नवेद चौधरी
नवेद चौधरी

बलूचिस्तानी Pm मोदी से मदद चाहते हैं,वे पाकिस्तानी आज़ादी चाहते हैं.उनके साथ पाकिस्तानी सरकार बर्बरता से पेश आती है..उनको पाकिस्तान से आज़ादी मांगते हैं..उससे सत्ता में बैठी संघी सरकार इतनी गदगद है की फुले नही समा रहे हैं.बलूचिस्तान की भारतीय सरकार और उनके नेताओ को साथ ही भक्तों को इतनी फ़िक्र है की पिछले दिनों सोशल मीडिया से लेकर भांड मीडिया तक यही आलाप किया जा रहा है की बलूचिस्तान से मदद की अपील मोदी के पास आई है.

पाकिस्तानी सरकार को भी अपने मुल्क के सूबों में क्या चल रहा उसे उसकी फ़िक्र नही लेकिन भारत और कश्मीर में क्या हो रहा है उसकी पल पल पर नज़र है,पाकिस्तान को चाहिए की बहारी कश्मीर के मुद्दे को तरफ कर के पहले अपने अंदरूनी मुद्दे सुलझाए ठीक उस ही तरह भारतीय सरकार को बलूचिस्तान की फ़िक्र इतनी नही करनी चाहिए वो पाकिस्तान का अंदरूनी मामला है और मोदी को पहले अपने देश के अंदरूनी मसले सुलझाने चाहिए,ये पाकिस्तान की नाकामी है की उसके सूबे के लोग दुसरे देश से मदद मांग रहें हैं,कश्मीर के मुद्दे को मसला बना दिया गया है ठीक उस ही तरह जिस तरह भारत में गाय को मुद्दा बनाया है.

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खैर मदद तो अभी तक पोह्ची नही लेकिन जुमले पोहचे या नही पोहचे उस पर अभी असमंजस की स्तिथि है..संघियों की पाकिस्तान में बैठे उन विदेशियों की चिंता सता रही है लेकिन अपने देश के कश्मीर की ज़रा भी फ़िक्र नही है,पिछले 40 दिनों से वहां कर्फ़ियु लगा हुआ है,कश्मीरी रोज़ मरराह की चीज़ों के लिए तड़प रहें हैं.. पेलेट गोलियों से ज़ख़्मी कश्मीरी हस्पतालों में अभी तक पड़े हैं.ये एक अच्छा मौक़ा था भारतीय सरकार के पास की कश्मीरियों के ज़ख्मों पर मरहम लगाते तो क्या पता कुछ भटके हुए कश्मीरी वापस हमारे साथ आजाते लेकिन भारतीय सरकार ने यह मौक़ा भी खो दिया उन्हें अपने देश की फ़िक्र नही दुसरे देश की चिंता सता रही है..सोचने वाली बात ये है की जिस तरह बलुचों ने भारतीय सरकार से मदद मांगी है अगर ऐसी ही मदद कोई कश्मीरी मांग लेता है तो यह भारतीय सरकार पर काला धब्बा होगा.

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कश्मीरियों पर अब भी ज़ियात्तियां कम नही हो रहीं हैं कल ही एक लेक्चरार को सेना द्वारा बेरहमी से पीट पीटकर मौत के घाट उतार दिया गया है.ऐसे कभी हम कश्मीरियों के दिल में जगह नही बना सकते ऐसे कभी हम उनको अपना नही बना सकते ऐसे तो बिलकुल भी उन भटकों को वापस अपने पास नही बुला सकते है,कश्मीरियों का दर्द जानकार ही हम उसपर मरहम लगा सकते हैं वरना कश्मीरी हमेशा अलगाव वादी ही रहेंगे..
सोचना पड़ेगा अब सरकार जी सोचना पड़ेगा..

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-लेखक समाजिक कार्यकर्ता एंव टिप्पणीकार हैं।


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