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आज एक खबर पढ़ी जिसमे सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने जन्मदिन पर केक काटने से मना कर दिया ऐसा उन्होंने इसलिए किया ताकि समाज से इस तरह की कुप्रथाएं खत्म हो सके. बहुत अच्छी बात है समाज में जिस तरह कुप्रथाओं ने ने अपने पैर पसार रखे है उन्हें देखकर तो यही कहा जा सकता है की प्रथाएं कम और कु-वाली प्रथाए ज्यादा है.

एक महानायक होने के नाते मैं उनकी बहुत रेस्पेक्ट करता हूँ क्यूंकि वो ना सिर्फ एक अच्छे अभिनेता है बल्कि महान है देश में काफी जगहों पर उनकी पूजा भी की जाती है. लोग उनका ककही बात का अनुसरण करते है मुझे याद है बचपन से मैं उनका पोलियो ड्राप वाला विज्ञापन देखते आया हूँ. एक लहर की तरह देश से पोलियो जैसे गायब हो रहा है उसने अमिताभ बच्चन का कहीं ना कहीं बहुत महत्वपूर्ण योगदान है.

जब से होश संभाला है तब से अमिताभ की फ़िल्में देखते आ रहे है, ज़रा उम्र 6-7 बरस की रही होगी टीवी पर आने वाला ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा..तो सुर बने हमारा’ जैसा बोरिंग गाना भी सिर्फ इसलिए देखते थे क्यूँकी उसमे अंत में अमिताभ बच्चन और मिथुन नज़र आते थे.

उस समय राजनीती की मैगज़ीन और अख़बारों से इतना लगाव नही था लेकिन जब पूर्व प्रधानमन्त्री राजीव गाँधी की बम ब्लास्ट में हत्या हुई तब टीवी पर और मैगज़ीन में एक लम्बा सा शख्स बार बार मेरी आँखे अपनी तरफ खीच लेता था, जब यह पूछा की अमिताभ यहाँ क्या कर रहे है तो जवाब मिला की बेटा ये राजीव गाँधी के बहुत अच्छे दोस्त थे और घरेलु सम्बन्ध रहे है. हो सकता है वैसे ही जैसे सुभब्रह्मंयम स्वामी के कांग्रेस के साथ सम्बन्ध थे. आज जब आपको मैं, पर्यटकों को गुजरात बुलाते हुए देखता हूँ तो सोचता हूँ की एक बार गुजरात घूम आऊ ..देखू की वो कौन सी खुशबु है जिसने आपको भी अपनी तरफ खीच लिया और उस खुशबु में ऐसा क्या जादू है जिसने गुजरात के गाँधी से नेहरु तक और राजीव से मोदी तक को आपसे जोड़ दिया.

उसके बाद सबसे अधिक ख़ुशी मुझे तब मिली थी जब अपने दुसरे दौर में ‘लाल बादशाह’ लेकर आये थे. देखते ही देखते कब आपके छोटे-छोटे बच्चे मेरे साथ-साथ बड़े हो गये. यह अमिताभ की ही दीवानगी थी जो अभिषेक बच्चन की रिफ्यूजी देखने गया था ( अभिषेक मुझसे बड़े है रिफ्यूजी रिलीज़ के समय मैं 11वी कक्षा में था) और उसके बाद देखते ही देखते कब ऐश्वर्या आई और उनकी शादी की बात अभिषेक से सुनाई देने लगी.

अमिताभ जी आपको देखना, आपकी बात मानना, जैसा आप करें वैसा ही करने की कोशिश करना … मेरी क्या .. देश के सभी लोगो की फितरत जैसी है. फिर आपको एक दिन पता चला की ऐश्वर्या मांगलिक है ( मैंने मांगलिक शब्द इससे पहले सुना तो था लेकिन मतलब पता नही था असल मग्लिक क्या होता है आपके केस के बाद जाना) इसीलिए उनकी शादी अभिषेक से करने से पहले एक पेड़ से करायी जाएगी. हमने भी यही सोचा की पेड़ से करने में क्या बुराई है मैंने 2007 में टेलीग्राफ में छपी वो खबर भी पढ़ी जिसमे आपने ऐश्वर्या राय की शादी पेड़ से करवाकर उनके उपर से गुण-दोष उतारा.. हो सकता है यही वजह हो जो शादी आजतक अच्छे से निभ रही है वरना फिल्म इंडस्ट्री में लोग कहाँ एक दुसरे के साथ इतना लम्बा रहते है .. करिश्मा कपूर का हाल तो सबने देखा ही है.

आज खबर पढ़ी की आपने केक काटने से मना कर दिया .. सच में यह कुप्रथा है पश्चिमी सभ्यता की निशानी है .. हम गुलाम थे, इसकी याद दिलाती है ईसाइयत की निशानी है .. मैंने आज आपका वो कमेंट भी पढ़ा जिसमे अपने कहा की “मैं पहले केक काटा करता था, लेकिन अब वह केक काटने के पक्ष में नहीं है। ‘हमने केक की प्रथा जो है, उसको बंद करवाने कहा है, क्योंकि हमें पता नहीं है कि ये केक क्यों लाया जाता है? केक ही क्यों लाया जाता है? उस पर मोमबत्ती क्यों लगाई जाती है? उसे जलाया क्यों जाता है? जलाने के बाद कहते हैं, इसको फूंक कर बुझा दो। बुझाने के बाद एक कत्लनुमा चाकू आ जाता है, फिर उसको काटकर फांके बनाइए। फिर वो फांक जो है वो किसी को खिलाइए और अब एक नई प्रथा शुरू हो गई है कि जब सब कांड हो जाता है तो एक और कांड होता है कि केक लेकर पोत देते हैं। क्यों होता है ये सब, हमारी समझ में नहीं आता।’

वैसे मेरी समझ में भी बहुत कुछ नही आया .. पहले मैं आपको अन्धो की तरह प्यार करता था .. यूं कहें अंधविश्वास करता था लेकिन कहते है ‘इकबाल देर से आता है ..’ इसीलिए यह बात जो आपने केक काटने को लेकर कही अगर यह कुप्रथा है तो पेड़ से ऐश्वर्या का विवाह क्या था ..?

मैंने आपका वो खत भी पढ़ा जिसमे आपने अपनी नातिन नव्या को अपनी मनमर्जी से ज़िन्दगी गुज़ारने को लेकर खुला ख़त लिखा था …बहुत अच्छा है की देश की महिलायें आत्मनिर्भर हो लेकिन क्या मिस वर्ल्ड रही आपकी बहु ऐश्वर्या ने अपनी मर्ज़ी से पेड़ से विवाह किया था ..?

एक तरफ तो आप आधुनिकता की बात करते है वहीँ दूसरी तरह मांगलिक होने के कारण पेड़ से विवाह कराते है

मुझे 90 के दशक की वो फ़िल्में याद आ रही है जिनमे ठाकुर की बेटी तो गाँव में जीन्स और स्कर्ट में घुमती है लेकिन ठाकुर को बहु सर पर पल्लू रखने वाली चाहिए .. सास बहु को संस्कार सिखाती है और अपनी बेटी को टेनिस का रैकेट थमाती हुई नज़र आती है …

बहुत कन्फ्यूज़न है .. शायद आज आप सपनो में आओ और मेरी समस्याओं का हल करो …

आपका एक चहेता
1987 – जीवित 

 


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