निर्भया केस के एक दोषी की पहचान के साथ हिंदुत्व के स्वयंभू ठेकेदार और स्वघोषित मोदीभक्त छेड़छाड़ कर रहे हैं। छेड़छाड़ भी ऐसी जो इस मामले की संवेदनशीलता और इस घटना से जुड़ी लोगों की भावनाओं से भद्दा खेल खेलती है। आज हम उस पोस्ट का सच बताएंगे जिसका मक़सद सामने से तो निर्भया के नाबालिग़ दोषी के प्रति नफ़रत दिखाना है, लेकिन असल मक़सद धार्मिक उन्माद को जन्म देना है।

हम यह भी बताएंगे कि हम उस अकाउंट होल्डर या उसके पीछे के लोगों को मोदीभक्त क्यों कह रहे हैं। लेकिन पहले वह तस्वीर देखें जिसे निर्भया केस के नाबालिग़ दोषी का बताकर शेयर  किया गया है,

इस तस्वीर को ध्यान से देख लीजिए, क्योंकि आगे हम आपको  बताएंगे कि यह शख़्स कौन है। उससे पहले उन शब्दों पर ग़ौर करते हैं जिनसे इस भ्रामक तस्वीर को ‘सजाया’ गया है। शीर्षक में लिखा है,‘निर्भया का कातिल अफरोज’। आगे लिखा है, ‘ये कानून और टीम केजरीवाल के लिए अभी बच्चा है और इसको ये सुधारेंगे…4 हफ्ते तक और इस दरिंदे के छूटने तक राज्यसभा में कांग्रेस ने जुवेनाइल बिल पास नहीं होने दिया और इसके छूटते ही कांग्रेस ने शांति से इस बिल को पास होने दिया. अफरोज को छूटने के बाद केजरीवाल सरकार सिलाई मशीन देने वाली है और अफरोज को लेडीज टेलर बनायेगी. अब राष्ट्रवादियों क्या ये भी बताना पड़ेगा की (कि) कौन सी सरकार निर्भया के (की) मौत पर मोमबत्ती जला रहा थी और आज कौन उसके कातिल को बचा रही है।’

हम इन शब्दों का पोस्टमॉर्टम करेंगे, पहले देखिए यह पोस्ट किस प्रोफ़ाइल से किया गया है।

तो यह कोई किरन शर्मा हैं। किरन के शब्दों  का अर्थ निकालें तो समझ आता है कि कांग्रेस नहीं चाहती थी ‘अफ़रोज़’ को सज़ा हो, इसलिए उसने उसके रिहा होने तक जुवेनाइल बिल पास नहीं होने दिया। जबकि सच यह है कि इससे कोई फ़र्क़ पड़ना ही नहीं था, क्योंकि संसद द्वारा पास किए जाने वाले बिल-संशोधन भविष्य में होने वाली घटनाओं पर लागू होते हैं। दूसरा यह, कि आम आदमी पार्टी या आप सरकार की ओर से कभी नहीं कहा गया कि वह ‘अफ़रोज़’ को लेडीज़ टेलर बनाएगी। यह एक बीमार दिमाग़ की उपज से ज़्यादा और कुछ नहीं। अभी जो जुवेनाइल जस्टिस ऐक्ट लागू है, उसके तहत सरकार का फ़र्ज़ बनता है कि वह हर जुवेनाइल के पुनर्वास की व्यवस्था करे। यदि बीजेपी की सरकार अभी दिल्ली में होती तो उसे भी यह व्यवस्था करनी पड़ती। ज़्यादा जानने के लिए यहां क्लिक करें। 

अब बात इस तस्वीर की सच्चाई की। नीचे की तस्वीर देखें और उसके साथ दिया गया कैप्शन भी।

cnnसच यह है कि जिस लड़के को ‘अफ़रोज़’ बताया गया, वह असल में विनय शर्मा है। आप इस ख़बर कोयहाँ क्लिक कर पढ़ सकते हैं। विनय बालिग़ है और वह एक जिम इन्स्ट्रक्टर रहा है। अदालत ने उसे बाक़ी पाँच दोषियों की तरह फाँसी की सज़ा सुनाई है। एक और तस्वीर देखें,

indian-expressबाएँ से पहला शख़्स वही है, जिसे किरन ने ‘अफ़रोज़’ बताया था और हमने विनय शर्मा। यहाँ भी इसे विनय शर्मा बताया गया है, क्योंकि यह शख़्स विनय शर्मा ही है। आप यह ख़बर यहाँ क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

चलिए, अब बात करते हैं विनय को ‘अफ़रोज़’ बताने वाले फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल की। दरअसल यह प्रोफ़ाइल मोदी-बीजेपी भक्त (या शायद भक्तों) का है जो कट्टर हिंदूवादी सोच का व्यक्ति हो सकता/सकती है। हमने शुरुआत में मोदीभक्त  शब्द का इस्तेमाल किया था। ऐसा क्यों, यह जानने के लिए यह तस्वीर काफ़ी है,

lion

इस प्रोफ़ाइल की कवर इमेज भी देख लीजिए,

kiran

इस परम मोदीभक्त की जिस तस्वीर की पोल हमने खोली है, शायद अब वह प्रोफ़ाइल से हटा ली गई है। लेकिन इससे पहले ही हमारी नज़र इस पर पड़ गई। वैसे उससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। क्योंकि धार्मिक कट्टरपंथ का नेतृत्व करती इस प्रोफ़ाइल के होल्डर/होल्डर्स की आँखें जबतक खुली होंगी, तबतक तो जाने कितनी प्रोफ़ाइल झूठ के कीचड़ से सन चुकी होंगी। यह हास्यास्पद है कि इस अकाउंट की प्रोफ़ाइल इमेज में लिखा है, ‘I May Not Be Perfect But At least I’m Not Fake‘ यानी ‘हो सकता है मैं परफ़ेक्ट (परिपूर्ण) न होऊँ लेकिन कम से कम फ़ेक (झूठा या नक़ली) नहीं हूँ।’

ऐसे झूठे लोगों को निर्भया जैसी पीड़िता से सहानुभूति नहीं, अपने अजेंडे से प्रेम भर होता है। इन्हें नाबालिग़ दोषी और उसके अपराध से इतना सरोकार इसलिए है, क्योंकि उसका नाम अफ़रोज़ है। निर्भया की आड़ लेकर ये लोग हिंदुओं में मुस्लिमों के प्रति द्वेष पैदा करते हैं। इन्हें यह नहीं दिखता, कि जिन 6 लोगों को इस घृणित कृत्य के लिए सज़ा सुनाई गई है, उनमें पाँच तो हिंदू ही हैं। और कोलकाता में जिस जवान पर एक नाबालिग लड़की से रेप का आरोप लगा है, वह भी हिंदू ही है। अपराध को धर्म के चश्मे से देखना ही बहुत बड़ा अपराध है।

यह प्रोफ़ाइल धार्मिक कट्टरता की परिचायक है। इसके तमाम पोस्ट्स बीजेपी-मोदी विरोधियों के प्रति नफ़रत पैदा करने और समाज को धार्मिक उन्माद से ग्रसित करने वाले हैं। यहाँ क्लिक कर आप यह प्रोफ़ाइल देख सकते हैं। हमारा अनुरोध है कि अगर यह तस्वीर आप तक पहुँचे तो उसे शेयर करने का ‘अपराध’ न करें।

ये लेख नवभारत टाइम्स के ब्लॉग कॉलम में प्रकाशित किया गया था


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