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भारतीय मीडिया का गेर जिम्मेदाराना रवैया किसी से छुपा नहीं हैं. किसी एक वर्ग विशेष के खिलाफ नफरत फ़ैलाने का मामला रहा हो या मीडिया ट्रायल करके बेकसूर नोजवानों को आतंकवादी साबित करने में. मीडिया अपनी विश्वसनीयता लगातार जनता के बीच खोता जा रहा हैं. सत्ता में रही पार्टियों की चापलूसी करने की बात हो या विपक्ष को निचा दिखाने की. ऐसे मामले आमतोर पर मीडिया में दिखाई दे जाते हैं. हालाँकि पूरे मीडिया पर लांछन लगाना गलत होगा.

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हाल ही में SATYAGRAH.Com ब्यूरो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिनों की ईरान यात्रा के बारे में एक रिपोर्ट प्रकाशित की. जिसको फ्रंट पेज पर प्रकाशित किया गया. रिपोर्ट में कहा गया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजेपयी की ईरान यात्रा के तकरीबन 15 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इस देश का दौरा किया है.

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लेकिन ये पत्रकार महोदय की भूल कहें या कुछ और. जो वह देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा अगस्त 2012 में ईरान की ऐतिहासिक यात्रा को नकार बेठे. पूर्व प्रधानमंत्री ने XVI गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन में शिरकत के लिए ईरान की अधिकारिक यात्रा की थी, और दुनिया भर के बड़े नेताओं के बीच ईरान द्वारा डॉ. मनमोहन सिंह को सबसे ज्यादा सम्मान दिया गया था.

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इस मौके पर शिखर सम्मलेन की सारी व्यस्ताओं के बावजूद ईरान के राष्ट्रपति अहमदीनेजाद ने डॉ. मनमोहन सिंह के सम्मान में सरकारी भोज का आयोजन किया था और उनकी ईरान के वरिष्ट नेता आयतुल्लाह ख़ामेनई से भी मुलाक़ात हुई थी. इस यात्रा पर डॉ. मनमोहन सिंह अपनी पत्नी के साथ तेहरान के गुरुद्वारे में भी गयें थे.

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हालाँकि पूर्व प्रधानमंत्री की यात्रा का ब्यौरा विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर भी मोजूद हैं. इस यात्रा के दोरान डॉ. मनमोहन सिंह, ईरान के राष्ट्रपति अहमदीनेजाद, मिस्र के पहले चुने हुए लोकतान्त्रिक राष्ट्रपति डॉ. मुहम्मद मोरसी, संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव बान की मून और दीगर नेताओं के साथ XVI गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन में शामिल हुवे थे.


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