nazia ilahi khan

अधिवका नाज़िया इलाही खान

‘महिलाओं का दिन’ सुन कर बड़ा अजीब लगता है। क्या हर दिन केवल पुरुषों का है, महिलाओं को नहीं ? परुष बहुल समाज में महिलाओं का एक दिन निश्चित कर के संभवतया यह बताने की चेष्टा की गई है की प्रकृति की यह रचना अभी पूरी नहीं हुयी है इसे कुंदन बनाने के लिए ना जाने कितनी भट्टियों में झोंका जाएगा,  निखार लाया  जाएगा तब उसे पुरुषों के बराबर होने का ‘श्रेय’ प्राप्त हो सकता है।

लेकिन समाज को अब यह समझ लेना चाहिए कि युग ने करवट ले ली है आज की नारी पुरुषों से किसी मामले में पीछे नहीं है एक समय था जब महिला को “अबला”  कह कर पुकारा जाता था और “अज्ञानी बुद्धिजीवी” इसे “नरक का द्वार” और अभिमानी पुरुष “पैरों की जूती” कह कर अस्वीकार करते थे परन्तु  अब समय बदल गया है। आज नारी ना तो अबला है और ना ही उसे पैरों की जूती कहा जा सकता है । सभी बाधाओं, पूर्वाग्रह और भेदभाव के बावजूद आज महिलाएं राजनीति, प्रशासन, समाज, संगीत, खेल, फिल्म, साहित्य, शिक्षा, विज्ञान, अंतरिक्ष सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं, हिम्मत एवं दृढ़ता के साथ आरोप सहते हुए गलियां सुनते हुए   आज जीवन के युद्ध क्षेत्र  में अपने आँचल को धवज की भाँती प्रयोग कर रही हैं सेना, वायु सेना, पुलिस, आई टी, इंजीनियरिंग, चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में नित नई उदाहरण  स्थापित कर रही हैं।
सदियों से समाज ने स्त्री को आदर्शों की परंपरागत घुट्टी पिलाकर उसके दिमाग को कुंद करने का काम किया, मगर औरत आज कल्पना चावला, सुनीता विलियम्स, पीटी उषा, किरण बेदी, कंचन चौधरी भट्टाचार्य, वंदना शिवा, चंदा कोचर, सुषमा मुखोपाध्याय, कप्तान दुर्गा बनर्जी, लीफटीनटनट जनरल पुनीत अरोड़ा, साइना नेहवाल, निरुपमा राऊ, कृष्णा पूनिया, ऐरोम शर्मीला, मेघा पाटेकर, अरुणा राय, जैसी शक्ति बनकर समाज को नई दिशा दिखा रही है और विश्व स्तर पर नाम रोशन कर रही हैं। महिला शिक्षा और प्रशिक्षण और व्यक्तित्व विकास के क्षितिज दिनों दिन खुलते जा रहे हैं, नए नए क्षेत्र का विस्तार हो रहा है। हाल के वर्षों में महिलाओं ने जीवन के हर क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास है, अतीत के बीते तीन दशकों में, महिलाओं ने कॉर्पोरेट दुनिया में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त  की है, सामाजिक नैतिकता के प्रतिबंध से गुजरते हुए घर और कार्यस्थल पर स्वयं को सफल व्यापार और प्रशासन के रूप में स्थापित किया है। भारत में भी महिला व्यावसायिक वर्ग ने नए कारोबार आरम्भ  करने और उन्हें सफलतापूर्वक चलाने का कई उदाहरण दिया है।
 
भारत में सफल महिला उद्यमियों के कई उदाहरण मिलते हैं जैसे राधा भाटिया (अध्यक्ष, बर्ड समूह), रानी श्रीनिवासन (अध्यक्ष और सीईओ, टरैक्टरस एंड फार्म इक्विपमेंट्स), प्रिया पॉल (अध्यक्ष, ए जी पार्क होटल) , शहनाज़ हुसैन ( सीईओ, शहनाज हरबलस इंक), एकता कपूर (संयुक्त प्रबंध निदेशक, बालाजी टेली फिल्म्स) और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में सबसे अधिक स्थान प्राप्त करने वाली महिलाओं जैसे इंदिरा कृष्णमूर्ति (अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पेप्सी), नेनालाल किदवई (समूह महाप्रबंधक और कंट्री हेड, एच एस बी सी इंडिया), चन्दराकोचर (सीईओ और प्रबंध निदेशक आई सी आई सी बैंक) यह वह नाम हैं जिन्होंने महिला होने के बावजूद नेतृत्व और क्षमता की अद्वितीय उदाहरण दिया है।
 
कभी अरस्तू ने कहा था कि ‘औरतें कुछ सुविधाओं के अभाव के कारण महिलाएं हैं मगर वर्तमान परिप्रेक्ष्य में ऐसे सभी सतही नियम और शर्तों का कोई मतलब नहीं रह गया और महिला अपनी क्षमता के दम पर अपना आप साबित कर रही है आज अगर औरत आगे बढ़ना चाहती है तो उसके प्राकृतिक अधिकारों का हनन क्यों किया  जा रही है। आज भी समाज में बेटी पैदा होने पर नाक भौं चढ़ाया जाता है, कुछ माता पिता अब भी बेटे-बेटियों में अंतर करते हैं। आखिर क्यों ? क्या केवल उसे यह एहसास करने के लिये कि वह स्त्री है वही औरत जिसे अबला से लेकर नरक का द्वार बताया गया, आज भी गली कूचा मैं में होने वाले महिलाओं के अपमान की सैकड़ों घटनाएँ महिलाओं के साथ भेदभाव एवं  उन को अपमानित करने की खुली कथा सुनाती हैं, ऐसे में महिलाओं का एक दिन मनाकर हम क्या बताना चाहते हैं ?
 
जब तक समाज  इस दोहरे भूमिका से ऊपर नहीं उठेगा, तब तक महिला की स्वतंत्रता अधूरी है। सही मायने में महिला दिवस का उद्देश्य तभी पूरा होगा जब महिलाओं को शारीरिक, मानसिक, वैचारिक रूप से पूर्ण स्वतंत्रता मिलेगी, जहां उन्हें कोई परेशान नहीं करेगा, जहां भ्रूण हत्या नहीं कि जाएगी, जहां बलात्कार नहीं किया जाएगा जहां दहेज के लालच में महिला को सरेआम जिंदा नहीं जलाया जाएगा, जहां इसे बेचा नहीं जायेगा, समाज के हर महत्वपूर्ण निर्णय में उनके दृष्टिकोण को समझा जाएगा । आवश्यकता समाज में वह जुनून पैदा करने की है जहां सिर उठा कर हर औरत अपने महिला होने पर गर्व करे, ना  कि पश्चाताप कि काश मैं लड़का होती !!
अधिवका नाज़िया इलाही खान, कोल्कता
अधिवका उच्चय न्यालय कलकत्ता एवं सर्वोच्च न्यायालय, दिल्ली

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