झारखण्ड मे आज़ाद और मज़लूम का जिस तरह से क़त्ल किया गया है उस से एक बात साफ़ हो गई है ,अब देश मे आज़ादी और मज़्लूमियत को भी खतरा हो गया है | आज़ाद को कैसा आज़ाद था की उसे अपने जानवर हांकने की भी आज़ादी नहीं है,मज़लूम अब अपनी मज़्लूमियत का क्या हिसाब मांगे वो तो अबलाश मे बदल चूका है. लाश गवाही कैसे दे ? अपने क़ातिलों का पता कैसे बताए?अब कोई इब्ने मरयम कहासे लाये जो मुर्दे मे रूह लौटाए? फिर मुर्दा तो मुर्दा तो मुर्दा है मगर क्या क़ानून के रखवालो के दिल भी मुर्दा होगया है?जिस तरह से आज़ाद और मज़लूम का क़त्ल किया गया वो भाजपा की झारखण्ड मे हुकूमत बनने केबाद से ही लोगो अहसास हो गया था|

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मोदी हुकूमत पर इन बातों का फ़र्क़ पड़ता है की नहीं ये सोचने की बात है की जब उनके मंत्रिमंडल मे ऐसे भीमंत्री हैं जो इंसान के मरने पर नहीं बोलतीं मगर कुत्ते के मरने पर ज़रूर बोलतीं हैं | उनसे किसी केमरने पर बुलवाने मरने वाला इंसान का नहीं बल्कि कुत्ते का बच्चा होना चाहिए |अब आगे कुछ क्या कहना|

लेकिन अब ये सोचना है की देश मे अल्प संख्यक को क्या एक सोची समझी साज़िश के तहत उन्हें रोज़गार से दूर किया जा रहा है ? नौकरीओ से कांग्रेस के शाशनकाल मे बहुत प्यार से दूर कर दिया गया| जब भी जहाँभी अल्प संख्यक जब तरक़्क़ी करने लगता है उस को तबाह कर दिया जाता है | पहले बुनाई के का काम ज़यादातर मुसलमानो के हाथ मे था | उसको धीरे धीरे खत्म कर दिया गया | आजमगढ़ के मुस्लमान जब तरक़्क़ी करने लगे तो उसे आतंकवाद का अड्डा साबित करने की कोशिश की गई |उसी तरह मऊ , संभल , मेवात , मुस्लिम बाहुल्य एरिया मे आतंकवादी निकले जाने लगे |निशाना साफ़ है की इनके मनोबल को तोको तोड़ो | इसके बाद अब जानवरो का व्यापार कर के अपनी जीविका कमा रहे हैं उन्हें अब बीफ के नाम पर प्रताड़ित किया जा रहा है |

अब इन अपराधिओं के हौसले इतने बढ़ गए हैं की पहले हंगामा करते थे अब सीधे अपना काम कर के निकल जाते हैं|मंशा साफ़ है की अब रोज़गार भी नहीं करने देंगे |

साभार: बख्तियार यावर muslimissues.com के लिए


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