आसिम बेग “मिर्ज़ा

मेरे प्यारे देश वासियों आप सभी को मेरा आदाब! दोस्तों, जैसा कि आप ख़ुद देख रहे हैं और महसूस भी कर रहे हैं कि आज हमारे देश में सांप्रदायिक कट्टरवादी राजनीतिक ताक़तें अपने फ़ायदे के लिए समाज में एक नफ़रत का ज़हर घोल रही हैं जिसमें दुर्भाग्य से लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ मानी जाने वाली मीडिया के बड़े मिडिया चैनलों का पक्षपाती समर्थन भी दिखाई देता है जो अपने निजी स्वार्थ के लिए देश तथा देश की जनता के साथ धोखा कर रहे हैं। जैसा कि लोकतंत्र में मीडिया का एक बहुत ही अहम किरदार होता है लोकतंत्र में मीडिया एक आइना होती है, मीडिया जनता तथा राजनेताओं के बीच एक मज़बूत कड़ी होती है जो जनता को देश में हो रही घटनाओं से वाक़िफ़ करवाती है ताकि जनता ये समझ सके कि देश में क्या हो रहा है तथा जनता को होने वाली तक़्लीफ़ों को देश के नेताओं तक पहुंचाती है लेकिन जब मीडिया ही नेताओं के साथ मिलकर देश को गुमराह करने लगे तो भला अब उस देश को बर्बाद होने से कौन रोक सकता है जबकि लोकतंत्र में वफ़ादार मीडिया का होना शर्त है। जिस लोकतांत्रिक देश में नेताओं से सांठ गांठ करने वाली मीडिया होती है वो देश लोकतंत्र के नाम पर एक मज़ाक बनकर रह जाता है वहां एक सड़ा हुआ लोकतंत्र होता है जिसमें रहने वाली जनता नेताओं के अत्याचार से कराह रही होती है ये सिर्फ़ कहने को लोकतंत्र होता जबकि ऐसे देश की स्थिति किसी क्रूर तानाशाह से पीड़ित देश की सी ही होती है। लेकिन अपना देश अन्य देशों से थोड़ा अलग है यहां के लोग धर्म का चोला ओढ़े धूर्त नेताओं द्वारा तरह-तरह से किए जा रहे शोषण को ख़ुशी ख़ुशी सह रहे हैं , क्यों ? क्योंकि यहां पर लोगों की आंखों में धर्म के नाम पर अन्धविश्वास, अंधभक्ति तथा आडम्बर नाम की पट्टियां बांध दी गई हैं जो उन्हें उनपर हो रहे अत्यचार के ख़िलाफ़ बोलने से रोकती ही नहीं औरों को भी बोलने से रोकती हैं और औरों को बोलने से रोकने के लिए किसी भी हद तक जाने की प्रेरणा देती हैं उदाहरणार्थ देश में धर्म के नाम पर एक धर्म विशेष पर हो रहे हमले, हत्या इस बात का खुला उदाहरण हैं।

दोस्तों, जैसा कि आज हमारे देश में साम्प्रदायिकता का ज़हर दिन ब दिन तेज़ी से फैल रहा है जिसके शिकार वो अतिवादी लोग हैं जो ख़ुद को सबसे अच्छा, उनका धर्म उनकी जाति सबसे अच्छी और दूसरे लोग सबसे बुरे, उनका धर्म उनकी जाति सबसे बुरी। प्रायः ऐसे समाज विरोधी तथा नकारात्मकता से परिपूर्ण विचार आपराधिक प्रवृत्ति वाले व्यक्तियों में होते हैं और यदि इन विचारों को एक ऐसे स्वस्थ समाज जो शांति, समता,निरपेक्षता तथा न्याय से परिपूर्ण हो में पनपने दिया जाए तो ये उसे तबाह कर देते हैं तथा उसमें अन्याय,पक्षपात एवं अपराध जैसी बुराइयों को भर कर उसे अशांति की आग में झोंक देते हैं जिसका खामियाज़ा समाज में रहने वाले सभी लागों को भुगतना पड़ता है या व्यवहारिक शब्दों में यूं भी कह सकते हैं कि अगर कोई इस नफ़रत के ज़हर का शिकार हो जाता है तो उसे समाज में अपने साथ रहने वाले अन्य जाति धर्म के लोग बुरे लगने लगते हैं वो उन्हें उसके लिए और उसके जाति धर्म के लिए ख़तरा लगने लगते हैं जिनके साथ कलतक वो एक स्वस्थ समाज में रहता था जहां सभी लोग समाज के अभिन्न अंग थे और किसी एक के बिना भी समाज की कल्पना करना मुश्किल था।

दोस्तों, अगर हम चाहते हैं कि देश में शांति बनी रहे और हमारा मुल्क़ तरक्की करे तो इसके लिए सभी धर्मों के लोगों को आपस में मिलजुलकर रहना होगा तथा संयम और समझदारी से काम लेना होगा जिससे देश में एक सकारात्मक माहौल बना रहे और हमारी समझदारी और सूझबूझ को देखकर कोई भी दुश्मन चाहे बाहरी हो या भीतरी हमें बरगलाने की कोशिश न कर सके हमला तो बहुत दूर की बात है तो इसके लिए हमें इस साम्प्रदायिक कट्टरवाद के ज़हर से बचने की एक क़ामयाब कोशिश करनी होगी वरना वो दिन दूर नहीं जब हम अपना घर अपने ही हाथों से जला बैठेंगे और ज़माना हमारी इस बेवक़ूफ़ी पर कुछ यूं कहेगा-

उन्हें ज़रुरत न पड़ी दुश्मन की अपना घर जलाने में
बहुत ही कम हैं ऐसे बेवक़ूफ़ इस क़ाबिल ज़माने में ।।

                                       जय हिन्द!

आपका- आसिम बेग “मिर्ज़ा”
पुरवा (उन्नाव), उ.प्र.209825

नोट – उपरोक्त लेखक के निजि विचार है कोहराम न्यूज़ लेखक द्वारा कही किसी भी बात की ज़िम्मेदारी नही लेता 


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