सफ़ेद कबूतर हमेशा से प्रेम और सौहार्द का प्रतीक माना जाता है, लेकिन इन दिनों इसी परिन्दे से भारतीय सेना परेशान है. हो भी तो क्यों न? इस पाकिस्तानी परिन्दे ने भारतीय सीमा के अंदर घुसपैठ जो कर दी है.

पिछले दिनों भारत पाकिस्तान की सीमा पर स्थित मनवाल गाँव में पाकिस्तानी कबूतर मिलने से पंजाब पुलिस के होश उड़ गए हैं और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गयीं हैं. पुलिस ने इस कबूतर की पूरी जांच करवायी है. मनवाल गाँव में यह कबूतर रमेश कुमार के घर से मिला है. रमेश कुमार ने बताया कि नौ दिन पहले जब यह कबूतर उन्हें मिला तो उन्होंने  पुलिस को सौप दिया. तब से पह पक्षी पुलिस की हिरासत में था.

पुलिस के अनुसार इस कबूतर पर पाकिस्तान के जिला नारोवाल की तहसील शकरगढ़ की मोहर लगी है. पंख पर फ़ोन नंबर के साथ उर्दू में कुछ लिखा भी था. इस बात की जांच भी की जा रही है, कि इसे भारत भेजने का मकसद क्या हो सकता है. पुलिस के मुताबिक कबूतर की मेडिकल जांच की जा चुकी है. इसके एक्स-रे के दौरान कोई चिप, कैमरा, ट्रासंमीटर या अन्य कोई संदिग्ध वस्तु नहीं पायी गयी है. पुलिस के अनुसार पाकिस्तान से आये इस चंचल घुपैठिए को आठ दिन पुलिस हिरासत में बिताने के बाद, एक पंक्षी प्रेमी को सौंप दिया गया है. जो इसकी देखभाल करेगा.

हालाँकि कई लोगों का मानना है कि इस कबूतर को जासूसी के मकसद से भारत की सीमा के अंदर भेजा गया है. दरअसल, कई बार इस तरह के कबूतरों को सीमावर्ती इलाकों से पकड़ा जा चुका है, इससे पहले भी तरणताल में एक कबूतर पकड़ा गया था, जिस पर नशा तस्करों ने मोबाइल नंबर लिख कर भेजा था. जबकि हाल ही में गुजरात की सीमा के समीप पकड़े गए एक कबूतर के शरीर से कई इलेक्ट्रॉनिक चिप प्राप्त हुईं थीं.

आसपास के गावों वाले बताते है कि सीमा के दोनों ओर पाकिस्तान और भारत के पठानकोट एवं गुरुदासपुर में कई लोग कबूतर पालते है. यहाँ कुछ लोगों को कबूतरों का शौक है तो बड़े स्तर पर यहाँ कबूतरों का व्यापार भी किया जाता है. लोग बताते हैं भारत में पाकिस्तान के कबूतरों की बहुत मांग है और ये काफी महंगे भी बिकते हैं. पाकिस्तानी कबूतरों को आसानी से पहचाना जा सकता है क्योंकि भारतीय कबूतरों से अलग दिखाई पड़ते हैं, कई बार लोग इन कबूतरों को दाना दाल कर पकड़ लेते हैं.
बताते हैं कि गुरुदासपुर और पाकिस्तान के कई इलाकों में कबूतरों की उड़ान प्रतियोगिता करवाई जाती है. ऐसे में यहाँ के निवासियों का कहना है कि कई बार पाकिस्तांन के कबूतर रास्ता भटक कर भारतीय क्षेत्र में आ जाते हैं, और कई बार ऐसा भी होता है कि भारतीय कबूतर भी भटक कर पाकिस्तान पहुँच जाते हैं.

हालाँकि, राजा महाराजाओं के समय में कबूतरों का उपयोग जासूसी और सन्देश भेजने के लिए किया जाता था. किन्तु इस आधुनिक समय में ऐसा कम ही देखने को मिलता है.

न जाने कितने आयोजनों पर लोग इन कबूतरों को अपने हाथों से छोड़ कर प्रेम और सौहार्द का सन्देश देते हैं. एक वक्त था जब दिल्ली लाहौर बस सेवा के उद्घाटन समारोह में भारत और पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं ने अपने हाथों से इन्हीं सफ़ेद कबूतरों को उड़ाकर शांति का सन्देश दिया था.
अब इस वक्त और माहौल को देखिये, जिसमें इंसानी लड़ाइयों ने पंछियों के लिए भी सरहद का दायरा खींच दिया. आखिर खुले आसमान में आजाद उड़ने वाले पंछी को मुल्कों की सरहद के बारे में कैसे समझाया जायेगा. उसे इस बात का इल्म कैसे होगा कि वह भी मुल्क और मजहब में बंट चुका है.
आखिर वह कैसे समझेगा कि खुले आसमान में आँखों से न दिखने वाली दीवार को उसे पार नहीं करना है, और गलती से इस दीवार को पार करने पर उसे दूसरे मुल्क का ‘घुसपैठिया’ या ‘आतंकवादी’ करार दिया जाएगा.

 
अभय शर्मा प्रशिक्षु पत्रकार दिल्ली

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