केजरीवाल सरकार द्वारा बहुप्रतीक्षित फार्मूला #odd-Even का आज आगाज़ कर दिया जैसा की अनुमान लगाया जा रहा था सडको को काफी कम मात्र में चौपहिया वाहन नज़र आये, काफी लोगो को आज ये पता चला की दिल्ली की सड़कें कितनी चौड़ी है वैसे अधिकतर भीड़ बस और मेट्रो स्टेशन पर देखने को मिली, जिन लोगो ने दिल्ली सरकार के इस फोर्मुले को मज़ाक समझा उन्हें चालान द्वारा इसकी गंभीरता को समझने का मौका मिला अगर इसी तरह सड़कों पर वहां की संख्या कम होती गयी तो ज़ाहिर सी बात है दिल्ली में निवासियो को गला घोटू प्रदूषण से छुटकारा मिल जायेगा.

चूँकि odd even फोर्मुले को लेकर मीडिया में पहले से काफी खलबली मची हुई थी और प्रत्येक मुख्य मीडिया चंनल का संवाददाता माइक और कैमरा के साथ दिल्ली की सड़कों पर घूमते नज़र आये, प्रदूषण से अधिक मीडिया को ये जानने की दिलचस्पी थी के लोगो में इस फोर्मुले को लेकर कितना अधिक आक्रोश है

चूँकि odd even एक ऐसा फार्मूला है जिसका नतीजा एकदम नही आ सकता, जिस तरह दिल्ली में प्रदूषण की मात्रा यकायक नही बढ़ी इसे जानलेवा स्तर पर पहुँचने में कई दशक लगे है उसी तरह अगर ये कहा जाए की एक दिन सड़कों पर गाड़ियों की संख्या कम कर देने से अचानक से दिल्ली की हवा मसूरी जैसी हो जाएगी तो ये सिर्फ एक मज़ाक से अधिक और कुछ ना होगा

वहीँ देश के कुछ जाने माने अखबार तथा मीडिया चैनल दिन भर दिल्ली की सड़कों पर प्रदूषण का स्तर जानने की कोशिश करते नज़र आये और शाम होते होते उन्होंने पूर्वाग्रह से ग्रसित खबर को काफी रोचक अंदाज़ में पेश कर दिया

देश के एक जाने माने टीवी ने तो मात्र ढाई घंटे में बता दिया था की दिल्ली में प्रदूषण का स्तर कम नही हुआ है और केजरीवाल की ये स्कीम फेल हो गयी है इन सबका का ज़िक्र हम बाद में करेंगे लेकिन मेरा एक सवाल तमाम मीडिया वालो से है है “जब आपको बुखार आता है और दवाई लेने डॉक्टर के पास जाते हो तो क्या डॉक्टर के क्लिनिक से बाहर आते ही आप ठीक हो जाते हो और अगर ठीक नही होते तो क्या डॉक्टर से लड़-झपटते हो ” डॉक्टर यही कहेगा के कुछ दिन दवाई लेकर देखो तभी आराम मिलेगा , लेकिन हमारी मीडिया के पास इतना समय नही है की वो बिमारी के ठीक होने का इंतज़ार करे ना ही वो मेडिसिन खाकर देखना चाहते है , उन्हें बस जल्दी ये है की डॉक्टर बोले ठीक तो बन्दा दोड़े घोड़े की स्पीड.

ठीक ऐसा ही नज़ारा आज तमाम मीडिया चैनल और अखबारों में देखने को मिल रहा है जिन्हें ये नही देखना है की आखिर इसमें फायदा किसका है उन्हें बस ये चाहिए की दिल्ली में बर्फ गिर जाये

देखिये आखिर किस तरह केजरीवाल सरकार की आलोचना में कसीदे गड़े जा रहे है, नीचे देखिये मात्र एक दिन में हवा कितनी घातक है शायद ये बताया जा रहा है इंडिया टीवी द्वारा

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देश के मशहूर अखबार नवभारत टाइम ने भी आलोचना करने में कोई कसर बाकी नही छोड़ी मात्र एक ही दिन में odd even का रिजल्ट लेकर जनता के सामने पहुँच गये, किसी बच्चे को एक कक्षा पास करने में भी एक साल लगता है लेकिन NBT को इतना इन्तेजार शायद गवारा नही है

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आजतक ने दूसरी मीडिया से एक कदम आगे बढ़ते हुए केजरीवाल को ही फेल या पास करवा दिया , गौर कीजिये कहीं भी odd-even का ज़िक्र तक नही किया गया बस ये जल्दी है की लोग केजरीवाल के बारे में नकारात्मक द्रष्टिकोण रखे.गौरतलब है की हाई कोर्ट से लेकर राष्ट्रपति तक ने इस फोर्मुले को उचित बताया है लेकिन ……

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टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने बता दिया की आखिर क्यों वो दुनिया में सबसे अधिक पढ़ा जाने वाला भारतीय अखबार है शायद में सडको पर दौड़ती गाडियों से गुलाब जल निकलने की उम्मीद लगाये बैठा था

आप सब लोगो ने रंग दे बसंती फिल्म ज़रूर देखि होगी जिसमे एक डायलॉग था की कोई भी देश परफेक्ट नही होता उसे परफेक्ट बनाने के लिए हमे मिलकर पहल करनी होती है काश को ये बात मीडिया को भी बता दे, वैसे अरविन्द केजरीवाल पहले ऐसे मुख्यमंत्री है जिन्होंने अपने वोट बैंक की परवाह ना करते हुए एक ऐसा फार्मूला प्रयोग किया जो की खुद उनके लिए मुश्किल पैदा कर सकता है, आखिर ये प्रदूषण कौन करता है और प्रदूषण कम होने से किसे फायदा होगा .. एक ही जवाब है “हमें ” स्कूल, ऑफिस टाइम से पहुंचेंगे , सड़कों की धुल नही खानी पड़ेगी , एक्सीडेंट में कमी आएगी और ना जाने कितने फायदें है. मीडिया को जिस समय लोगो को इसके फायदें बताने चाहिए उस समय वो केजरीवाल को गिराने में लगे है क्या ये उचित नही होगा की अपना पूर्वग्रसित मानसिकता छोडकर मात्र 15 दिनों के लिए हम इसका समर्थन करें


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