कश्मीरी पंडितों की अपील, देश भर में कश्मीरी मुस्लिम छात्रों को न सताया जाए

श्रीनगर स्थित एनआईटी की घटना की प्रतिक्रिया में राजस्थान में कश्मीरी छात्रों पर हुए हमले के बाद कश्मीरी पंडितों के एक समूह ने एक बयान जारी किया है. इसका हिंदी अनुवाद :

एनआईटी श्रीनगर में पढ़ रहे छात्रों के गुस्से और घबराहट से जुड़ी खबरों की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि राजस्थान से खबर आई कि इस घटना की प्रतिक्रिया में राजस्थान के जोधपुर स्थित व्यास डेंटल कॉलेज में पढ़ रहे कुछ कश्मीरी छात्रों को पीटा गया है. अखबार हिंदुस्तान टाइम्स की एक खबर के मुताबिक इन कश्मीरी छात्रों का कहना था कि गुरुवार की शाम उन पर इसलिए हमला हुआ कि तीन दिन पहले श्रीनगर के एनआईटी में पढ़ रहे ‘बाहर के’ छात्रों पर हमला हुआ था. इन छात्रों के मुताबिक चाकू, रॉड और डंडों से लैस करीब 30 स्थानीय छात्र और दूसरे लोग थे जिन्होंने अपना चेहरा ढका हुआ था और वे पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगा रहे थे. उन्हें जो भी कश्मीरी छात्र दिखा उसे उन्होंने पीटा.

यह दुखद है कि गैर स्थानीय कश्मीरी छात्रों के एक छोटे से समूह को डरा और पीटकर उन्होंने वीरता और धर्मपरायणता वाली राजस्थान की विरासत पर दाग लगाया है.

हम कश्मीरी पंडित नफरत और बदले की इस राजनीति से परेशान हैं. हमारी पहली प्रतिक्रिया यह सवाल है कि क्या हम होश खो बैठे हैं. इस बेशर्म क्रूरता के साथ हम कहां जा रहे हैं?

इससे पहले कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को सांप्रदायिक पागलपन और नफरत के दुश्चक्र को आगे ले जाने के लिए इस्तेमाल किया जाए, हम लोगों और खासकर छात्रों से कहना चाहते हैं कि वे कश्मीरी मुसलमान छात्रों पर हमले न करें. हम उनसे आग्रह करते हैं कि वे किसी भी हालत में किसी कश्मीरी छात्र को मानसिक या शारीरिक रूप से परेशान न करें.

इस हमले में शामिल राजस्थान के छात्रों से हम यह पूछना चाहते हैं कि एनआईटी श्रीनगर में जो भी हुआ उसमें व्यास डेंटल कॉलेज में पढ़ रहे कश्मीरी छात्रों का क्या कसूर था. खबर में उकसाने वाली किसी घटना कोई जिक्र नहीं है. और अगर ऐसी कोई घटना हुई भी हो तो हम इन नौजवानों- जो खुद को हिंसा की आदिम प्रवृत्ति का विरोध करने से नहीं रोक पाते-से पूछना चाहते हैं कि दूसरों को चोट पहुंचाने का अधिकार उन्हें किसने दिया. यह दुखद है कि गैर स्थानीय कश्मीरी छात्रों के एक छोटे से समूह को डरा और पीटकर उन्होंने वीरता और धर्मपरायणता वाली राजस्थान की विरासत पर दाग लगाया है. उन्हें यह जानना चाहिए कि वे सांप्रदायिक हिंसा को भड़काने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं.

हम अपने देशवासियों से अपील करते हैं कि वे देश के किसी भी हिस्से में किसी कश्मीरी छात्र पर हमला न होने दें. हमें भरोसा है कि हमारे साथी नागरिक ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होने देंगे और अपने बच्चों की तरह उनकी सुरक्षा करेंगे.

हम राजस्थान में पढ़ रहे उन कश्मीरी छात्रों को भी यह बताना चाहते हैं कि हम एकजुटता के साथ उनके साथ खड़े हैं. हम उन्हें यह भी बताना चाहते हैं कि हम किसी भी तरह की हिंसा के डर के बगैर भारत में कहीं भी पढ़ने के उनके अधिकार के लिए लड़ेंगे.

हम अपने देशवासियों से भी अपील करते हैं कि वे देश के किसी भी हिस्से में किसी कश्मीरी छात्र पर हमला न होने दें. साथ ही वे नफरत फैलाने वाली अफवाहों का विरोध करें और अगर कहीं इस तरह की हिंसा होती है तो उसे रोकें.

हम प्रशासन से भी अपील करते हैं कि वे नफरत के पैरोकारों से सतर्क रहें. साथ ही जिस भी शैक्षिक संस्थान में कश्मीरी छात्र पढ़ रहे हैं वहां ऐसी घटना न हो, इसके लिए जरूरी कदम उठाएं. हम देश के अलग-अलग शैक्षिक संस्थानों में खड़े सभी कश्मीरी छात्रों के साथ खड़े हैं. हमें भरोसा है कि हमारे साथी नागरिक ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होने देंगे और अपने बच्चों की तरह उनकी सुरक्षा करेंगे.

(ये लेख सत्याग्रह से लिया गया है तथा इस लिंक पर आप लेख पढ़ सकते है)


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