सेवा में,
कल्पेश याग्निक,
अध्यक्ष , मुस्लिम विरोधी मंच. (नेशनल एडिटर, दैनिक भास्कर)
श्रीमान,

जैसा की कुछ लोगों ने मुझे बताया कि आप दैनिक भास्कर नाम के हिंदी अखबार के नेशनल एडिटर भी हैं तो मुझे आश्चर्य हुआ कि आप एक साथ दो काम कैसे कर लेते हैं. पहला काम ये कि अपने अखबार के माध्यम से इस्लाम और मुस्लिम विरोध की मुहीम चलवाते हैं और दूसरा काम सम्पादक जैसा निरपेक्ष और सम्मानित पद पर बने हुए हैं. यह दोनों तो अपने आप में ही विपरीत लगते हैं. या तो आप अल्पसंख्यक समुदाय के प्रति घृणा ही करें और उसे फैलाएं या फिर सम्पादक पद से इस्तीफा दे कर सनातन संस्था जैसे कट्टर प्रवृत्ति के लोगों की कलम की स्याही ही बने रहें.

महोदय, यह जोधपुर शहर दैनिक भास्कर के अखबार की क्लिप है. जिसमें एक मुसलमान के घर पर ईद मिलादुननबी के अवसर पर होने वाले जश्न की तैयारियों के तहत इस्लामी झंडा लगाया गया है जिसे आपने अपने पत्रकारों और संपादकों के जरिये पाकिस्तानी बता कर न सिर्फ जोधपुर के मुसलमानों बल्कि पूरे देश के मुसलमानों की देश के प्रति निष्ठा,सेवा भाव एवं प्रेम पर न सिर्फ संदेह पैदा करने का काम किया है बल्कि अपमानित करने का घृणित कार्य भी किया है.

कल्पेश याग्निक जी, आप और आपका अखबार मुसलमानों से इतनी नफरत करता है की उसे उसके उत्सवों और खुशियों, उसकी पहचान, प्रतिष्ठा, सम्मान की ज़रा भी फ़िक्र नहीं. आपका अखबार है या फिर सनातन संस्था का जहर बुझा पत्र जिसमें नफरत की खेती की जाती है.

open letter to dainik bhaskar editor
यह आपको पाकिस्तान का झंडा दिखाई दे रहा है ? मुझे पता है आपके ऊपर और नेशनल न्यूज़ रूम के संपादकों पर इसका कुछ असर नहीं पड़ेगा लेकिन इतनी बेईमानी और नफरत के साथ कैसे नींद आती है आप लोगों को. इतनी लुच्चई और लफंगई के बाद भी आप लोगों को पत्रकार कैसे मान लिया जाता है. ऐसी नफरत की कमाई से अपने बच्चों को क्या खिला रहे हैं, कभी सोचा है ? वो बच्चे इंसानी गोश्त और लहू का नाश्ता कर रहे हैं और आप उनको ख़ुशी ख़ुशी खिला रहे हैं. आप लोग जिस हवा में सांस ले रहे हैं वो हवा नहीं है ,वो तो आपके द्वारा उड़ाई गयी नफरतों से भरी अफवाहें हैं जिसके असर से रातों की नींद गायब रहती है और आपको लगता है की आप मज़े से सो रहे हैं.

चूँकि, किसी अदालत या कानून में फंसने लायक आप लोगों की गर्दन नहीं है इसलिए मैं आपके जमीर को ललकार रहा हूँ. जिस असाध्य रोग की चपेट में आप सब हैं उसका इलाज ऐसे ही होता है.

यह पाकिस्तान का झंडा है कल्पेश याग्निक और उसके संपादकों ? इतनी समझ आज तक नहीं हासिल कर सके , अरे जिन मुसलमानों के बीच सैकड़ों साल से रह रहे हो ,उनकी पहचान ,उनकी तहजीब से इतने कटे हो और दावा करते हो की पत्रकार हो. आप लोग तो दंगाई हैं ,बिल्कुल वैसे दंगाई जो तलवार और पेट्रोल से महिलाओं /बच्चों /बूढ़ों का क़त्ल करते हैं. आपकी कलम और आपकी तस्वीरें हिन्दुस्तान का मुस्तकबिल बिगाड़ रही हैं.

कल्पेश याग्निक , शर्म आनी चाहिए आपको. एक समुदाय के खिलाफ समाज में नफरत फैलाते हुए लेकिन आपको क्यों आएगी ? आपने तो उसी दिन सब कुछ बेच दिया था जिस दिन दैनिक भास्कर के सम्पादक बन कर कुर्सी संभाली थी. कल्पेश याग्निक, इतनी नफरत बटोर कर कहाँ खर्च करते हो ? कितना फायदा होता है इंसानों के बीच मन मुटाव बढ़ा कर, क्या उस फायदे से कुछ हासिल भी हो रहा है ? नहीं मिलेगा कुछ, बता रहा हूं.

कल्पेश याग्निक, ऐसे लाखों-करोड़ों झंडे भारत में मुसलमानों के घरों पर लगे हुए हैं. इतने परचम लहरा रहे हैं कि सबकी तस्वीर छापते छापते बुढ़ापा आ जाएगा तब भी नहीं ख़त्म होगी कहानी. सिर्फ एक घर नहीं है कल्पेश, पूरे हिन्दोस्तान में कई करोड़ घर हैं. आपकी माने तो वे सारे मुसलमान पाकिस्तानी हुए. तो भेज दो हमें पाकिस्तान कल्पेश याग्निक. बताओ कब और कैसे भेज रहे हो.

मैं तुम्हें और तुम्हारी राजस्थान दैनिक भास्कर टीम को दंगाई कहता हूं. मैं तुम्हें कट्टरता का दलाल कहता हूं. मैं तुम सबको मुल्क के अमन चैन से खिलवाड़ करने वाला कहता हूँ. असल में तुम सब हिस्ट्रीशीटर हो. तुम्हारी एक गैंग है,जिसमे समाज का सुख चैन छिनने वाले डकैत काम करते हैं.
लगाओ देशद्रोह की धारा मुझ पर.

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मोहम्मद अनस — लेखक जाने माने पत्रकार तथा सोशल एक्टिविस्ट है


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