अगर देशद्रोह कहीं है तो उन नेताओं के आचरण में है जो देश के नागरिकों की हत्या का सरेआम आह्वान कर समाज में हिंसा, विद्वेष और सांप्रदायिकता का माहौल बनाते हैं।

क्या प्रधानमंत्री ने अब तक अपने उस मंत्री (क्या निराला महकमा दिया है – शिक्षा का!) से जवाबतलबी की है जिसने आगरा में कहा कि दूसरा (साथी मारे) जाने से पहले ये हत्यारे ही “चले” जाएँ, ऐसी ताकत हमें दिखानी होगी।

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शायद पहली बार एक केंद्रीय मंत्री की मौजूदगी में सार्वजनिक मंच से हिन्दुओं की ताकत अल्पसंख्यक बेगुनाहों को ‘सबक’ सिखाने में जाहिर की गई है; यहाँ तक कहा गया कि एक सर के बदले दस सर काट लाए जाएँ। पाकिस्तान से ला न सके तो अपने सही?

यह घटना मामूली नहीं, मोदीजी। जिन्होंने नारे नहीं लगाए, वे देशद्रोही करार दिए गए हैं, जेल में हैं – और देश के नागरिकों के नाम सरेआम हत्या के इरादे जाहिर करने वाले महफूज हैं। यह कहाँ का न्याय हुआ?

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– ओम थानवी


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