Communal-violence-in-kanpur-01-1445741069

पिछले कुछ समय में जिस प्रकार की घटनाएं हमारे देश में हुई है वे हमारी पूर्वाग्रह भरी सोच का ही निष्कर्ष हैं। चाहे दादरी में हुआ अखलाख हत्याकांड हो अथवा हाल ही में जोधपुर शहर में एक बछड़े के अवशेष मिलने के बाद पैदा हुई तनावपूर्ण स्थिति हो। लोग बिना जांच पड़ताल के ही नतीजे पर पहुंच जाते हैं और किसी व्यक्ति विशेष अथवा समुदाय विशेष को उस घटना का जिम्मेदार ठहरा देते हैं। और इतना ही नहीं वे कानून को उसका कार्य करने देने की बजाय स्वयं ही कानून हाथ में लेकर सजा भी दे देते हैं।

उत्तर प्रदेश के दादरी शहर में हुई घटना से हम सभी भली भांति परिचित हैं। किस प्रकार मात्र एक अफवाह के आधार पर उग्र भीड़ द्वारा अखलाख की निर्मम हत्या कर दी गईं थी। अफवाह फैलायी गईं थी कि अखलाख के परिवार ने घर में गाय का मांस रखा हुआ है हालाँकि बाद में रिपोर्ट में साबित हो गया कि जो मांस अखलाख के घर से मिला था वो गाय का नहीं था। परन्तु मेरा सवाल ये हैं कि आखिरकार लोगों ने ये क्यों विश्वास कर लिया कि वो मांस गाय का ही होगा? और क्यों एक अफवाह के आधार पर अखलाख की हत्या कर दी गई?

Muzaffarnagar Riots Court Lets Off 10 In Murder Of Boy Woman

ऐसी ही एक घटना का वर्णन करना चाहता हूँ जो हाल ही में राजस्थान के जोधपुर शहर में हुई। 1 मार्च 2016 को जोधपुर शहर के एक इलाके में एक गाय के बछड़े का कटा हुआ सिर मिला। देखते ही देखते ये बात आग की तरह पूरे शहर में फैल गई। और कई हिन्दू संगठनो के सैकड़ों कार्यकर्ता सड़कों पर प्रदर्शन करने पहुँच गए और कई स्थानों पर तोड़-फोड़ करने लगे एवं मुसलमानों के खिलाफ नारेबाजी करने लगे जिससे अचानक ही शहर में बेहद तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। सभी शहरवालों को ये भय सताने लगा कि कहीं कुछ अनहोनी न हो जाए।

हालांकि समय रहते पुलिस द्वारा शहर में कर्फ्यु लगाने एवं शहरवासियो की सूझ-बूझ से स्थिति पर काबू पा लिया गया और एक और अखलाख हत्याकांड को होने से रोक दिया गया। फिर पुलिस की जाँच पड़ताल से ये साबित हुआ कि उस बछड़े की मृत्यु प्राकृतिक कारणों से हुई थी और कुत्तों ने उसे नोचने के बाद उसका सिर शहर के एक इलाके में छोड़ गए।

कुछ समय पहले मैनें सोसियल मीडिया पर ऐसी ही एक कहानी पढ़ी थी जो वास्तव में हमारी इसी पूर्वाग्रह सोच को ही चित्रित करती हैं। कहानी कुछ इस प्रकार है; “एक दिन एक बाज के चूज़े उनकी माँ से कहने लगे कि वे इन्सान का मांस खाना चाहते हैं। अपने चूज़ों की इस इच्छा को पूरा करने के लिए बाज ने उड़ान भरी और पूरे दिन तलाश करती रही पर उसे कहीं भी किसी इन्सान की लाश नजर नहीं आयी इसलिए अंत में वह एक सूअर का मांस ले आयी पर चूज़ों ने उसे खाने से मना कर दिया। अगले दिन वह बाज फिर से इन्सान का मांस लेने निकल पड़ी परन्तु कहीं भी सफलता हाथ न लगी और इस बार वह एक गाय का मांस ले आयी पर चूज़ों ने उसे खाने से मना कर दिया। तब बाज ने एक तरकीब सोची और सूअर के मांस को उसने एक मस्जिद में फेक दिया और गाय के मांस को एक मंदिर में फेक दिया। जैसे ही ये बात शहर में फैली दन्गे हो गये और देखते ही देखते सैकड़ों हिन्दू व मुसलमान आपस में लड़ कटकर मर गये और फिर बाज उनमें में से एक इन्सान की लाश से मांस नोच कर अपने चूज़ों के लिए ले गई और उनसे कहा “ये लो इन्सान का मांस”।

चाहे अखलाख हत्याकांड हो, जोधपुर की घटना हो या फिर बाज वाली कहानी हो। तीनों ही घटनाओं के पीछे किसी भी इन्सान की कोई गलती या साजिश नहीं थी न किसी हिंदू की न किसी मुसलमान की। ये तीनों ही घटनाएँ होने की वजह सिर्फ और सिर्फ हमारा पूर्वाग्रह। अखलाख हत्याकांड हुआ क्योंकि हिंदुओं ने सोचा कि अखलाख का परिवार मुसलमान हैं इसलिए वे जरूर गाय का मांस खाते होगे। जोधपुर की घटना हुई क्योंकि फिर हिंदुओं ने सोचा कि जरूर किसी मुसलमान ने ही बछड़े को मारा होगा। बाज वाली कहानी में मुसलमानों ने सोचा कि जरूर किसी हिंदू ने ही सूअर का मस्जिद में फेका होगा और हिंदुओं ने सोचा कि जरूर किसी मुसलमान ने ही गाय का मांस मंदिर में फेका होगा।

हमें जरुरत हैं कि हम अपनी सोच को बदले और अपने पूर्वाग्रह को बदले तभी ऐसी घटनाओं को होने से रोका जा सकता हैं अन्यथा हमारा पूर्वाग्रह देश को बर्बाद कर देगा।

मोहम्मद जुनेद टाक
[email protected]


लाइक करें :-


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें

कमेंट ज़रूर करें