मुंबई: ह्यूमंस ऑफ बॉम्बे नाम के फेसबुक पेज पर कई खूबसूरत और प्रेरणादायी कहानियां देखने को मिलती हैं और 16 साल के अंगद दरयानी की यह कहानी भी उन्हीं में एक हैं।

नौवीं क्लास में दो बार फेल होने के बाद अंगद ने स्कूल छोड़ दिया था और महज दो साल बाद 16 साल की उम्र में वह दो कंपनियों का मालिक बन गए हैं।

ह्यूमंस ऑफ बॉम्बे पर डाले गए पोस्ट में बताया गया है कि अंगद ने स्कूल जाना इसलिए छोड़ दिया, क्योंकि उन्हें जिंदगी की स्कलू से सीखने में ज्यादा मजा आता है।

अंगद ने फेसबुक पोस्ट में लिखा, ‘मैं जब 9वीं कक्षा में था तब मैंने स्कूल छोड़ दिया, क्योंकि मैं बार-बार पुराने कॉन्सेप्ट्स को बिल्कुल सीखना नहीं चाहता था।’ उन्होंने कहा कि स्कूली शिक्षा में बच्चे नए आइडिया नहीं लाते और किताबों से थ्योरीज़ याद करते हैं…. जिसे बाद में भूल जाते हैं।’

वह ग्रेडिंग सिस्टम में बिल्कुल भरोसा नहीं रखते और इसकी जगह वह घर पर पढ़ाई करने को बेहतर मानते हैं। ऐसा संभव इसलिए हो पाया, क्योंकि उनके परिजन उन्हें समझते हैं। अपने फेसबुक पोस्ट में उन्होंने कहा, ‘जब मैं 10 साल का था, तो मैं अपने पिता के पास गया और कहा कि मैं हॉवर क्राफ्ट बनाना चाहता हूं और मेरे आइडिया का मजाक उड़ाने की जगह उन्होंने मुझे आगे बढ़ने को कहा।’

अंगद के पास बेहद छोटी उम्र से ही नई चीजें बनाने की प्रतिभा है। टीवी कार्यक्रमों, चीज़ों बनाना सिखाने वाली पत्रिकाओं या अपने पिता के ऑफिस के इंजिनियरों से सीखकर वह कुछ ना कुछ नया बना लिया करते।

अब 16 साल की उम्र में अंगद दो कंपनियां चला रहे हैं, जो उत्सुकता और नवाचार (क्यूरिअसिटी ऐंड इनोवेशन) को बढ़ावा देने वाले उत्पाद तैयार करती हैं। एमआईटी के प्रोफेसर डॉ. रमेश रस्कर के साथ काम करते हुए अंगद और उनकी टीम ने वर्चुअल ब्रैलर भी बनाया है, जो किसी भी पीडीएफ डॉक्युमेंट को ब्रैल में कन्वर्ट कर देता है।

आप अगर यह जानना चाहते हैं कि अंगद ने दोबारा स्कूल का रुख क्यों किया और देश के लिए उनका क्या सपना है, तो आपको उनकी पूरी कहानी पढ़नी होगी।


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