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जावेद अख्तर नास्तिक हैं। उन्होंने इंडिया टुडे के पिछले प्रोग्रॉम में खुद को नास्तिक कहते हुए पूरा भाषण दिया था। राज्यसभा में उन्होंने भारत माता की जय कह दिया। तो मैं क्यों कहूं भारत माता की जय?

मैं मुसलमान हूं और इस्लाम मुझे एक ईश्वर के अलावा किसी और की जय की इज़ाजत नहीं देता। मैं वतन के लिए जान भी दे सकता हूं पर इसकी मूर्ति की कल्पना करते हुए जयकारे नहीं लगा सकता।

आप चाहें तो खूब ज़ोर से और लाउडस्पीकर लगा कर भारत माता की जय करें मुझे कभी कोई आपत्ति नहीं होगी। मैं नारे तकबीर अल्लाहू अकबर कहते हुए वतन की तरफ से लड़ूंगा। आप भारत माता कहते हुए लड़िएगा। कोई परेशानी? हुई परेशानी? अगर हो रही है तो आप निरा जाहिल और घोर कम्यूनल इंसान हैं। और आपका यह नारा सिर्फ मुसलमानों को अपमानित और उनके दमन के लिए है।

भारत अल्लाह पाक है?

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कभी सुना आपने किसी नेता के मुंह से यह? है कोई संगठन जो डालता हो दबाव आप पर ऐसा कहने के लिए? नहीं न।

तो फिर भारत माता कहने पर क्यों मजबूर कर रहे हैं?

आपको पसंद है भारत माता कहना तो कहिए। हम फौज में दो फीसदी से भी कम हैं। कारगिल की लड़ाई हो या फिर 65 और 71 की जंग। मुसलमान फौजियों ने नारे तकबीर अल्लाहू अकबर और या अली कहते हुए गोलियां खाई हैं। पढ़िए उस वक्त के वॉर की कहानियां। पूछिए कोई फौज में हो तो। धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र में पहले से ही उद्घाटन समारोह में नारियल फोड़े जा रहे हैं , पंडित जी से हवन करवाए जा रहे हैं। अब देशभक्ति के लिए तो कोई एक क्राइटेरिया न थोपिए।

हमने कभी कहा कि टोपी लगा कर चलिए? बोलिए। कभी दी धमकी कि कहो अल्लाह महान है। फिर भारत के साथ माता वाला कॉन्सेप्ट हमारे पर तो लागू मत कीजिए। प्लीज़।

विचारों को दीजिये महत्व

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मैं ओवैसी को पसंद नहीं करता। रत्ती भर भी नहीं। उनके बजाए मैं बदरूद्दीन अजमल के राजनैतिक संघर्ष को ज्यादा महत्व देता हूं।

कल को मोहन भागवत कह दें कि मुसलमान नमाज़ पढ़ना बंद कर दें। ओवैसी जवाब में कह दें ,गले पर छुरी भी रख दोगे तो ये बात नहीं मानेंगे।

तो ऐसे मैं उन मुसलमानों और डेमोक्रेटिक उदारवादी हिंदुओं को क्या स्टैंड लेना होगा जो ओवैसी को पसंद नहीं करते?

ज़ाहिर सी बात है ओवैसी की बात से सहमत होंगे, अब भले ओवैसी न पसंद हो।

ठीक ऐसे ही भारत माता वाली बात है। नौनिहाल फेसबुकिया विमर्शवादियों, यह आज का मुद्दा नहीं है। हमेशा का रहा है। पुराने पन्ने खंगाल कर वर्तमान में हो रहे विमर्शों पर राय रखना सीखिए। बाकि तो जो है सो हैइये है।

मोहम्मद अनस 

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मोहम्मद अनस – लेखक जाने माने पत्रकार और समाजसेवी है

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