सोपोर।अलगाववादियों के सोपोर मार्च को देखते हुए घाटी में सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे।पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों की भारी तैनाती की गई थी ताकि हिंसक प्रदर्शनों को रोका जा सके।जगह-जगह वाहनों को लेकर तलाशी ली गई।लोगों के पहचान पत्र तक चेक किए गए।श्रीनगर के माईसुमा इलाके को छोड़कर शहर के बाकी हिस्सों को कोई पाबंदियां नहीं देखने को मिलीं।यहां किसी भी इलाके से हिंसक प्रदर्शन की खबर नहीं मिली।

प्रशासन द्वारा श्रीनगर के पुराने शहर के नौहट्टा इलाके में स्थित ऐतिहासिक जामिया मसजिद को भी सख्त घेरे में रखा गया था और किसी को भी वहां जुमे की नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दी गई।बारामुला जिले के नारबल से भी कई को मिर्गुण्ड के पास धर दबोचा गया।इतिहादुल मुसलमीन के संरक्षक मौलाना अब्बास अंसारी और अध्यक्ष मसरूर अब्बास को भी पुलिस द्वारा नजरबंद रखा गया था।फ्रीडम पार्टी के समर्थक जिनमें मुख्तार अब्बास सोफी, इंजीनियर फारूक, जहूर अहमद शेख और मोहम्मद यूसुफ मीर शामिल थे को पुलिस द्वारा पट्टन में हिरासत में लिया गया।उत्तरी कश्मीर के पट्टन के करीरी इलाके में भीषण पत्थरबाजी की गई। देर शाम तक यहां पुलिस के साथ झड़प होती रही।प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए।

सोपोर में सुबह से ही भारी संख्या में जवानों की तैनाती की गई थी और बाहर जाने से सभी रास्ते सील कर दिए गए थे।सड़कों पर कंटीली तारें लगाई गई थी और साथ ही हर गली में में जवान तैनात किए गए थे। सख्त पाबंदी के बावजूद कुछ अलगाववादी नेता मोहम्मद एहसान उनटू और शबीर अहमद डार सोपोर पहुंचने में सफल रहे जहां उन्होंने जामिया मसजिद में लोगों को संबोधित किया।केवल बुजुर्ग लोगों को सोपोर की जामिया मसजिद में नमाज पढ़ने दी गई।

वहीं रहीम साहब इलाके में कुछ लोगों द्वारा प्रदर्शन मार्च निकालने का प्रयास किया गया जिसे पुलिस ने विफल कर दिया गया।इसके अलावा बारामुला के आजादगंज पुल, सीमेंट पुल और बस अड्डे वाले पुल को पुलिस द्वारा सील किया गया था। बताते चलें कि, वर्ष-1984 और 1990 के बाद यह तीसरी बार है कि रमजान के पहले दिन ही सोपोर और श्रीनगर के पुराने शहर में कर्फ्यू लगाया गया हो।


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