कुडालकोर से 80 किमी दूर एक गांव। इस गांव में रह रही है 21 साल की वह बिन ब्याही मां, जिसकी छह साल की एक बच्ची है। पिछले चार दिनों से इसकी जिंदगी का सन्नाटा भी इससे छिन चुका है। उस एक कमरे में गुस्सा और निराशा ही उसके साथी हैं जिसे वह घर कहती है। यह वही लड़की है, जिसका 14 साल की उम्र में रेप हो गया था। जेल में सजा काट रहे रेपिस्ट ने जब अपनी रिहाई की अपील की, तो मद्रास हाई कोर्ट के जज डी. देवदास ने उसे पीड़िता लड़की से मिलने और उसके साथ समझौता करने के लिए कह दिया।

पीड़िता का कहना है, ‘क्या जज ने एक बार भी सोचा कि इन सालों में मैं किस दर्द से गुजरी हूं। रेप के बाद मुझे एक बच्ची हुई और अब उनका एक फैसला मुझे फिर से वही सब दर्द महसूस करने पर मजबूर कर रहा है।’ 2008 में जब पीड़िता का रेप हुआ तो वह 14 साल की थी। अपराधी वी. मोहन को सात साल जेल और दो लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई थी।

इस अपराधी को सुलह की सलाह देने के पीछे कारण यह दिया गया कि पश्चिमी देशों में इस तरह से समझौते के कई मामले सामने आ रहे हैं। जस्टिस देवदास के मुताबिक ऐसी परिस्थितियों में समझौता करना सबसे आसान और अच्छा तरीका है, लेकिन पीड़िता का कहना है कि वह उस रेपिस्ट के साथ कभी और किसी हाल में समझौता नहीं करेगी।

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए पीड़िता ने कहा, ‘मैं पूरी जिंदगी इससे लड़ूंगी। मैं अपनी बेटी को बताऊंगी कि सर्वाइव करने के लिए मैंने किस तरह संघर्ष किया। अगर मैंने समझौता कर लिया तो एक दिन मेरी बच्ची मुझसे सवाल करेगी कि मैंने इसके लिए कितना पैसा लिया था। पीड़िता के मुताबिक, ‘हो सकता है कि मुझे कुछ मिल भी जाए, लेकिन एक रेपिस्ट की बेटी के तौर पर बड़ी हुई मेरी बेटी का भविष्य क्या होगा। एक दिन उसे अहसास होगा कि उसकी मां ने उसके लिए संघर्ष किया। वह इसका मतलब समझेगी और एक अच्छी इंसान बनेगी।’

पीड़िता 2008 की वह दोपहर कभी नहीं भूल सकती। दो दिन पहले उसने दसवीं के एग्जाम दिए थे और उसका रेप हो गया। अपनी कहानी बताते हुए पीड़िता ने कहा, ‘उसने कोल्ड ड्रिंक में ड्रग्स मिलाकर मेरे साथ रेप किया था। हम एक-दूसरे को जानते थे। जब मैंने अपने पिता को इसका बारे में बताया तो उसने मेरे पिता को धमकाया। उसने (रेपिस्ट) मुझ पर अबॉर्शन का दबाव डाला। डीएनए रिपोर्ट ना आने तक वह हर चीज नकारता रहा। बाद में डीएनए रिपोर्ट की वजह से ही उसे सजा मिली।’

पीड़िता के भाग्य में रेप की त्रासदी के अलावा भी बहुत कुछ भुगतना लिखा था। इंडियन एक्सप्रेस को उसने बताया, ‘पूरे गांव ने हमारा बहिष्कार कर दिया। हमारे रिश्तेदारों और दोस्तों ने हमसे बात करना बंद कर दिया। मेरे माता-पिता पर हमला हुआ। आखिरकार मैंने एक बच्चे को जन्म दिया। अब वह छह साल की है। इन सालों में मैं बिल्कुल अकेली थी। अब मेरा भाई मेरा खर्चा उठाता है। जज का ऐसा फैसला देना गलत है। वह भूल गए कि मैं पीड़िता हूं। सात साल सब कुछ झेलने के बाद वह चाहते हैं कि मैं रेपिस्ट से शादी कर लूं। वह सिर्फ जेल से निकलने के लिए मुझसे समझौता करना चाहता है।’

पीड़िता ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘यहां रह रहे जिन लोगों ने मेरी दुर्दशा देखी है, वही बता सकते हैं कि मैं किन चीजों से गुजरी हूं। पैसे बनाने के कई तरीके हैं, लेकिन आप सम्मान नहीं खरीद सकते। मेरी राय जाने बिना जज ऐसा आदेश कैसे दे सकते हैं। मैं उसके साथ जिंदगी कैसे बिता सकती हूं। मैं टॉप जज से यह आदेश रद्द करने का आग्रह करती हूं।’

पीड़िता का दर्द उसके इस बयान में साफ झलकता है, ‘एक दिन मैं अपनी बेटी को बताऊंगी कि वह कौन है। जब भी वह मुझसे अपने पिता के बारे में पूछेगी, मैं कहूंगी कि उसका कोई पिता नहीं है। जब वह सब कुछ समझने लायक हो जाएगी, तब मैं उसे बताऊंगी कि उसका पिता एक रेपिस्ट था।’


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