ravish_650x400_81422536492-e1458321544725

*रवीश कुमार के नाम खुला खत*

*रवीश जी नजीब के लिये आप  टीवी को  कब अंधेरा करेंगें?*

    रवीश कुमार जी मैं आपका बड़ा फैन हूं,  वैसे रवीश आप खुद को हज़ारों लोगों का प्रेरक,
और आदर्श भी मानते हैं, पर कुछ बातें एैसी हैं जो इसी आदर्श व प्रेरक की निष्पक्षता,और  सहंशीलता,पर उंगली उठाती हैं,
उन्हीं का जवाब आप से चाहिए!
रोहित वेमुला,कनहैय्या,दीना मांझी,जे.एन.यू,डेंगू,मच्छर,सर्जिकल स्ट्राईक,महंगाई,दही हांडी,
जैसे सैंकड़ों मुद्दों पर प्राइम टाईम पर कई कई घंटे आपने बोलने में,आवाज़ उठाने और सच को बाहर निकालने में,गुज़ार दिया,टी.वी पर अंधेरा कर दिया.
नेता,जनता,पत्रकारिता और विधिता हर एक को आपने झकझोरा,
सुधीर,राहूल,यशवंत,रजत,और सरदाना जैसे बिकाऊ मालों की भीड़ में आप जैसे निष्पक्ष,
ईमानदार और सच्चे पत्रकार को देख मीडिया के कुछ इकाईयों पर यकीन बाकी रहा,………….
आप बिहार के रवीश से भारत के एक बड़े पत्रकार ही नहीं,हमारी आवाज़ और लोकतंत्र के सुतून बन गये..
आपका क़स्बा एक शहर  नहीं इंटरनेशनल प्लेटफार्म बन गया.
लेकिन ज़ाकिर नाईक का मीडिया ट्रायल,चांदबाग़ दिल्ली से 13 निर्दोषों की गिरिफ्तारी,जामिया नगर के मुस्लिम बच्ची  के साथ रेप,
डींगरहेड़ी में संघियों द्वारा  सामूहिक रेप और हत्या,
रुकिये अभी एक लम्बी लिस्ट है,
गुजरात के अय्यूब की गौआतंकियों द्वारा हत्या,
बिजनौर के पेदा में जाटों द्वारा
पांच मुस्लिम नैजवानों  की निर्मम हत्या,झारखण्ड के ग्राम जामताड़ा
के मिनहाज अंसारी
का पुलिस कस्टडी में दर्दनाक क़त्ल,
और अब 16 दिनों से ग़ायब नजीब अहमद,
आप तो जानते ही होंगें,कि नजीब समाज के उस तबक़े के से था जिसे अनपढ़,दिक्यानूस,अशिक्षित और ना जाने क्या क्या कहा जाता है,
और आप ये भी जानते हैं कि नजीब ने जे.एन.यू तक पहुंचने के लिये जामिया,ए.एम.यू और हमदर्द जैसी मुस्लिम यूनिवर्सिटियाँ छोड़ दीं,
मात्र 20 सीट वाले फैक्लटी बायोटेक्नालोजी  का ये
एकलौता मुस्लिम छात्र नजीब कल के मुस्लिम समुदाय के लिये उम्मीदों की किरन और देश के लिये धरोहर साबित होता,
लेकिन ABVP के हिंदुत्ववादियों ने इस चराग़ को बुझा दिया,
रवीश सर!
नजीब की मां दिल्ली की गलियों में अपने बेटे के लिये दर दर की ठोकर खा रही हैं,अब तो उसके आंसू भी सूख चुके हैं,
प्रधानमंत्री,गृहमंत्री,मुख्यमंत्री दिल्ली तक से इंसाफ़ की भीख मांग चुकी है,लेकिन नजीब के लिये या उसकी तड़पती मां के लिये किसी भी टी.वी ने चार जुमले नहीं खर्च किये,

चलते रहिये छिट पुट बहूत सारे हादसे हैं जो होते रहते हैं,
पुराने हो जाते हैं,हम जैसे हज़ारों इन पर प्राईम टाईम,होते देखना और सुनना चाहते हैं,
टीस यही है कि इन पर आज तक हमने टीवी को अंधेरा होते नहीं दिखा.
जिस जे.एन.यू के कन्हैय्या के लिये टी.वी ब्लेक करके आपने उसे नेशनल मुद्दा बना दिया था,
उसी जे.एन.यू के होनहार छात्र नजीब के ग़ायब होने के  16 दिन बीत जाने पर भी आपने टीवी को रेड
या ब्लेक करना तो बहूत दूर की बात,नजीब के लिये बतौर सहानाभूति एक लफ्ज़ तक कहना मुनासिब नहीं समझा,
एन.डी.टीवी जैसे निश्पक्ष चैनल पर  इन सब घटनाओं के लिये कोई प्रोग्राम नहीं चला…
सवाल ये है कि आप की नज़र में ये सब मुद्दे बनने के क़ाबिल नहीं है?
या एन.डी.टीवी इन्हें मुद्दा समझती ही नहीं?
या ये समाज के उस तबक़े के मसाएल हैं जो ध्यान देने के क़ाबिल ही नहीं,?
रवीश जी!
पत्रकारिता के मापदंडों,उसूलों और आदर्शों को आपसे बेहतर कौन समझ सकता है,?
पर अगर आप और आपका चैनल भी इन पर खरे नहीं उतरते तो हमें ये कहने में कोई संकोच और हिचकिचाट नहीं होगी कि सम्पूर्ण भारत की मीडिया दोग़ली है,
और हर किसी का मुस्लिम समाज
के साथ दोहरा रवय्या ही है.
याद रखिये लाखों लोग  आप को फालो करते हैं..
आपकी गुणगान करते हैं.
निशपक्ष पत्रकारिता का दूसरा नाम रवीश कुमार का नारा लगाते हैं,
क्योंकि आप निष्पक्ष समझे जाते हैं,.
इस लिये नहीं कि आप अच्छा बोल लेते हैं,चुभते सवाल उठाते हैं,
ये काम तो सुधीर,रजत और राहुल आप से बढ़िया करते हैं,
पर उन्हें गालियां मिलती हैं और आपको दुआयें,
इनकी क़दर कीजिये,.
इन के स्वाभिमान और यकीन को डगमगाने ना दीजिये…
आपसे इन सवालों के जवाब चाहिये..
आपका एक प्रशंसक होने के नाते.पहले भी आपसे कुछ पूछने की जुर्रत की थी,लेकिन शायद आपने उसे यूंही फिजूल की बात समझ कर डस्टबिन में फेंक दिया,याद रखिये ये सवाल अब आपसे आपका हर हर  फैन करेगा,
आप को हीरो बनाने के पीछे आपकी निशपक्षता ही है,
अगर यही ना रही तो फिर शायद आप भी.
हां बरखा और अभिज्ञान से कोई शिकायत नहीं क्यों हम उन्हें फक़त पढ़ते हैं और आप को दिल में रखते हैं,,,,,
शायद ये दिल की आवाज़ आप तक पहुंचे और आप इसे समझें.
मुआफी के साथ.
सवालों के जवाब का इंतिज़ार रहेगा.
बल्कि नजीब के लिये आप के चंद जुमलों का इंतिज़ार रहेगा,वो भी जे.एन.यू के एडमिनिस्ट्रेशन अॉफिस के सामने उसी जगह से जहां से कन्हैय्या के लिये आपने आवाज़ उठायी थी,

✍🏻मेहदी हसन एैनी क़ासमी✍🏻


लाइक करें :-


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें

कमेंट ज़रूर करें