उत्तर प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी आजकल बदलाव के दौर से गुज़र रही है अबतक सपा मुस्लिम की पैरवी करने वाली पार्टी के रूप में जानी जाती रही है मगर दादरी और उसके बाद सपा मुखिया का भाजपा और सपा में समानता उसके बाद बिहार में जाके भाजपा की लहर जैसे बयानों ने सपा के मुस्लिम समर्थको को हैरान कर दिया है

सरकारी गलियारे में माहौल गर्म है कि सरकार के कद्दावर मंत्री आज़म खान भी सपा के बदलते रुख से नाराज़ है लेकिन इन सब से बेपरवाह मुलायम ने अमर को सपा में बड़ी भूमिका देने का मन बना लिया है मुलायम की बदली रणनीति ने 2017 में सपा के चुनावी एजेंडे को काफी हद साफ़ कर दिया है अब मुलायम सपा को भाजपा विरोधी नही कांग्रेस विरोधी दिखाने की कोशिश में है मुलायम का सोचना है इससे सपा के खिलाफ धार्मिक गोलबंदी नही होगी ,साथ ही यादव की गोलबंदी और मुस्लिम कार्यकर्ताओ के सहारे मुस्लिम वोट जितना पा सके उतना पाने की योजना है ।

azam khan challenge mulayam singh over his amar singh love

जानकारो की माने तो आज़म खान 2017 के चुनाव में पार्टी की रणनीति में फिट नही बैठते है दादरी में अखलाख की हत्या पे आज़म के UNO को लैटर लिखने से पार्टी खुद को असहज पा रही है अमर सिंह द्वारा आज़म के कपडे उतरवा लेने जैसे व्यंग बिना मुलायम की सहमति के अमर सिंह नही कह सकते है। इसके बाद अमर सिंह पर आज़म खान ने ज़ोरदार प्रहार अपने ही अंदाज़ में अमर सिंह और संगीत सोम पे अपनी हत्या की साज़िश रचने का आरोप लगा के सपा मुखिया को सन्न कर दिया आज़म के हमले पे सपा मुखिया ने अमर आज़म विवाद को घर का मामला बता के सुल्झालेने की बात कह कर बैकफुट पे आ गए ।

लेकिन आज़म अब शांत होने की मुद्रा में दिखाई नही दे रहे है मुज़फ्फरनगर दंगो से दादरी की घटनाओ तक आज़म खान का अपने को लाचार पा रहे है ऊपर से मुलायम की बेपरवाही से सपा से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे आज़म ने कहा की अगर मैंने राज़ खोला तो बात दूर तक जायेगी | सूत्रो की माने तो आज़म खान का पार्टी से इस्तीफ़ा बस एक महज़ औपचारिकता है मुलायम और आज़म दोनों बस सही वक़्त का इंतज़ार कर रहे है


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