sin

मुहम्मद जाहिद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जितने शातिर हैं उनके भक्त उतने ही बेवकूफ , बोले तो “झंडू”। जिनको संतुष्ट करने के लिए नरेंद्र मोदी इस हद तक बेवकूफी भरे बयान दिलवा रहे हैं जिससे उनके प्रति भक्तों की उम्मीद बनी रहे कि वह पाकिस्तान के विरुद्ध कार्यवाही कर रहे हैं। ताजा जुमला सिंधु नदी समझौते को तोड़ने की विदेश मंत्रालय की धमकी है।

आइए सिन्धु नदी समझौते की हकीकत समझते हैं, इस समझौते में 6 नदियों के जल का बटवारा किया गया है , सतलज, रावी , ब्यास,सिंधु, चिनाब और झेलम। सतलज रावी और व्यास के पानी पर भारत का पुर्ण अधिकार है जिसका वह यथासंभव उपयोग करता है परन्तु सिन्धु , चिनाब और झेलम के पानी का वह 20% पानी ही उपयोग कर सकता है। शेष पाकिस्तान की ओर जाने देता है।

सिंधु नदी दुनिया की सबसे बड़ी नदियों में से एक है। इसकी लंबाई 3000 किलोमीटर से अधिक है यानी ये गंगा नदी से भी बड़ी नदी है। अपनी सहायक नदियों के साथ सिंधु नदी पाकिस्तान में जाकर एक हो जाती हैं।

और पढ़े -   'इंडिया मांगे इंसाफ' - सच बोलना पाप है और अत्याचार माफ़ है!

सिंधु नदी बेसिन करीब साढ़े ग्यारह लाख वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला है। अर्थात उत्तर प्रदेश , बिहार , राजस्थान और पश्चिम बंगाल इसमें समा सकते हैं। सिंधु और सतलज नदी चीन से आती है, जबकि बाकी चार नदियां भारत में ही निकलती हैं. सभी नदियों के साथ मिलते हुए विशाल सिंधु नदी कराची के पास अरब सागर में गिरती है जिसका बहाव गिलगिट , पेशावर , रावलपिंडी , थट्टा और कराची तक है।

भक्तों और शेष भारत को पाकिस्तान के विरुद्ध कार्यवाही के नाम पर मोदी सरकार जो बेवकूफ बना रही है उसको दुनिया और निष्पक्ष विशेषज्ञ खूब समझ रहे हैं परन्तु यदि सच बोलें तो भारत में “कपिल शर्मा” ना हो जाएँ इस डर से चुप हैं।

और पढ़े -   बच्ची गोद लेने पर सनी को गाली देने वाले लोग मनुवादी: सूरज कुमार बौद्ध

दरअसल व्यवहारिक इसलिए नहीं कि इन नदियों के बीच समुद्र है जिसके पानी को रोक पाना लगभग असंभव है। इसके लिए भारत को तमाम बांध और कई नहरें बनानी होंगी, जिसके लिए बहुत पैसे और भारत की जो सरकारी कार्यपद्धति है उसमें कम से कम 25 वर्ष की ज़रूरत होगी , अर्थात उरी का बदला 25 वर्ष बाद वह भी मोदी रहे तो , नयी सरकार कल पाकिस्तान के साथ क्या नीति अपनाएगी यह उसपर भी निर्भर है। खैर , रोका हुआ यह जल तमाम रिहायशी इलाकों में फैलेगा , इससे विस्थापन की समस्या का समाना भी करना पड़ सकता है और इस जमा पानी के कारण पर्यावरण नष्ट होगा जिसके प्रभाव भी होंगे।

दूसरी ओर भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि पर भी सवाल उठने लगेंगे। अब तक भारत ने किसी इंटरनेशनल ट्रीटी का कभी भी उल्लंघन नहीं किया। अगर भारत अब इन 3 नदियों का पानी रोकता है तो पाकिस्तान को पूरी दुनिया से सहानुभूति मिलेगी ।

और पढ़े -   मीडिया का काम जनता की चिंता करना नहीं बल्कि युद्ध करवाना रह गया

चीन से कई नदियां भारत में आती हैं जिनमें सिन्धु और सतलज भी हैं और सब जानते हैं कि चीन स्पष्ट रूप से पाकिस्तान के साथ है जो आने वाले दिनों में इसे मुद्दा बनाते हुए मुश्किलें खड़ी कर सकता है बदले में वह भी इन नदियों का पानी रोक सकता है। पड़ोसी देशों बांग्लादेश और नेपाल के साथ भारत की नदी जल संधियां हैं और इन पर भी इसका असर पड़ सकता है।

भक्तों आँखे खोलो , झाँसाराम के झाँसे मे मत आओ , पानी लाया हूँ मुँह धोलो। सूतिया मत बनो जुमलों से , मोदी से बोलो पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब दे और 18 के बदले 180 पाकिस्तानी सैनिकों को मारे।


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें



Facebook Comment
loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें

SHARE