ब्रिटेन में हुए एक नए रिसर्च से पता चला है कि इस देश में इस्लाम सबसे तेजी से बढ़ने वाला धर्म है । वहीं, चर्च ऑफ इंग्लैंड को कम संख्या में अनुयायी मिल रहे हैं। नैटसेन के ब्रिटिश सोशल ऐटिट्यूड्स सर्वे के मुताबिक पिछले दो सालों में चर्च ऑफ इंग्लैंड के 20 लाख अनुयायी कम हुए हैं तो इस्लाम धर्म के मानने वालों की संख्या 10 लाख तक बढ़ी है।

हालांकि, अब भी ब्रिटेन में सबसे ज्यादा संख्या किसी भी धर्म को नहीं मानने वालों की है। ये ब्रिटेन की कुल आबादी के करीब आधे (49 फीसदी) हैं। 1983 में ब्रिटेन में नास्तिक कुल आबादी के 31 फीसदी और एक दशक पहले कुल आबादी के 43 फीसदी थे। 1983 में ब्रिटेन में नास्तिकों की संख्या 1.28 करोड़ थी जो 2014 में बढ़कर 2.47 करोड़ हो गई।

नैटसेन के सर्वे से निकले नतीजों के मुताबिक, ब्रिटिश वयस्क काफी कम संख्या में चर्च ऑफ इंग्लैंड के अनुयायी बन रहे हैं। 1983 में 40 फीसदी लोग चर्च के अनुयायी थे, 2014 में इनका प्रतिशत घटकर 17 ही रह गया। चर्च ऑफ इंग्लैंड के अनुयायियों की संख्या में बीते एक दशक में सबसे ज्यादा नाटकीय परिवर्तन आया है।

नैटसेन की नाओमी जोन्स ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा, ‘1983 में इस्लाम को मानने वालों की संख्या कुल आबादी की महज 0.6 फीसदी थी, जो 2014 में बढ़कर करीब 5 फीसदी तक पहुंच गई है।’

उन्होंने कहा, ‘कैथोलिक्स की संख्या 30 सालों से लगभग एक सी रही है। हम जानते हैं और पिछले शोधों में हमने देखा है कि ब्रिटेन में नास्तिकों की बढ़ती संख्या के पीछे नई पीढ़ियों का पिछली पीढ़ी के मुकाबले कम आस्थावान होना है। इसलिए, पुरानी पीढ़ियां खत्म हो रही हैं तो नास्तिकों की संख्या अपने आप बढ़ रही है।’

नाओमी का कहना था, ‘हालांकि, इससे ही स्पष्ट नहीं होता कि सिर्फ चर्च ऑफ इंग्लैंड के अनुयायियों की संख्या क्यों कम हो रही है।’ उन्होंने संभावना जताई कि ब्रिटेन में कैथोलिक और गैर-ईसाई प्रवासियों की संख्या बढ़ने से भी चर्च ऑफ इंग्लैंड के अनुयायियों का अनुपात कम हो रहा है।


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