रवीश कुमार की फेसबुक वाल से 

भारत और म्यांमार के बीच संधि है कि दोनों एक दूसरे की सीमा में सोलह किमी तक घुस सकते हैं । क्या इस संधि के तहत बिना बताए ही घुस सकते हैं ? क्या म्यामांर अपनी सीमा में आतंकवादियों को सोलह किमी तक कैम्प लगाने की इजाज़त देता है ताकि भारत घुसकर मार दे । अगर किसी आतंकवादी का कैंप सोलह किमी से ठीक सौ मीटर आगे हो तो क्या उसे म्यांमार माना जाएगा और सेना कार्रवाई नहीं कर सकेगी । आतंकवादी सोलह किमी अंदर ही क्यों कैंप लगाते हैं । म्यांमार कर रहा है कि हमारी सीमा में कोई कार्रवाई नहीं हुई । क्या म्यांमार को सोलह किमी वाली संधि की ख़बर नहीं है ? क्या भारत ने म्यांमार के खंडन का खंडन नहीं किया है । उसे तो करना ही चाहिए । उसकी संप्रभुता और अपनी पब्लिक का सवाल है । यह सब चलता रहता है इससे कार्रवाई संदिग्ध हो जाए ज़रूरी नहीं लेकिन सही भी हो जाए यह भी ज़रूरी नहीं ।

इस तरह के आपरेशन होते हैं और हो जाने चाहिए । कल जिस तरह से कई लोगों ने महानता महानता करने के लिए बाध्य किया और गालियाँ दी कि देखो हमने करके दिखा दिया उससे मन्न खिन्न हो गया । यह मान लेना ही हास्यास्पद है कि सेना या भारत की किसी उपलब्धि से खुशी नहीं होगी । मिनट दर मिनट आपरेशन की ख़बर बताई जाने लगी । इतनी ही सेना की चिंता थी तो कल दोपहर घोषणा कर देते कि वन रैंक वन पेंशन लागू हो गया है । सरकार लागू कर देगी और करना ही पड़ेगा ये पता है लेकिन हर बात पर स्टेटस लिखकर गवाही देनी पड़ेगी क्या । ये गरियावन सब कौन होता है जो ऐसे मौके पर आकर अनाप शनाप बकने लगता है । जानते तो है ही लेकिन जनाने के लिए लिख रहा हूँ । गाली देकर क्यों जूनियर मंत्री से प्रचारित एक ‘ उपलब्धि ‘ का मज़ा ख़राब करते हो ।

अलग अलग लेख लिखे जाने लगे । एक ने तो चौबीस घंटे हुए नहीं कि कार्रवाई को पीएम मोदी की ब्रांडिंग से जोड़ दिया । कोई सुरक्षा सलाहकार की प्रोफ़ाइल करने लगा । बड़ी कामयाबी है तो करना ही चाहिए । उनकी क़ाबिलियत पर किसी को क्या शक । कोई सवाल करने लगा कि मीडिया को बिना फोटो बिना वीडियो मिनट दर मिनट जानकारी दी जाती है क्या । कोई लिखने लगा कि पहले भी ऐसी कार्रवाई हो चुकी है । अब किस पर यक़ीन करे । रक्षा मंत्री क्यों नहीं बोल रहे । ये कहाँ लिखा है कि जूनियर मंत्री के बयान को दुनिया सरकार का नहीं समझेगी । जिसे हम सरकार समझते हैं उसे बाकी सरकारें भी तो सरकार समझेगी । अब बहस हो गई न कि जो हुआ सही था या नहीं हुआ ।

इसलिए हे इंटरनेटी आततायियों संयम बरतो । सेना के काम को पार्टी में मत बाँटो । हमको किसी पार्टी में बाँट कर आलोचना का आलस मत पालो । योग विरुद्ध बातें मत करो । योग तो संयम और संस्कार की बात करता है । सुष्मा जी ने उचित ही कहा है कि योग का संबंध धर्म से नहीं होता । अच्छे कर्मों को संचय करो । हास्य व्यंग्य का सहारा लो । मच्छर की तरह भभोर ले ताडन सन । इतनी गंदी भाषा । शर्मनाक है ।


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