क्या यह हैरत और चिंतन करने की बात नहीं है कि इस्लामफोबिया के शिकार जिस समाज को मुस्लिम मर्दों की दाढ़ी और टोपी से डर लगता था , उसको अब औरतों के बुर्के से भी डर लगने लगा है.

hijab

पहले यह डर पश्चिमी समाज में पैदा हुआ और यूरोप के अधिकांश देशों ने बुर्के पर प्रतिबन्ध लगाने शुरू कर दिए .
चूँकि हमारे देश में ” इम्पोर्टेड ” माल को बहुत उच्च कोटि का समझा जाता है , इसलिए इस ” इम्पोर्टेड” विचार को भी बहुत जल्दी भारत में प्रवेश मिल गया कि बुर्का औरत की गुलामी की निशानी है और पश्चिमी देशों कि तरह यहां की औरतों को भी बुर्के से आज़ाद कर देना चाहिए. देखा गया है कि पश्चिमी देशों में कोई मर्द यदि धर्म-परिवर्तन कर के इस्लाम कुबूल करता है तो वह उतनी जल्दी दाढ़ी नहीं रख लेता, जितनी जल्दी वहां की एक औरत इस्लाम कुबूल करने के बाद बुर्का पहन लेती है.

आखिर क्या जादू है इस बुर्के में कि जो बुर्का गुलामी का प्रतीक बताया जाता है, पढ़ीलिखी पश्चिमी महिलाएं गुलाम बनने के लिए इतनी उतावली हो जाती हैं ???. 1988 में इस्लाम कुबूल करने वाली एक इसाई महिला हस्सना कहती है: “बुर्के से हम खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं और इससे हमारेआत्मविश्वास में इजाफा होता है.”

एक हब्शी मुस्लिम महिला , जिनके समाज में लड़कियों को बिन ब्याही माँ बनाकर भाग जाने का चलन पुरुषों ने अपनाया हुआ है , कहती हैं – ‘बुर्का पहन कर हम यह साबित करती हैं कि हम सिर्फ सेक्स-ऑब्जेक्ट नहीं , बल्कि एक इज्ज़तदार औरत हैं.

एक वाक्य में कहूँ तो यही कहूँगा कि बुर्के ने पश्चिमी सलीबी समाज के सामने एक ” सांस्कृतिक चुनौती” पेश कर दी है , जिसका जवाब देने के लिए पश्चिम के पास कपडे ही नहीं हैं.

सांस्कृतिक पराजय की यह हताशा और कुंठा पश्चिम और उसके नेता अमेरिका को बार-बार इस्लाम और इस्लामी देशों पर हमले करने के लिए उकसाती है. सभ्यताओं के संघर्ष में अपनी संभावित हार से आशंकित और भयभीत पश्चिमी समाज कितना बर्बर और असहिष्णु होता जा रहा है , बुर्के पर प्रतिबन्ध लगाना इसका ज्वलंत सबूत है.

अगर भारत में भी कुछ लोगों ने बुर्के के खिलाफ माहौल बनाने की मंशा जता दी है तो समझ लेना चाहिए कि यहाँ भी पश्चिम का डर पहुँच चूका है और उन्हें लगने लगा है कि पश्चिम की तरह इस्लाम यहाँ भी उन्हें और उनके धर्मों को भविष्य में चुनौती देने की स्थिति में आ गया है.

जो लोग कहते हैंकि बुर्का पहनने से सेकुलरिज्म कमज़ोर होता है , उन्हें इस सवाल का जवाब ज़रूर देना चाहिए कि क्या नंगा घूमने से सेकुलरिज्म मज़बूत होता है ???

  • मोहम्मद आरिफ दगिया

लाइक करें :-


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें

Facebook Comment

Related Posts

loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें