शिक्षा राज्यमंत्री के ठीक-ठीक शब्द ये थे – “अगर आज हम संघर्ष शुरू नहीं करते हैं तो कल दूसरा खो देंगे। दूसरा जाने से पहले ये हत्यारे ही चले जाएँ, ऐसी ताकत हमें दिखानी होगी

संसद में गृहमंत्री ने कहा कि आगरा में शिक्षा राज्यमंत्री के विवादग्रस्त भाषण की सीडी उन्होंने और उनके अधिकारियों ने खुद सुन ली है, उसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है। क्या उन्होंने कन्हैया के भाषणों की सीडी भी सुनी है ? कुछ आपत्तिजनक पाया? नहीं, तो उसे उनकी पुलिस ने क्यों उठाया? जमानत तक न मिले, इसके लिए जमीन-आसमान एक कर दिया। वे कहते हैं, कन्हैया ने न सही उसकी मौजूदगी में और लोगों ने नारे लगाए होंगे। अगर वाकई लगाए तो उन्हें आपकी पुलिस पहचान और पकड़ क्यों नहीं पा रही?

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सच्चाई यह है कि शिक्षा राज्यमंत्री के ठीक-ठीक शब्द ये थे – “अगर आज हम संघर्ष शुरू नहीं करते हैं तो कल दूसरा खो देंगे। दूसरा जाने से पहले ये हत्यारे ही चले जाएँ, ऐसी ताकत हमें दिखानी होगी।” दूसरा कौन? हत्यारे कौन? जिक्र नहीं है इसलिए आपने दे दी क्लीन चिट, वरना लोगों को सीडी सुनवाकर सर्वे कर लिया होता तो साफ पता चल जाता कि हिन्दू कहाँ सुनने में आता है, मुसलमान कहाँ।

मंत्री को लाभ देना चाहें तो भले दें, मगर उसी आयोजन में भाजपा के बाकी नेता भी तो थे, उनके भाषण सुने सरकार ने? …

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भाजपा सांसद: “अगर आपको हिन्दुओं की ताकत देखनी है तो एक तारीख तय करें और मुसलमानों को सबक सिखा दें।”
भाजपा एमएलए: “आपको गोलियां दागनी होंगी, राइफलें उठानी होंगी, चाकू चलाने होंगे। 2017 में चुनाव होने वाले हैं, अपनी ताकत दिखाना शुरू कीजिए।”
एक अन्य भाजपा नेता: “छापा मारो, बुरक़ा पहनो, लेकिन इन्हें घेर-घेर कर ले आओ। एक सर के बदले दस सर काट लो।”

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समझने वाले समझ रहे हैं, देख रहे हैं राजनाथजी। कैसे अपने लोग सबूतों के बावजूद बचाए जाते हैं और ‘दुश्मन’ बेगुनाह (जेएनयू ताजा उदहारण) फंसाए जाते हैं। जनता इस मामले के किसके साथ है, क्या अब भी समझ नहीं पड़ता?

(वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी के फेसबुक वॉल से साभार, ये लेखक के निजी विचार है)


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