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दुनिया के सबसे महानतम खिलाड़ियों में शुमार बॉक्सर मोहम्मद अली का निधन हो गया है. 74 वर्षीय अली सांस लेने में तकलीफ की बीमारी से जूझ रहे थे जोकि पार्किंसन नामक बीमारी की वजह से हुई थी. 32 साल तक पार्किंसन से लड़ने के बाद अमेरिका के एक अस्पताल में 3 जून को उन्होंने आखिरी सांस ली.

मोहम्मद अली का जन्म 17 जून अमेरिका में हुआ था. 1964 में 22 वर्ष की उम्र में अली सॉनी लिस्टन को हराकर पहली बार वर्ल्ड हैवीवेट चैंपियन बने थे. इसके बाद उन्होंने इस्लाम धर्म अपना लिया था और फिर मोहम्मद अली के नाम से मशहूर हुए. अली तीन बार वर्ल्ड हैवीवेट चैंपियन रहे.

अली का सफ़र 5 सितंबर 1960 से शुरू होता है जब उन्होंने रोम ओलंपिक में लाइटवेट के फ़ाइनल मुक़ाबले में पोलैंड के बीगन्यू ज़ीग्गी पैत्रिज्वोस्की को मात दी थी. मोहम्मद अली ने अपने जीवन में कुछ 61 फाइट लड़ी, जिनमें से 56 मुकाबले में उन्होंने जीत हासिल की और सिर्फ 5 बार ही वह हारे. उनके नाम 1960 रोम ओलंपिक में जीता लाइट हैवीवेट गोल्ड मेडल भी दर्ज है. वह 1981 में बॉक्सिंग से रिटायर हुए थे. मोहम्मद अली ने चार शादियां की थीं, जिनसे उनको कुल नौ बच्चे (7 बेटे और दो बेटियां) हुए.

मुहम्मद अली

मोहम्मद अली जब 12 वर्ष के थे तो उनके पिता ने उन्हें एक साइकिल गिफ्ट की थी. लेकिन किसी ने अली की साइकिल चुरा ली थी. इस बात से नाराज अली ने एक पुलिसवाले से कहा कि वह उस चोर की धुनाई करना चाहते थे. उस पुलिसवाले का नाम था जो मार्टिन, जो एक बॉक्सिंग ट्रेनर था, उन्होंने अली को अपने अंडर में ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया. बचपन में मोहम्मद अली दूसरे बच्चों की तरह स्कूल बस से स्कूल न जाकर बस से रेस लगाकर स्कूल जाया करते थे.

मोहम्मद अली को फ्लाइट में बैठने और ऊंची उड़ान भरने से बहुत डर लगता था. ओलंपिक से कुछ हफ़्ते पहले वे अपनी दावेदारी से पीछे हटना चाहते थे क्योंकि उन्हें हवाई जहाज़ से जाने में डर लगता था. उन्होंने यह भी पूछा था कि ऐसा नहीं हो सकता है कि वे पानी के जहाज़ या ट्रेन से रोम जा सकें. जब उनसे कहा गया कि यह संभव नहीं है तो उन्होंने आर्मी के स्टोर से जाकर एक पैराशूट ख़रीदा था जो उन्होंने सफ़र भर अपने साथ रखा. ये सोच कर कि अगर विमान हादसे का शिकार हो गया तो वो कम से कम पैराशूट से नीचे कूद जाएंगे. लेकिन शुक्र है कि ऐसा नहीं हुआ और दुनिया को एक नायाब बॉक्सर देखने को मिला. फिर वही मोहम्मद अली हवाई जहाज़ में बैठकर दुनिया भर में घूमे.

मुहम्मद अली

शायद बहुत कम लोगों को पता होगा कि मोहम्मद अली एक बेहतरीन बॉक्सर होने के साथ-साथ गायक, ऐक्टर और कवि भी थी. सॉनी लिस्टन को हराकर वर्ल्ड हैवीवेट चैंपियन बनने से महज छह महीने पहले उन्होंने अपना ऐल्बम ‘आई एम द ग्रेटेस्ट’ रिलीज किया था. मोहम्मद अली जब छोटे थे तो उन्होंने उस समय के फेमस बॉक्सर शुगर रे रॉबिंसन से ऑटोग्राफ मांगा था लेकिन रॉबिंसन ने उन्हें झिड़कते हुए कहा, ‘मेरे पास समय नहीं है.’ इस बात से अली को इतनी चोट पहुंची कि इसके बाद उन्होंने कभी भी अपने किसी फैन को ऑटोग्राफ के लिए मना नहीं किया.

मोहम्मद अली का प्रैक्टिस करने का तरीका बहुत ही निराला था, वह अपने भाई को खुद पर पत्थर फेंकने के लिए कहते थे और उन पत्थरों से खुद को बचाकर प्रैक्टिस करते थे. उनके छोटे भाई रूडी ने बाद में कहा था, ‘इससे फर्क नहीं पड़ता कि मैंने कितने पत्थर फेंके लेकिन मेरे द्वारा फेंके पत्थर कभी उन्हें छू भी नहीं पाए.’

अमेरिका में 60-70 के दशक में रंगभेद किस कदर हावी था इसका उदाहरण मोहम्मद अली के साथ हुई एक घटना से लगाया जा सकता है. अली 1960 में रोम ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर जब अमेरिका में एक रेस्टोरेंट में डिनर करने गए तो वेटर नेएक नीग्रो को सर्व करने से मना कर दिया. इस अपमान से आहत अली ने बाहर आकर गुस्से में अपना गोल्ड मेडल यह कहते हुए फेंक दिया कि जिस देश में इस कदर रंगभेद हो, वहां का मेडल मुझे नहीं पहनना है.

मुहम्मद अली

1981 में मोहम्मद अली ने एक आदमी को मरने से बचाया था. दरअसल बिल्डिंग से कूदकर आत्महत्या की कोशिश कर रहे एक युवक को जब पुलिसकर्मी आत्महत्या न करने के लिए समझाने में असफल रहे तो मोहम्मद अली ने ये काम कर दिखाया. अली उस आदमी के पास वाली खिड़की से उस आदमी से आधे घंटे तक बात की और उसे यह मनाने में कामयाब रहे कि उसकी निजी जिंदगी में चल रही परेशानियां ठीक हो जाएंगी.

इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन ने 1990 में कुवैत पर हमला करके 2000 से ज्यादा विदेशियों को बंधक बना लिया था. बंधकों को छुड़ाने के लिए मोहम्मद अली सद्दाम से बातचीत करने बगदाद पहुंचे. अली के साथ 50 मिनट की बातचीत के बाद सद्दाम ने 15 अमेरिकी बंधकों को छोड़ दिया था.

1967 में अमेरिका और वियतनाम युद्ध का विरोध करने की उनकी भारी कीमत चुकानी पड़ी. अली ने न सिर्फ वियतनाम पर अमेरिकी हमले का विरोध किया बल्कि युद्ध के लिए अमेरिकी सेना का हिस्सा बनने से भी इंकार कर दिया. जिसके बाद अली के सारे वर्ल्ड चैंपियनशिप खिताब छीन लिए गए और उन पर बैन लगा दिया गया. 1971 में उनकी अपील पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ये बैन हटाया. इस बैन की वजह से अली को अपने करियर के 4 साल गंवाने पड़े.

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बहुत कम लोगों को पता होगा कि मोहम्मद अली की बेटी लैला अली भी बेहतरी बॉक्सर रही हैं. अली के नौ बच्चों में सबसे छोटी लैला अली ने 24 मुकाबले लड़े और सभी में जीत हासिल की. वह कभी न हारने वाली बॉक्सर के रूप में रिटायर हुईं.

मोहम्मद अली ने दलाई लामा से लेकर पोप तक कई हस्तियों से मुलाकात की थी. उन्होंने जिन लोगों से मुलाकात की थी उनमें अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्लू बुश, बिल क्लिंटन, जिमी कार्टर, बराक ओबामा, भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, द बीटल्स, बॉब डायलन और जोन बेज़ शामिल थे.

मोहम्मद अली नेशन ऑफ इस्लाम के समर्पित मेंबर थे। साल 1962 में मैल्कम एक्स के संरक्षण में वह इसमें शामिल हुए थे। जब उस साल नेशन ऑफ इस्लाम जॉइन करने की खबर फैली तो उसी दौरान का एक मुकाबला कैंसल कर दिया गया था। बाद में उन्होंने आधिकारिक रूप से 1964 में इसे जॉइन किया। इसके बाद उन्हें 2 ऑर्गेनाइजेशन के बॉक्सिंग टाइटल से हाथ धोना पड़ा। इसमें WBA भी शामिल था।

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जल्द ही नेशन ऑफ इस्लाम के लीडर एलिजा मुहम्मद ने अली के पिता की भूमिका ले ली। आगे चलकर कैसियस क्ले नाम का शख्स मोहम्मद अली बन गया। इसके बाद अली को नेशन ऑफ इस्लाम छोड़ना पड़ा, क्योकि एलिजा मोहम्मद 1975 में सत्ता से बेदखल हो गए। बाद में अली ने सुन्नी इस्लाम को कबूल किया और फिर उन्होंने सूफीवाद को अपना लिया।
डॉनल्ड ट्रंप के अमेरिका में गैर अमेरिकी मुस्लिमों की एंट्री को बैन करने की बात पर अली ने ट्रंप के इन बयानों की कड़ी निंदा की थी। अली ने कहा कि इस्लाम शांति का मजहब है। उन्होंने कहा कि ट्रंप को राजनीतिक फायदे के लिए नफरत फैलाने वाले बयान नहीं देने चाहिए। अली ने कहा था, ‘हमलोग मुसलमान के तौर पर उन लोगों के खिलाफ हैं, जो इस्लाम का इस्तेमाल पर्सनल अजेंडे को साधने में कर रहे हैं।’
(ये लेख विभिन्न माध्यमों से रिसर्च करके कोहराम न्यूज़ के लिया बनाया गया है. जिनमे ichowk.in, BBC Hindi, Navbharat Times के अंश शामिल हैं.)

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