इस पूरी धरती पर अगर कोई हुक्मरान इस वक़्त “इलान कुर्दी” की तुर्क तट पड़ी लाश से शर्मिंदा नहीं हैं तो वो सिर्फ दो हैं। एक तुर्की राष्ट्रपति “रजब तैय्यब अरदगान” और दूसरी हैं जर्मन चांसलर “एंजला मोर्कल” रजब तैय्यब ने तो सीरिया संकट की शरुआत में ही तुर्की के दरवाज़े विस्थापितों के लिए खोल दिए थे जबकि एंजला मोर्केल पिछले माह से ही ठोस क़दम उठाती दिख रही हैं।

ये वही एंजला मोर्कल हैं जो जर्मनी मुसलामानों के खिलाफ ईसाई कट्टरपंथियों के आंदोलन के मोक़ाबिल जर्मन मुसलामानों की रैली में जा खड़ी हुई और साफ़ साफ़ ऐलान कर दिया की इस्लाम जर्मनी का हिस्सा है। ऐसे वक़्त में जब पूरे यूरोप में इस्लाम और मुसलमानों के हक़ में गर्म हवाएँ चल रही हैं ये ऐलान बेहद अहमियत रखता है। अभी समुन्दर ने “इलन” को लाश में तब्दील करके दुनिया के मुँह पर नहीं उगला था


के एंजला मोर्कल ने खबरदार किया था की सीरिया संकट को अगर संजीदगी से नहीं लिया गया तो ये यूरोप वो युरोप नहीं बन सकेगा जिसकी हमने आरज़ू की थी। उनके इस जवाब में हंगेरियन प्रधानमंत्री का जवाब आया था की सीरिया के विस्थापित परिवार एंजोला मोर्कल का दर्दे सर तो हो सकते हैं लेकिन यूरोप का नहीं। एंजोला मोर्कल ने अगला ऐलान करके ये साबित किया की सीरिया के विस्थापित परिवार वाक़ई उनका दर्दे सर हैं।

अगस्त के आखिर में उनकी सरकार ने ये ऐलान किया की जर्मनी की ओर से सीरिया विस्थापितों पर “डबलिन प्रोटोकॉल” लागू नहीं किया जायेगा। डबलिन प्रोटोकॉल के अनुसार कोई भी व्यक्ति केवल उस देश में ही पनाह लेने की अर्ज़ी लगा सकता है जहाँ वो सबसे पहले पंहुचा था और उस मुल्क से नकार दिए जाने के बाद या फैसले का इंतज़ार किये बगैर व्यक्ति दूसरे देश को अर्ज़ी लगाता है तो दूसरे देश द्वारा उस देश में डिपोर्ट कर दिया जायेगा जहाँ वो सबसे पहले पहुंचा था। जर्मनी के इस फैसले ने एंजोला मोर्कल को करूणामयी माँ के रूप में स्थापित किया के जिसका नाम सीरिया विस्थापित परिवार अपनी बेटियों को देने लगे।


और यहाँ तक की ब्रितानी मिडिया(जर्मन विरोधी) ने भी मोर्कल की खुल कर तारीफ़ की और ब्रिटेन के एक बड़े अखबार “द गार्जियन” ने सुर्खी लगाई “Mama Merkel:the‘compassio nate mother’ of Syrian refugees” एलन कुर्दी की लाश देख कर जहाँ ब्रिटिश सदर डेविड कैमरून ने चंद हज़ार सीरिया विस्थापितों को पनाह देकर हातिम ताई की क़बर पर लात मारी वहीँ एंजोला मोर्कल ने आठ लाख सीरिया विस्थापितों को पनाह देने का ऐलान कर डाला। ज्ञात हो की जर्मनी में तीन लाख विस्थापित पहले से ही पनाह ले चुके हैं। सीरिया विस्थापित अपने सोशल मिडिया पैगाम में मोर्कल की तुलना हबशा के राज नजाशि से कर रहे हैं जिसने मुसलमानों को पनाह दे कर मक्का के दुश्मनों के ज़ुल्म से बचाया था। आज भी कमोबेश वही हालात हैं। पनाह लेने के लिए जगह तो है लेकिन हर घर पर सऊदी ताले पडे हैं। शुक्रिया एंजोला मोर्कल।

वसीम अकरम त्यागी की फेसबुक वाल से 
पाकिस्तानी पत्रकार के ब्लाग के सौजन्य से


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