इजराइल बनने की इच्छा है ! ठीक है बनिये !
पर पहले क्रिश्चियनकी घृणा का पात्र बनिये फिर इस्लाम की घृणा के निशाने पर आइये फिर नाजी दमन से निकलकर जितने बचोगे उनको उनका मूल राष्ट्र (आर्यन) खोजकर दिया जायेगा ! अब ये जगह यूरेशिया में कहां पर है आज तक कोई इतिहासकार नहीं बता पाया !

जब तबाह-बरबाद यहूदी इजराइल के इस टुकड़े पर पहुंचे तो उनके डर और दुनियां के क्रूर व्यवहार ने उनको अपने प्रति और भविष्य के प्रति निष्ठुर बनाना ही था, लिहाजा दुनियां की सबसे कट्टरतम नस्ल बनी, जो नये बच्चे पैदा हुए उनको उसी तर्ज पर पाला गया, वे संवेदनहीनता में पिछली पीढ़ी से और दो कदम आगे बढ़े और ठीक इसी समय अमरीका ने अपनी अति आधुनिक सैन्य तकनीक और मारक वैपन वहां इतने दे दिये कि वहां की जनसंख्या से ज्यादा हथियार थे, और आधुनिक सैन्य अनुसंधान में उनके साईंटिस्टों को प्रशिक्षित कर सैन्य ईजाद हेतु पर्याप्त कच्चा माल दे दिया ! 


है क्या इजराइल में ? तांबा, लोहा, पीतल, बाक्साईट, कोयला, पेट्रोल, हरी भरी सिंचित जमीन ? कुछ भी तो नहीं है ? तब क्या रेत गला के कांच से मिसाइल या ड्रोन बना रा इजराईल ?

डरे हुए और बहुत जुल्म झेले आदमी को जब सुरक्षित ठिकाना और ताकतवर का साथ मिलता है तो वह दुनियां का सबसे हृदयहीन प्रतिक्रियावादी बन जाता है, जो इजराईल बना, अमेरिका ने अपनी किलर मशीनरी सपोर्ट न दिया होता तो इजराइल को आज तक कबका इस्लामिक राष्ट्र रेत में दफन कर देते ! वैसे भी इजराइल अमरीका का अमरीका से बाहर खुफिया सैन्य बेस भर है ! बहुत संभव है अमरीका के आधे एटम मिसाइल कूप वहीं हों !

इजराइल बहुत बहादुर या वीर नहीं है बल्कि डरे हुए शंकालुओं का देश है जो दुनियां में किसी के साथ सहज नहीं हो सकते, रही बात उसकी तकनीक और जीत की तो आपने “एज आफ ऐम्पायर गेम” खेला है ? नहीं खेला तो जरुर खेलिये, उसमें आप अपने एनीमी कबीलों को जो ब्रोंज एज में हैं उन पर आयरन एज टैक्नीक से वार कर दीजीए उनके हथियार की जद से सौ गुना दूर से उसकी कैवलरी, आर्चरी, बैलिस्टा, कैटापुल्ट सब तबाह कर दीजीए !

लेख दीप पाठक की फेसबुक वाल से लिया गया है 


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