इकबाल अहमद जकाती.
बेलगाम, कर्नाटक

बेलगाम शहर के महानतेश नगर में मुकीम मोहतरमा फहीमुन्निसा सय्यद का इंतेकाल वाकई दिल को छू लेनेवाला वाकिआ रहा। एकलौता बेटा जिसे बड़ी बेरहमी के साथ पुलिस ने दहशतगर्दी सरगर्मियों में मुलव्विस होने के इलजाम में गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद रिहाई का वक्फा इतना तवील हुआ के माँ अपने बेटे के इंतजार में आखिर दम तोड़ गयी। नदीम सय्यद पर सिर्फ बेलगाम का ही नहीं बल्कि गुजरात अहमदाबाद बम धमाकों का भी इलजाम लगाया गया और गुजरात के साबरमती जेल के ऐसी जगह पर रखा जहां पर परिंदा भी पर नहीं मारता। हासिल इत्तेला के मुताबिक कई साल गुजारे इन नौजवानों को सूरज की रोशनी तक मयस्सर नहीं हुयी। खाना ठीक से नहीं मिलता। नदीम सय्यद की भी तबियत बारहा इसी वजह से बिगड़ती रहती है। इनके वालिद और दीगर लोगों ने पैगाम ए इत्तेहाद को बताया के हुकूमत की जानिब से हम पर जुल्म की इन्तहा की जा रही है। झुटे इलजाम में फसां कर सालों तक मुकद्दमे की सुनवाई नहीं की जाती आखिर हम क्या करे…? रिश्तेदार अड़ोस पेसोस के लोगों ने गया हमारा सोसिअल बायकॉट किया है…कोई जमात कोई आलिम ….कोई भी अपने आप को इंसानियत ठेकेदार समझनेवाले मदद को नहीं आते….? ऐसा कहते कहते फहमुन्निसा के शौहर और नदीम सय्यद के वालिद जनाब अब्दुल नईम सय्यद की आँखे भर आई। उनकी आँखों से बहनेवाला एक एक आंसू कौम की बेहिसी और पुलिस जुल्म की इन्तहा की पूरी दास्ताँ बयां कर रहा था ऐसे लग रहा था के क्या वाकई अहसास और जज्बात खत्म हो रहे है।

फहमुन्निसा सय्यद अपनी दो बेटिया और एक बेटा नदीम के साथ मुकीम थीं। शिहर अपनी रोजी रोटी के खातिर सऊदी में मुलाजिमत पिछले कई सालों से वतन से दूर रहते है। दो साल तीन साल में एक मर्तबा वतन वापसी करते फिर मुलाजिमत के सऊदी चले जाते रहते। बहोत काम मांए ऐसी होती है जो दायरे इस्लाम में रहते हुए अपने बच्चों की सही तरबियत करती है। उन्ही में से एक फहीमुन्निसा सय्यद थी। 2008 में शहर ए बेलगाम में दहशतगर्द सर्गमियों में मुलव्विस होने के इलजाम में कुल ग्यारह नौजवानों को गिरफ्तार किया गया। जिनमे एक नदीम सय्यद भी था..ये सभी जानते है मुल्क में इस तरह की बेजां गिरफ्तारियां नयी बात नहीं है। नदीम सय्यद को बेलगाम मुकद्दमे के साथ गुजरात अहमदाबाद के बम धमाके में भी मुलव्विस होने का इलजाम लगा कर बेलगाम हिंडलगा जेल से साबरमती जेल भेज दिया गया। नदीम सय्यद एक तालीम आफ्ता तालिब था जो भरतेश में एमबीए पढ़ रहा था।
एक गिरफ्तारी से कई जिंदगियाँ मुतास्सिर हो गयी। एकलोते बेटे की गिरफ्तारी ने जैसे फहीमुन्निसा को अंदर से तोड़ दिया। हमेशा दूसरों की हिमायत और मदद में खड़ी रहनेवाली मेहमुन्निसा से अब पहचनवालों ने दूरिया इख्तियार करना शुरू किया। अपने बेटे की एक झलक पाने के लिए बेलगाम से अहमदाबाद साबरमती जेल पहुंचती….महीनों रेल की टिकट हासिल नहीं होती…..इंतजार करती….फिर टिकट हासिल करती और बेटे से एक मुलाकात कर आती। पिछले कई महीनों से सेहत में तेजी से गिरावट की वजह एक फिक्र थी के बेटा कब घर आएगा..? आहिस्ता आहिस्ता तकरीबन लोगों ने किनाराकशी कर ली। दो बेटिया और फहीमुन्निसा…!! बिलकुल जिन्दगी का दायरा महदूद बनचूका था। चारदीवारी में बंद जिन्दगी और बेटे नदीम की यादें एहि एक सरमाया…. एक और जिन्दगी सऊदी की सख्त गर्मियों में बच्चों के मुस्तकबिल की खातिर खून पसीना एक कर रही थी…वालिद अब्दुल नईम सय्यद ..!!

जब मैंने वकील मुडवालमठ से माँ के मदफन में नदीम की शिरकत की कोई गुंजाईश पर पूछा तो उन्होंने कहा के इतनी जल्दी मुमकिन नहीं इस लिए के मुकद्दमा बहोत ही संगीन है…अदालत की इजाजत हासिल करना फिर गुजरात से पुलिस मुहकमात के साथ लाना आसान नहीं है।
नदीम को तो लाना मुमकिन नहीं था लेकिन फहीमुन्निसा के शौहर जनाब नईमुद्दीन रात की मुसाफत तय कर सऊदी से बेलगाम पहुंचे और तद्फीन में शरीक हुए। एक ऐसा मंजर जिसे देख कर किसी की भी आँख नम हो जाती अल्लाह किसी को ऐसी आजमाइश में ना मुब्तला करे के एक माँ अपने बेटे का मुसलसल आठ साल से इंतजार करती रही और इसीमे आखिर साँसे खत्म हो गयी……!!


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