हज़रत मौलाना रूमी रहमतुल्लाह अलैह ने हिकायत के अंदाज़ में बड़ी क़ीमती बात समझाई है, लिखते हैं कि एक जोहरी के साथ एक चोर हमसफ़र हो गया, चोर ने क्या देखा कि जोहरी के पास एक क़ीमती हीरा है, दिल ही दिल में कहने लगा कि जब रात में कहीं ये जोहरी सोया तो मैं इसके असबाब से ये हीरा निकाल कर फ़रार हो जाऊंगा, जोहरी अपने हमसफ़र चोर की नीयत से आगाह हो चुका था जब रात आई तो सोने से पहले जोहरी ने अपना हीरा चोर के असबाब में रख दिया और बे फ़िक्र होकर सो गया,

चोर रात भर जोहरी के असबाब में हीरा तलाश करता रहा मगर हैरान था कि ना जाने जोहरी ने हीरा कहां छुपा दिया है ? चोर की मुसलसल तीन राते इसी तरह मायूसी के आलम में गुज़र गई, आख़िर चोर ने जोहरी से कहा कि “दिन के वक़्त तो हीरा तुम्हारे पास होता है, रात को कहां जाता है, मुझे तीन राते जागते हुए गुज़र गईं, मगर रात को हीरा कहीं नहीं मिलता, जोहरी ने कहा

“तुम मेरे असबाब में हीरा तलाश करते रहे हो, काश! कभी अपने असबाब में भी उसे ढ़ूढ़ने की कोशिश करते तो तुम्हें मिल जाता…।

तो बात ये है कि ख़ुदा को इधर उधर तलाश करने की ज़रूरत नहीं अपने मन में झांक कर देख लो इन्शाअल्लाह, ख़ुदा मिल जाएगा…। – तनवीर त्यागी

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