम समुदाय को भी चेतावनी दी थी कि वह राम मंदिर निर्माण में कोई अड़ंगा न लगाए। जबकि अशोक सिंघल ने कहा था कि राम मंदिर निर्माण के लिए करीब 2.25 लाख क्यूबिक फुट पत्थरों की जरूरत है और करीब 1.25 लाख क्यूबिक फुट पत्थर अयोध्या स्थित विहिप मुख्यालय में तैयार रखे हैं। शेष पत्थर देश भर से हिंदू श्रद्धालुओं से इकट्ठा किए जाएंगे। विहिप के प्रवक्ता शरद शर्मा ने जानकारी दी कि अयोध्या में विहिप की संपत्ति राम सेवक पुरम में दो ट्रकों से पत्थर उतारे हैं और महंत नृत्य दास ने शिला पूजन किया गया है। इस बीच, महंत नृत्य गोपाल दास के अनुसार मोदी सरकार से संकेत मिले हैं कि मंदिर का निर्माण अब कराया जाएगा। हालांकि पुलिस का कहना है कि हालात पर पैनी निगाह रखी जा रही है। यदि इससे शांति भंग होती है या सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ता है तो हम निश्चित कार्रवाई करेंगे। यह भी उल्लेखनीय है कि 21 दिसम्बर को बीजेपी सांसद विनय कटियार ने कहा कि शिला पूजन नहीं हो रहा है, बल्कि पत्थरों को तराशने का काम हो रहा है। हमें मंदिर तो वहां बनाना ही है, इसलिए हम उसकी तैयारी कर रहे हैं। अब आजम खान भी तैयार हो गए हैं। लोकसभा की 21 दिसम्बर की कार्रवाई के शुरू होते हैं लोकसभा जय श्री राम के नारे से गूंज उठा। अयोध्या में शिलापूजन पर बाबरी मस्जिद केस के पक्षकार हाशिम अंसारी का कहना है कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है, जो फैसला होगा वो उसे मानेंगे। उन्होंने सरकार से शिला पूजन रोके जाने की अपील की है। अयोध्या में करीब आठ साल बाद राम मंदिर निर्माण के लिए पत्थर लाने का काम अचानक फिर से शुरू हो गया है। बहरहाल, स्थितियां ठीक नहीं है। यदि अयोध्या में किसी भी तरह की प्रगति होती है तो मंदिर-मस्जिद बने या ना बने पर देश का सौहार्द तो बिगड़ ही जाएगा। देखना है कि शासन-प्रशासन क्या करता है।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार है 


लाइक करें :-


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें

कमेंट ज़रूर करें