why alcohol is not permitted in islam

पिछले कुछ समय से हमारे देश में शराबबंदी की होड़ सी लगी हैं। गाँव गाँव और शहर शहर में शराबबंदी के लिए विरोध प्रदर्शन किये जा रहे हैं और इनमें सबसे आगे महिलाएं हैं क्योंकि शराब के कारण होने वाले अपराधों की सबसे ज्यादा शिकार महिलाएं ही होती हैं। चाहें घरेलू हिंसा हो अथवा महिलाओं पर होने वाले अत्याचार हो इनकी बहुत बड़ी वजह शराब ही हैं। शायद इसीलिए बिहार में नीतीश कुमार की सरकार ने आते ही शराब को पूरी तरह से बंद कर दिया और हाल ही में तमिलनाडु में सत्ता में आते ही जयललिता ने शराब की 500 दुकानों को बंद कर दिया। इसी प्रकार राजस्थान में भी आजकल लोगों ने शराब के खिलाफ मोर्चा संभाल रखा हैं और पिछले कुछ दिनों में शराब के कई ठेको को बंद किया जा चुका हैं और ये विरोध प्रदर्शन आग की तरह फैलता चला जा रहा हैं जो कि बहुत ही अच्छी शुरुआत हैं।

क्योंकि कहा जाता हैं कि शराब सारी बुराइयों की जड़ हैं यानि दुनिया में जितने भी गुनाह (अपराध) होते हैं उनमें से ज्यादातर शराब पीने के बाद अन्जाम दिये जाते हैं। शराब शरीर, दिमाग और समाज तीनों के लिए नुकसानदेह हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए इस्लाम ने आज से 1500 साल पहले ही शराब को हराम (वर्जित) कर दिया था। और इस्लाम ने इसकी जो अहम वजह बताई वो ये हैं कि शराब पीने के बाद इन्सान का उसके दिमाग पर कोई काबू नहीं रहता हैं। जैसा कि कुरान ए पाक में अल्लाह (ईश्वर) ने फरमाया;

“ऐ ईमान वालों (मुसलमानों)! अगर तुम नशे की हालत में हो तो नमाज मत पढ़ो जब तक तुम ये न जानते हो कि तुम क्या कह रहे हो…”
कुरान शरीफ़ (4:43)

कुरान शरीफ़ की इस आयत से ये पता चलता हैं कि जब इन्सान शराब पीता हैं या कोई नशा करता हैं तो उसे ये ध्यान नहीं होता हैं कि वह क्या बोल रहा हैं? इसका मतलब यह हुआ कि इन्सान का उसकी जबान पर काबू नहीं रहता हैं। और जबान पर काबू इसीलिए नहीं रहता क्योंकि दिमाग पर काबू नहीं होता हैं। तो जब इन्सान का उसके दिमाग पर काबू ही नहीं हैं तो उसे यह कैसे मालूम होगा कि वह क्या बोल रहा हैं या क्या कर रहा हैं? इसिलिए तो ज्यादातर गुनाह शराब पीने के बाद किये जाते हैं। हालांकि शराब के कुछ फायदे भी हैं लेकिन इसके नुकसान इतने हैं कि फायदों का कोई वजूद ही नहीं रहता। मिसाल के तौर पर किसी ने आपको 100 रुपये दिये तो आपको 100 रुपये का फायदा जरुर हुआ मगर इसके बदले में आपको 1000 रुपये देने पड़े तो आपको 900 रुपये का नुकसान होगा तो फिर उन 100 रुपयों का कुछ मोल नहीं रह जाता। और कोई भी इन्सान नहीं चाहेगा कि थोड़े से फायदे के लिए उसका ज्यादा नुकसान हों। और इसीलिए कुरान ए पाक में अल्लाह (ईश्वर) ने फरमाया;

” ऐ नबी (मुहम्मद साहब स.अ.व.) अगर लोग आपसे पूछें शराब और जूए के बारे में तो कह दीजिये इनसे कुछ फायदा जरुर हैं मगर फायदे से ज्यादा नुकसान हैं।”
कुरान शरीफ़ (2:219)

आपको ताज्जुब हो रहा होगा कि शराब जैसी चीज़ के भी कुछ फायदे हो सकते हैं? हा शराब के कुछ फायदे हैं जैसे शराब पीने के बाद इन्सान को कुछ होश नहीं रहता हैं जिससे उसका गम (तनाव) दूर हो जाता हैं और खासी जैसी कुछ बीमारियों की दवाई में भी Alcohol का इस्तेमाल होता हैं। मगर इन छोटे मोटे फायदों के बावजूद इसके नुकसान बहुत ही सन्जिदा (गम्भीर) हैं। अमेरिका का National Institute of Alcohol Abuse and Alcoholism जो कि कई सालों से शराब से होने वाले नुकसानों पर रिसर्च कर रहा हैं उसकी रिपोर्ट बताती हैं कि;

 शराब पीने से इन्सान के दिमाग का काम करने का तरीका बदल जाता हैं फिर उस इन्सान की सोचने और समझने की ताकत कम हो जाती हैं।

 शराब पीने से इन्सान के दिल को भी बहुत नुकसान होता हैं जैसे कि (Cardiomyopathy) दिल की मासपेशिया बढ़ती हैं या तो सिकुड़ जाती हैं, दिल धड़कने की रफ्तार (Heart Beat) पर भी बुरा असर पड़ता हैं, दिल का दौरा (Heart Attack) का भी खतरा बढ़ जाता हैं और High Blood Pressure जैसी बीमारियाँ होती हैं।

 शराब पीने से इन्सान के लिवर को भी बहुत नुकसान होता हैं जैसे कि लिवर फैल (Liver Stretching) जाता हैं और (Hepatitis) हेपाटाइटिस जैसी बड़ी बीमारी हो जाती हैं।

 शराब पीने से इन्सान को (Pancreatitis) पेन्क्रियाटाइटिस नाम की बीमारी हो जाती हैं जिससे इन्सान का हाजमा (Metabolism System) खराब हो जाता हैं और कई पेट की बीमारियाँ हो जाती हैं।

 शराब पीने से इन्सान को Cancer जैसी जानलेवा बीमारी हो जाती हैं जैसे कि (Mouth Cancer) मुह का केन्सर, (Liver Cancer) लिवर का केन्सर और (Throat Cancer) गले का केन्सर।

 शराब पीने से इन्सान के शरीर में (Immune System) बीमारियों से लड़ने की ताकत खत्म हो जाती हैं जिससे छोटी से छोटी बीमारी भी ठीक नहीं हो पाती हैं।

तो अब समझ में आ गया कि शराब के नुकसान इतने सन्जिदा (गम्भीर) हैं कि इससे होने वाले फायदे न के बराबर हैं और यही वजह हैं कि इस्लाम ने सबसे पहले शराब को हराम (वर्जित) कर दिया था।

मोहम्मद जुनेद टाक (बाली) राजस्थान


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