पिछले कुछ समय से सरकार के घटकों के द्वारा अपने विरोधियो को देशद्रोही साबित करने की एक होड़ सी मची हुई है | हर एक मोदी सपोर्टर देशभक्ति और देशद्रोह के सर्टिफिकेट जेब में लेकर घूम रहा है जो मोदी/संघ/सरकार का सपोर्टर मिलता है वो देशभक्त और अगर विरोधी तो देशद्रोही |

एक सज्जन से बात हो रही थी कहते है रविश कुमार (NDTV रिपोर्टर) एक देशद्रोही पत्रकार है मैंने पुछा कैसे तो जवाब आया की वो मोदी विरोधी है इसलिए देशद्रोही

ऐसा लगता है मोदी सरकार शुरू से ही टकराव की मुद्रा में है फिर चाहे मुद्दा FTTI का हो या फिर हैदराबाद university के रोहित वेमूला का हो या फिर JNU का | JNU मामले में जिस तरह पूरे JNU को देशद्रोही कहा गया, वो समझ से परे था, शायद ABVP, JNU में पैर ना फैला पाई इसलिए ऐसा योजना बद्ध तरीके से पूरे JNU को बदनाम करने की कोशिश की गई | भाजपा के MLA ज्ञानचंद आहूजा ने जिस तरीके से JNU के छात्र छात्राओं का चरित्र हनन करने की कोशिश की वो अत्यंत ही शर्मनाक है |

हरियाणा में जाट आन्दोलन के नाम पर 34000 करोड़ की संपत्ति फूंक दी गई। घर, शोरूम, गाडी, होटल, ढाबा, माल गाड़ी यंहा तक अस्पताल तक, जो हाथ लगा सब जला दिया गया। ये तो सरकारी आंकड़े है गैर सरकारी नुक्सान की तो बात ही अलग है |

अब एक और शर्मनाक खबर आई है कि दंगाइयों ने 10 महिलाओ से बलात्कार किया, ऐसी सरकारों का क्या फायदा जो सरकारे जनता की सुरक्षा के लिए कुछ भी ना कर पाये।

दिल्ली में पानी सपलाई करने वाली नहर तोड़ दी गई । कल ये लोग किसी बांध को तोड़ दे तो क्या होगा ? कल्पना भी डराती है । पता नहीं की बिहार में जंगल राज है या नहीं लेकिन भाजपा सरकार में हरियाणा का जंगल राज पूरी दुनियां ने जरुर देखा |

इस मंजर को देख कर “नायक” पिक्चर का वो डायलोग याद आ गया जिसमे विलेन कहता है जलता है तो जलने दो, कुछ लोग मरते है तो मरने दो, लेकिन दंगे नहीं रुकने चाहिए ……

अब ये स्पष्ट नहीं हुआ की नायक का किरदार, खट्टर जी के किरदार की भविष्यवाणी थी, या फिर खट्टर जी ने नायक के अमरीशपुरी से प्रभावित हो कर ये किरदार निभाया

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हरियाणा के अलावा दिल्ली, UP, पंजाब, राजस्थान, तक के जन जीवन को प्रभावित किया, सारा ट्रांसपोर्ट प्रभावित किया गया जबकि 3 राज्यों में राष्ट्रवादियो की सरकारें है लेकिन कोई भी राष्ट्रवादी इसकी निंदा तक करने की हिम्मत जुटा पाया । क्या इसका मतलब कि जाट आन्दोलन के नाम पर जो भी किया गया वो बिलकुल भारतीय कानून और संविधान में रह कर किया ? किसी भी फर्जी राष्ट्रविरोधी की हिम्मत नहीं थी की इस पर बात कर सके । शायद इसलिये कि, मोदी और संघ के विरोध का नारा नहीं लगा जिससे साबित हो की ये घटना देशविरोधी है। अगर संघ और मोदी के विरोध के नारे लगे होते तो हरियाणा का दंगल भी देशद्रोही साबित कर दिया जाता ओर कुछ नहीं तो बस्सी खुद हरियाणा जा कर मोर्चा संभाल लेते।

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कितने आश्चर्य की बात है कि जो लोग बात बात पर केजरीवाल को गाली देते है हर बात के लिए केजरीवाल को दोषी ठहराते है वो इस घटना के लिए केजरीवाल को दोषी भी नहीं ठहरा पाये। ऐसे सभी लोग चाहे मिडिया हो या फर्जी राष्ट्रवादी सभी पर देशद्रोह का मुकदमा चलाना चाहिए।

पता नहीं मोदीजी देश में है या विदेश में, उन्हें कुछ खबर भी है की कुछ लोग कैसा तांडव मचा रहे है । ऐसे माहोल में अचानक पूर्व प्रधानमंत्री की याद आ जाती है जिन्होंने 2002 में गुजरात दंगो के बाद मोदी को राजधर्म निभाने की नसीयत दी थी, खैर वो अटलजी थे जो अपनी ही पार्टी की सरकार के मुख्यमंत्री को राजधर्म पालन की नसीहत दे सकते थे लेकिन मोदी तो ऐसा करने की सोच भी नहीं सकते, आखिर किस मुह से मोदी, खट्टर को राज धर्म निभाने के लिए बोलेंगे।

अच्छा होता जो केजरीवाल से हर बात पर अपने 100-100 रु के चंदे को मांगने पहुँच जाते है वो अपने टैक्स के पैसे को मांगने की हिम्मत भी दिखा पाते, जिसमे 34000 हजार करोड़ से ज्यादा की संपत्ति स्वाह कर दी गई । लेकिन वो कभी ऐसा नहीं कर पायेंगे क्योकि वो जानते है जिस दिन सरकार के खिलाफ बोलेंगे देशद्रोही कहलायेंगे या फिर हो सकता है कि गो मांस खाने के अफवाह फैला कर उन्हें पीट पीट कर मार डाले ।

जो लोग केजरीवाल के 200 करोड़ की सब्सिडी पर विधवा विलाप करते थे वो 34 हजार करोड़ के नुकसान पर चुप क्यों है समझ नहीं आया |

एक सज्जन कहते है की जिन वकीलों ने कन्हैया के साथ मारपीट की मैं अपनी 6 महीने की सलेरी देना चाहता हूँ । लेकिन इस मुद्दे पर जैसे सांप सूंघ गया । पुलिस खुद आरोपियों को गिरफ्तार करने से बचती रही और आरोपियों से सरेंडर की भीख मांगती रही। सुनने में तो यंहा तक आ रहा है की JNU में इस तरह की घटनाये पिछले 2 सालों से हो रही थी आब प्रशन उठता है की आखिर सरकारे कर क्या रही थी, क्यों इन आरोपियों को बचाने की कोशिश हो रही थी |

एक बार कल्पना कीजिये कि केंद्र और हरियाणा में भाजपा के आलावा कोई दूसरी सरकार होती तो क्या होता, क्या संघ और तथाकथित राष्ट्रवादी भाजपा के कार्यकर्त्ता ऐसे ही प्रतिक्रिया देते।

संघ के हजारो लोग आये दिन विपक्षी पार्टियों के खिलाफ तरह तरह कीअफवाह फैलाते रहते है। दिल्ली में ODD-EVEN के समय भी ऐसी हजारो अफवाह फैलाई गई । क्या हरियाणा, JNU, हैदराबाद यूनिवर्सिटी में हा रही घटनाये किसी जंगल राज से कम है | क्या राष्ट्रपति महोदय इन सभी घटनाओ पर केंद्र और राज्य सरकारों से जवाब मागेंगे |

क्या पूज्य राष्ट्र पिता महात्मा गाँधीजी की पुरानी फोटो को फोटोशोप कर अफवाह फैलाना राष्ट्रवाद है ?

स्मृति ईरानी ने रोहित वेमुला पर संसद में झूठ बोला क्या संसद (लोकतंत्र के मंदिर) में झूठ बोलना देशद्रोह नहीं ?

क्या ये केवल संयोग है की जब से केंद्र में मोदी सरकार आई है ऐसे दंगो जो समाज को धर्म और जात के नाम पर बाँटते है, की बाढ़ सी आ गई है। #FTTI, #Rohit #JNU #JatAndolan #Malda #Poornia #Dadari

शर्म है ऐसे देशभक्तों पर !!

गर्व है मैं संघी नहीं हूँ

गर्व है मैं ऐसा देशभक्त नहीं हूँ

गर्व है मैं देश द्रोही हूँ


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