(आदरणीय) उषा ठाकुर जी

नमस्कार
आपके नाम के आगे बहन जी या दीदी भी लगाना चाहता था लेकिन चूँकि मैं एक मुस्लिम हूँ और मुस्लिम समाज के पुरुषों से भाई का रिश्ता बनाने में आपकी बिलकुल भी रूचि नहीं है कियुंकी आपको हर मुस्लिम पुरुष में लव जेहादी नज़र आता है लिहाज़ा ये सम्बोधन आपके लिए बेमानी है…हालाँकि स्पष्ट कहूँ तो आपके नाम के आगे ‘आदरणीय’ भी बहुत भारी मन से लगाया है कियुंकी समाज में साम्प्रदायिक वैमनस्यता और भेद भाव वाले आपके बयानों के चलते मेरे मन से आपके लिए ये भाव भी जाता रहा ,लेकिन मेरा मज़हब मुझे महिलाओं की इज़्ज़त करना सिखाता है लिहाज़ा मजबूरी में ये लगाना पड़ रहा है..

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बहरहाल आपका ताज़ा बयान नज़र से गुज़रा जिसमे आपने मुस्लिमों से किसी जानवर के बदले अपने पुत्रों की क़ुरबानी करने को कहा है । मुझे समझ नहीं आता की आपसे इस विषय पर धार्मिक नज़रिये से बात करूँ या राजनैतिक और समाजिक नज़रिये से ? शायद आपसे धार्मिक नज़रिये से बात करना फ़िज़ूल होगा कियुंकी आपको इस्लाम का ज्ञान नहीं है..ज्ञान तो शायद आपको हिन्दू धर्म का भी है वरना आपको पता होता की हिन्दू धर्म में भी बलिप्रथा सदियों से चली आ रही है जो नेपाल से लेकर कलकत्ता तक आज भी निरन्तर जारी है…सामाजिक स्तर पर बात करूँ तो आप खुद ठाकुर समाज से हैं और आपका तो खेर मुझे पता नहीं लेकिन अधिकांश ठाकुर समाज मांसाहार का समर्थक है लेकिन शायद आपको अपने समाज की स्थिति का भी अंदाज़ा नहीं है इसलिए इस नज़रिये को भी रहने ही दिया जाये तो बेहतर होगा..

चूँकि आप राजनैतिक हैं और निसन्देह आप ये उलजुलूल विवादास्पद वैमनस्यता वाले बयान भी अपने राजनैतिक स्वार्थों की पूर्ति के उद्देश्य से देतीं हैं ये कहना भी अतिशयोक्ति नहीं होगा…लेकिन यहां मुझे आपकी राजनैतिक समझ और निष्ठा पर भी सवालिया निशान लगाना ज़रूरी है..आप जिस भाजपा या संघठन से जुडी हैं आपको या तो उनके नए दृष्टिकोण का ज्ञान नहीं है या आप जान बुझ कर अपने दल और संघठन की नई विचारधारा के खिलाफ बयानबाज़ी करके अपने ही दल और संघठन का विरोध कर रही हैं..आपका दल और संघठन “सामाजिक समरसता” की बात कर रहा है..मुस्लिमों को जोड़ने के लिए आपका दल और संघठन इतने लालायित हैं कि अपने कार्यक्रमों में बुर्का-टोपी की मौजूदगी को वो अपनी उपलब्धि के रूप में पेश करने लगे हैं (हालाँकि इनके फर्जी इस्तमाल का आरोप भी आपके दल और संघठन को बुर्का-टोपी के मोह से मुक्त नहीं कर सका है)…

कभी टोपी से परहेज़ करने वाले आपकी पार्टी के (पोस्टर-बॉय)आलाकमान अब न सिर्फ टोपी पहन कर तस्वीरें छपवा रहे हैं बल्कि जिन्ना की मज़ार से मस्जिदों तक में शीश भी नवा रहे हैं…उनके इन प्रयासों में कितना दिखावा है और कितनी वास्तविकता ये बहस का विषय हो सकता है लेकिन दिखावे पर तो कोई सन्देह नहीं है..लेकिन आप हैं की अपने दिल में भरी मुस्लिमो की नफरत का वास्तविक प्रदर्शन कर उनके दिखावे की मेहनत को मिट्टी में मिलाने पर आमादा हैं इस तरह आप अपने दल और अपने संघठन का ही विरोध कर रहीं हैं…वैसे आपके वैमनस्यता वाले बयान का यह पहला मामला नहीं है इससे पहले भी आप मनघड़ंत “लव-जेहाद” और गरबों में मुस्लिम युवाओं के प्रवेश को लेकर भी आप बयानबाज़ी कर चुकी हैं…

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मुझे आपके दोगले रवैये पर हैरत होती है कि मुस्लिम जागरण मंच के लोगों का गणेश-आरती में शामिल होने से आपको ऐतराज़ नहीं लेकिन गरबों में आने से आपको ऐतराज़ है (हालाँकि ये स्पष्ट कर दूँ कि मैं भी गरबों में मुस्लिम युवाओं की भागीदारी का विरोध करता हूँ लेकिन विरोध के पीछे आपके तर्क से मैं पूर्णतः असहमत हूँ)…मुस्लिमों के प्रति आपका ये पूर्वाग्रह से ग्रस्त दुराभाव इसलिए भी हैरान करने वाला है की जिस इंदौर-3 से आप भाजपा की विधायक हैं उसमे न सिर्फ बड़ी संख्या में मूस्लिम मतदाता हैं बल्कि आप वोट हासिल करने के लिए उन इलाकों में जाने से और मुस्लिम कार्यकर्ताओं को जोड़ने से परहेज़ नहीं करतीं..फिर ये दोगला व्यवहार कियूं ??

हालाँकि आपके बेतुके बयान सिर्फ मुस्लिमों तक ही सिमित नहीं हैं पिछले दिनों आपने “माँ और मेगी” को लेकर भी बयान दिया था कि “माँ आलसी हो गयीं हैं इसलिए बच्चों को मेगी बना कर खिला देती हैं” …उषा जी आप तो अविवाहित हैं इसलिए मातृ सुख से वंचित हैं..वरना आपको ज़रूर पता होता कि ये आलस का नहीं अपनी सन्तान की इच्छा-पूर्ति के लिये बनाया जाने वाला भोजन है..गरबे में शामिल लड़कियों और महिलाओं की आपकी चिंता और बच्चों की फ़िक्र में माँ को आलसी कह कर लताड़ने की आपकी भावना के बीच आपको याद दिला दूँ कि आपके शहर में कुछ दिन पहले एक महिला कविता रैना की 6 टुकड़ों में काट कर निर्मम हत्या कर दी गयी है..आपके शहर में ही मासूम बच्ची शिवानी के साथ कुकृत्य और हत्या जेसी वारदात हुई है..हाल ही में पेटलावद में भी 100 लोग मारे गए हैं लेकिन आपका कोई बयान नज़र नहीं आया..हो सकता है इसकी वजह ये रही हो कि इन घटनाओं में आपके दल और संघठन के कार्यकर्ताओं की संलिप्ता सम्बंधित समाचारों का हिस्सा रही है..



अंत में यही कहना चाहूँगा कि
उषा जी आप विधायक जैसे ज़िम्मेदार समझे जाने वाले पद पर है
बयान देना आपका लोकतान्त्रिक अधिकार है लेकिन अपने पद की गरिमा का मान रखते हुवे जिस विषय पर बयान दे रहीं हैं उसके सही तथ्य जान लें ताकि आपके ज्ञान पर कोई सवालिया निशान न लगा सके…।

पत्र में मेरा कोई शब्द आपको नागवार गुज़रा हो तो माफ़ी चाहता हूँ माफ़ी इसलिए नहीं कि आप अपने पद के प्रभाव से मुझे नुकसान पहुंचा सकती हैं..बल्कि इसलिए की मेरा मज़हब मुझे किसी के दिल को ठेस पहुंचने की इजाज़त नहीं देता कम से कम एक महिला के दिल को तो हरगिज़ नहीं…।

Parvez IQBAL (1)
परवेज़ इक़बाल


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